श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पावन पर्व इस बार देश भर में अत्यंत उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक बेहद जीवंत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध तस्वीर सामने आई है। जौनपुर के स्थानीय क्षेत्र में स्थित राजकीय हाईस्कूल परियावा में इस वर्ष जन्माष्टमी का त्योहार पारंपरिक और आधुनिकता के अनूठे संगम के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों बल्कि स्थानीय नागरिकों का भी मन मोह लिया।
परियावा स्कूल में गूंजे कन्हैया के जयकारे
सितंबर 2026 के इस पावन सप्ताह में जब पूरा देश बाल गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियों में लीन था, तब जौनपुर के राजकीय हाईस्कूल परियावा का प्रांगण भी वृंदावन और गोकुल की तर्ज पर सजा हुआ था। विद्यालय की साज-सज्जा देखते ही बनती थी। चारों तरफ फूलों की मालाएं, रंग-बिरंगे गुब्बारे और मनमोहक झांकियां इस बात की गवाही दे रही थीं कि इस आयोजन के लिए कितनी तैयारी की गई थी। सुबह की प्रार्थना सभा से ही विद्यालय का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो चुका था।
छोटे-छोटे बच्चों ने भगवान कृष्ण और राधा के रूप में सुंदर वेशभूषा धारण कर रखी थी। किसी ने कान्हा की तरह मुकुट पर मोरपंख सजाया हुआ था, तो किसी ने बांसुरी थाम रखी थी। इन नन्हे-मुन्ने कलाकारों की मोहक मुस्कान ने पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर दिया। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी बच्चों के इस उत्साह को सराहा और उनके साथ इस पावन पर्व की खुशियां साझा कीं।
मटकी फोड़ प्रतियोगिता ने बढ़ाया रोमांच
जन्माष्टमी के उत्सव की बात हो और मटकी फोड़ प्रतियोगिता का जिक्र न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है! राजकीय हाईस्कूल परियावा में आयोजित इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण मटकी फोड़ प्रतियोगिता ही रही। विद्यालय के खेल मैदान में काफी ऊंचाई पर मक्खन से भरी मटकी टांगी गई थी।
- विद्यार्थियों ने अपनी टोलियां बनाईं और एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव पिरामिड तैयार किया।
- गोविंदा आला रे के पारंपरिक गीतों के बीच बच्चों का उत्साह चरम पर पहुंच गया था।
- दर्शकों की जोरदार तालियों और हूटिंग के बीच आखिरकार एक साहसी छात्र ने मटकी फोड़कर इस रोमांचक प्रतियोगिता को अपने नाम कर लिया।
- इस दौरान पूरा माहौल 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के नारों से गूंज उठा।
यह प्रतियोगिता न केवल मनोरंजन का साधन बनी, बल्कि इसने बच्चों को टीम वर्क, आपसी सहयोग और एक लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर प्रयास करने का एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया।
झूलन उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
मटकी फोड़ के बाद विद्यालय परिसर में पारंपरिक झूलन उत्सव का आयोजन किया गया। फूलों से सजाए गए एक भव्य झूले पर बाल गोपाल की प्रतिमा को स्थापित किया गया। विद्यालय के शिक्षकों, प्रधानाचार्य और छात्र-छात्राओं ने बारी-बारी से कन्हैया के झूले को झुलाया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। छात्र-छात्राओं ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किए, जिन्हें देखकर उपस्थित सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए। कुछ विद्यार्थियों ने कृष्ण-सुदामा की मित्रता और गीता के सार पर आधारित छोटे-छोटे नाटक भी प्रस्तुत किए, जिनकी गहराई और अभिनय क्षमता ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
शिक्षा के साथ संस्कारों का समन्वय
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन केवल मनोरंजन के लिए नहीं होते, बल्कि ये हमारी प्राचीन संस्कृति और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम हैं। भगवान कृष्ण के जीवन दर्शन से हमें कर्म, निष्ठा और प्रेम का संदेश मिलता है जो विद्यार्थियों के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मिष्ठान वितरण और प्रसाद के साथ इस भव्य उत्सव का समापन हुआ। जौनपुर के परियावा स्कूल का यह आयोजन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई इस सफल और अनुशासित आयोजन के लिए विद्यालय प्रबंधन की सराहना कर रहा है।