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नेपाल बाढ़ त्रासदी: 4,875 लापता लोगों की तलाश जारी, 1,252 शव बरामद

नेपाल बाढ़ त्रासदी: 4,875 लापता लोगों की तलाश जारी, 1,252 शव बरामद

हिमालयी देश नेपाल इन दिनों प्रकृति के एक भीषण और झकझोर देने वाले प्रकोप का सामना कर रहा है। रसुवा जिले के भोटेकोशी क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में मची तबाही के निशान अब और भी डरावने रूप में सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में जारी ताजा आंकड़ों ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। राहत और बचाव कार्यों के दौरान जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है, वैसे-वैसे दिल दहला देने वाली सच्चाइयां बाहर आ रही हैं।

भोटेकोशी बाढ़ का खौफनाक मंज़र: अब तक 1,252 शव बरामद

प्राधिकरण द्वारा आज दोपहर 12 बजे जारी किए गए आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, नेपाल के विभिन्न हिस्सों में आई इस विनाशकारी बाढ़ और उसके बाद हुए भूस्खलन की चपेट में आकर जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रशासन ने अब तक कुल 1,252 शवों को बरामद कर लिया है। आपदा के इस विकराल रूप ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ कर रख दिया है।

प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन परिवारों को ढांढस बंधाना है जिनके अपने अभी भी लापता हैं। आंकड़े बताते हैं कि तबाही का दायरा कितना व्यापक था, क्योंकि राज्य के कई जिले इसकी चपेट में बुरी तरह आए हैं।

विभिन्न जिलों में बरामद शवों का आधिकारिक आंकड़ा

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, नेपाल के अलग-अलग जिलों से बरामद किए गए शवों का विवरण इस प्रकार है:

  • रसुवा: 127 शव
  • नुवाकोट: 177 शव
  • धादिङ: 60 शव
  • गोरखा: 69 शव
  • तनहुँ: 38 शव
  • नवलपरासी पूर्व: 218 शव
  • नवलपरासी पश्चिम: 208 शव
  • चितवन: 355 शव

इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि चितवन और दोनों नवलपरासी जिलों में पानी के तेज बहाव और आपदा ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है, जहां सबसे अधिक संख्या में शव बरामद किए गए हैं।

अभी भी 4,875 लोग लापता, तलाश के लिए युद्धस्तर पर अभियान

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आपदा के इतने दिन बीत जाने के बाद भी लगभग 4,875 लोग अभी भी लापता हैं। उनके जीवित या मृत होने की कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है, जिससे उनके परिजनों की बेचैनी हर गुजरते पल के साथ बढ़ती जा रही है। स्थानीय प्रशासन, सेना और आपदा प्रबंधन बलों की टीमें लगातार मलबे को खंगालने और नदियों के किनारे सर्च ऑपरेशन चलाने में जुटी हुई हैं।

लापता लोगों के परिजनों की आंखें अब भी अपनों की वापसी का इंतजार कर रही हैं। आपदा स्थलों पर तैनात बचावकर्मी दिन-रात एक करके इस नामुमकिन सी दिखने वाली तलाश को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। दुर्गम इलाके और लगातार खराब हो रहा मौसम इस राहत कार्य में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

राहत कार्यों में तेजी: अब तक 11,993 लोग सुरक्षित बचाए गए

इस भीषण त्रासदी के बीच राहत की एक उम्मीद यह है कि सुरक्षा बलों और आपदा प्रबंधन इकाइयों ने अपनी जान जोखिम में डालकर अब तक कुल 11,993 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया है। जिन इलाकों का संपर्क मुख्य शहरों से पूरी तरह कट गया था, वहां हेलीकॉप्टरों के जरिए राहत सामग्रियां पहुंचाई जा रही हैं और घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में शिफ्ट किया जा रहा है।

सरकार ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप स्थापित किए हैं ताकि जल जनित बीमारियों और संक्रमण फैलने से रोका जा सके। बेघर हुए हजारों लोगों के लिए अस्थायी राहत शिविरों (शेल्टर होम्स) में खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की जा रही है।

जलवायु परिवर्तन और हिमालयी क्षेत्रों पर मंडराता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अप्रत्याशित और भयानक आपदाएं इस बात का संकेत हैं कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बेहद संवेदनशील स्थिति से गुजर रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के मिजाज में आ रहे तेज बदलाव और अत्यधिक बारिश पहाड़ों की स्थिरता को कमजोर कर रही है, जिसके परिणाम स्वरूप ऐसी आपदाएं सामने आ रही हैं।

प्रशासन की अपील और आगे की राह

नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे नदियों के किनारे और भूस्खलन संभावित (Landslide-prone) क्षेत्रों से पूरी तरह दूर रहें। मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल, पूरा देश इस अभूतपूर्व त्रासदी से उबरने की कोशिश कर रहा है। खोए हुए अपनों का दर्द और उजड़े हुए आशियानों की दास्तान नेपाल के इतिहास के सबसे काले पन्नों में दर्ज हो चुकी है, और इस जख्म को भरने में अभी लंबा समय लगेगा।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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