स्मार्टफोन पर डूमस्क्रॉलिंग से मानसिक थकान और ब्रेन फॉग बढ़ता है। जानिए खाली समय में किन 5 आदतों को अपनाकर आप अपने दिमाग को तेज और स्वस्थ रख सकते हैं।
स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल और खाली समय में लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत यानी डूमस्क्रॉलिंग से न केवल कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे ब्रेन फॉग और मेंटल फटीग जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
वर्तमान समय में स्मार्टफोन हमारी दैनिक जीवनशैली का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। ऑफिस के काम से लेकर मनोरंजन तक, हर चीज के लिए हम इस पर निर्भर हैं। यहां तक कि थोड़ा सा भी खाली समय मिलने पर हमारी उंगलियां स्वतः सोशल मीडिया फीड को रिफ्रेश करने लगती हैं। इस अनियंत्रित आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है, जो हमारे मस्तिष्क को लगातार अति-उत्तेजित (over-stimulated) रखती है। इस लत से बाहर निकलने और अपनी मानसिक क्षमता को बढ़ाने के लिए कुछ रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
नई भाषा या तकनीकी स्किल सीखें
मस्तिष्क को सक्रिय और पैना बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका नई दक्षता हासिल करना है। सोशल मीडिया पर अंतहीन स्क्रॉल करने के बजाय इस समय का उपयोग किसी नई भाषा को सीखने में किया जा सकता है। इसके लिए आधुनिक भाषा सीखने वाले मोबाइल ऐप्स की मदद ली जा सकती है। इसके अतिरिक्त, कोडिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग या सुलेख (कैलीग्राफी) जैसी नई विधाएं सीखने से मस्तिष्क के कॉग्निटिव फंक्शन में सुधार होता है और बौद्धिक क्षमता बढ़ती है.
गहन पठन की आदत डालें
सोशल मीडिया पर मिलने वाली सतही और क्षणिक जानकारियों पर निर्भर रहने के बजाय अखबार, पुस्तकें या सारगर्भित निबंध पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। इससे व्यक्ति का अटेंशन स्पैन यानी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता मजबूत होती है और ज्ञान का दायरा भी विस्तृत होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में रोजाना 10 से 15 पन्ने पढ़ने का लक्ष्य रखना चाहिए और धीरे-धीरे इस दायरे को बढ़ाना चाहिए।
बौद्धिक खेल और पहेलियां हल करें
अखबारों में प्रकाशित होने वाले सुडोकू, क्रॉसवर्ड और शतरंज जैसे तार्किक खेल मानसिक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार की गतिविधियां लॉजिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को बढ़ावा देती हैं। ये खेल दिमाग के उस हिस्से को सक्रिय करते हैं जो स्मरण शक्ति (याददाश्त) और विश्लेषणात्मक सोच के लिए जिम्मेदार होता है।
रचनात्मक लेखन और डायरी लेखन अपनाएं
दिनभर की भागदौड़ और मस्तिष्क में चलने वाले विचारों को कागज़ पर उतारना मानसिक स्पष्टता (मेंटर क्लेरिटी) हासिल करने का एक बेहतरीन माध्यम है। रात को सोने से पहले आभार व्यक्त करते हुए ग्रैटिट्यूड जर्नल लिखना मानसिक शांति देता है। इसके अलावा, कविताएं लिखना, छोटी कहानियां रचना या दिन की सबसे दिलचस्प घटनाओं को डायरी में दर्ज करना मस्तिष्क की रचनात्मकता को पोषित करता है और तनाव कम करता है।माइंडफुलनेस और ध्यान का अभ्यास करें
लगातार स्क्रीन देखने से मस्तिष्क अत्यधिक तनाव और थकान की स्थिति में चला जाता है। इस मानसिक दबाव से उबरने के लिए रोज सुबह या शाम के वक्त 10 से 15 मिनट किसी शांत स्थान पर बैठकर गहरी सांस लेने के व्यायाम (डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज) करने चाहिए। यह अभ्यास न केवल मानसिक तनाव को दूर करता है, बल्कि किसी भी विषय पर निर्णय लेने की क्षमता को भी सुदृढ़ करता है।