टॉम एंड जेरी की नोकझोंक से लेकर छोटा भीम के रोमांच तक, पर्दे पर नजर आने वाले कार्टून किरदारों के पीछे होती है लेखकों, एनिमेटर्स और साउंड एक्सपर्ट्स की लंबी मेहनत।
हर साल 28 अक्टूबर को इंटरनेशनल एनीमेशन डे मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य एनिमेशन कला के प्रति जागरूकता फैलाना और इस क्षेत्र से जुड़े कलाकारों के योगदान को सम्मानित करना है। इस विशेष दिन की शुरुआत इंटरनेशनल एनिमेटेड फिल्म एसोसिएशन यानी ASIFA ने वर्ष 2002 में की थी। यह तारीख फ्रांसीसी आविष्कारक एमिल रेनॉड द्वारा 28 अक्टूबर 1892 को पेरिस में किए गए पहले सार्वजनिक एनिमेशन प्रदर्शन की याद दिलाती है। इस मौके पर यह जानना दिलचस्प है कि बच्चों के चहेते कार्टून पर्दे तक पहुंचने से पहले किन चरणों से गुजरते हैं।
कहानी और विचार का सृजन
किसी भी एनिमेटेड शो या फिल्म की नींव एक विचार से रखी जाती है। लेखक और क्रिएटिव टीम मिलकर यह तय करते हैं कि कहानी का मुख्य विषय क्या होगा, उसमें कौन-से किरदार शामिल होंगे और दर्शक पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। उदाहरण के लिए, टॉम एंड जेरी में एक बिल्ली और चूहे के बीच की खट्ठी-मीठी नोंकझोंक को आधार बनाया जाता है, वहीं छोटा भीम में दोस्ती, साहस और समस्याओं के समाधान जैसे विषयों को प्रमुखता दी जाती है। पटकथा के आधार पर ही यह तय होता है कि कौन-सा दृश्य हास्य से भरपूर होगा और कहां एक्शन सीक्वेंस जोड़े जाएंगे।
कैरेक्टर डिजाइन और स्टोरीबोर्ड
कहानी तय होने के बाद कैरेक्टर डिजाइनर्स किरदारों के स्वरूप को मूर्त रूप देते हैं। इसमें उनकी शारीरिक बनावट, चेहरे के हाव-भाव, कपड़े, रंग और चलने-फिरने के ढंग को अंतिम रूप दिया जाता है ताकि दर्शक उन्हें आसानी से पहचान सकें। इसके पश्चात स्टोरीबोर्ड तैयार किया जाता है, जो मुख्य दृश्यों की एक चित्रात्मक रूपरेखा होती है। इसमें यह दर्शाया जाता है कि कौन-सा किरदार किस फ्रेम में कहां मौजूद होगा और उसकी गतिविधियां क्या होंगी। जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव भी किए जाते हैं ताकि प्रस्तुति अधिक आकर्षक और बोधगम्य बन सके।
एनिमेशन की तकनीक और प्रक्रिया
स्टोरीबोर्ड के बाद मुख्य एनिमेशन का चरण शुरू होता है। इसमें स्थिर चित्रों या डिजिटल मॉडल्स को इस प्रकार गति दी जाती है कि वे जीवंत प्रतीत हों। निर्माण प्रक्रिया में मुख्य रूप से दो तकनीकों का उपयोग किया जाता है:
- 2D एनिमेशन: इसमें द्वि-आयामी (two-dimensional) चित्रों या डिजिटल ड्रॉइंग का प्रयोग होता है, जहां कलाकार अलग-अलग पोज बनाकर उनके बीच के मूवमेंट तैयार करते हैं।
- 3D एनिमेशन: इसमें कंप्यूटर के माध्यम से त्रि-आयामी (three-dimensional) मॉडल और उनका परिवेश तैयार किया जाता है, जिनमें बाद में लाइट, शैडो, कैमरा एंगल और मूवमेंट जोड़े जाते हैं।
ध्वनि और अंतिम संपादन
केवल दृश्य ही नहीं, बल्कि आवाज भी कार्टून का एक अनिवार्य हिस्सा होती है। वॉइस आर्टिस्ट किरदारों के स्वभाव के अनुरूप अपनी आवाज देते हैं। इसके बाद संवादों और किरदारों के ओष्ठ-संचालन (lip-sync) के बीच सटीक तालमेल बिठाया जाता है। टॉम एंड जेरी जैसे कार्टूनों में शब्दों के स्थान पर ध्वनियों, हंसी और चीखों का अधिक प्रयोग होता है। इसके साथ ही बैकग्राउंड स्कोर और साउंड इफेक्ट्स जैसे कदमों की आहट या गिरने की आवाज जोड़ी जाती है। अंतिम चरण में एडिटिंग के जरिए सभी विजुअल, ऑडियो और इफेक्ट्स को एक साथ जोड़कर फाइनल कट तैयार किया जाता है।