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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बड़ा खुलासा: पानी ठहरने से धंसी सड़क, 33 जगहों पर फॉल्ट

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बड़ा खुलासा: पानी ठहरने से धंसी सड़क, 33 जगहों पर फॉल्ट

क्या आपने कभी सोचा है कि करोड़ों की लागत से तैयार होने वाले एक्सप्रेसवे उद्घाटन से पहले ही अपनी मजबूती खोने लगें, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? कुछ ऐसा ही हाल उत्तर प्रदेश के चर्चित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का देखने को मिल रहा है। इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट पर उस समय सवाल खड़े हो गए जब इसके कुछ हिस्सों के धंसने की बात सामने आई।

IIT खड़गपुर और NHAI की प्रारंभिक जांच में बड़ा खुलासा

हाल ही में सामने आई आईआईटी खड़गपुर और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने इस समस्या के असली कारणों से पर्दा उठाया है। जांच में यह साफ हुआ है कि एक्सप्रेसवे के धंसने के पीछे कोई बहुत बड़ी तकनीकी या निर्माण सामग्री की कमी नहीं, बल्कि पानी की निकासी (ड्रेनेज) का सही प्रबंध न होना है।

एनएचएआई के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे पर अब तक कुल 33 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां सड़क धंसने की समस्या आई है। इन सभी 33 स्थानों की कुल लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर बैठती है। गनीमत यह है कि इनमें से सिर्फ 5 स्थान ऐसे हैं जहां बड़े गड्ढे बने हैं, जबकि बाकी जगहों पर 10 से 20 मीटर की लंबाई में ही यह दिक्कत आई है।

आखिर क्यों धंस रही है सड़क? जानिए तकनीकी वजह

विशेषज्ञों और प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ ग्रेनुअल शोल्डर (बजरी वाला सबसे बाहरी हिस्सा) बनाए जाते हैं। इसके बाद क्रैश बैरियर लगाए जाते हैं। ग्रेनुअल शोल्डर का मुख्य काम बारिश के पानी को सुरक्षित बाहर निकालना होता है।

  • पानी की उल्टी चाल: जांच में पाया गया कि कुछ जगहों पर क्रैश बैरियर के पास से पानी बाहर निकलने के बजाय वापस सड़क की तरफ लौट रहा है।
  • मिट्टी में रिसाव: यह रुका हुआ पानी एक्सप्रेसवे की ऊपरी सतह (टॉप लेयर) के नीचे मौजूद मिट्टी में रिस रहा है, जिससे मिट्टी अपनी पकड़ ढीली कर रही है और सड़क धंस रही है।
  • कम्पैक्शन पर राहत: हालांकि, राहत की बात यह है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में निर्माण के दौरान मिट्टी ठीक से न दबाने (कम्पैक्शन की कमी) जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।

एनएचएआई और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

समस्या सामने आते ही एनएचएआई हरकत में आ गया है। जिन 33 जगहों पर खराबी पाई गई है, वहां युद्धस्तर पर सुधार का काम शुरू कर दिया गया है। जिन स्थानों पर मिट्टी के धंसने का खतरा अधिक है, वहां की मिट्टी को बदलकर नए सिरे से मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो।

एनएचएआई के मुख्य महाप्रबंधक गौतम विशाल चरण पहारी ने इस संबंध में बताया कि मामले की पूरी जांच करवाई जा रही है। अभी आईआईटी खड़गपुर या एनएचएआई की अंतिम उच्चस्तरीय रिपोर्ट मिलना बाकी है, रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर आधिकारिक और विस्तृत बयान दिया जा सकेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की मुख्य वजह क्या है?

उत्तर: प्रारंभिक जांच के अनुसार, सड़क पर बारिश का पानी ठहरने और ड्रेनेज सिस्टम की कमी के कारण पानी सड़क की मिट्टी में रिस रहा है, जिससे यह समस्या आ रही है।

Q2: ऐसी कितनी जगहों पर यह समस्या पाई गई है?

उत्तर: एनएचएआई के अनुसार, कुल 33 स्थानों (कुल लंबाई लगभग 3.5 किमी) पर यह समस्या देखी गई है, जिन्हें तुरंत ठीक किया जा रहा है।

Q3: क्या निर्माण में कोई लापरवाही बरती गई थी?

उत्तर: प्रारंभिक रिपोर्ट में मिट्टी के कम्पैक्शन (दबाव) में कमी जैसी कोई बात सामने नहीं आई है, मुख्य समस्या केवल जल निकासी (ड्रेनेज) की है।

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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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