देश की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, सांस्कृतिक विरासत और मातृभूमि की गौरवशाली गाथाओं से रूबरू कराना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसी उद्देश्य को साकार करती हुई मध्य प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी पहल 'माँ तुझे प्रणाम योजना' युवाओं के बीच खासी लोकप्रिय हो रही है। आधुनिक चकाचौंध और डिजिटल दुनिया से थोड़ा आगे निकलकर जब युवा देश की सीमाओं और सदियों पुरानी ऐतिहासिक इमारतों को अपनी आंखों से देखते हैं, तो उनके भीतर एक अलग ही राष्ट्रप्रेम और आत्मसम्मान जागृत होता है। खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने हाल ही में इस बात पर जोर दिया कि यह योजना केवल सैर-सपाटा नहीं, बल्कि युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण और वैचारिक परिपक्वता का एक सशक्त माध्यम है।
टी.टी. नगर स्टेडियम से हरी झंडी दिखाकर युवाओं को किया गया रवाना
राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित टी.टी. नगर स्टेडियम में इन दिनों एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। ग्वालियर, अशोकनगर और दतिया से पहुंचे प्रतिभाशाली युवाओं के समूहों का उत्साहवर्धन करते हुए खेल मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें हरी झंडी दिखाकर भोपाल और आसपास के ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक स्थलों के भ्रमण के लिए रवाना किया। इस दौरान युवाओं के चेहरों पर एक नई सीख पाने की चमक साफ देखी जा सकती थी। इस प्रकार के आयोजन न केवल युवाओं को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर व्यावहारिक अनुभव देते हैं, बल्कि उन्हें देश की विविधता में एकता के दर्शन भी कराते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में इस पूरी योजना को एक नए प्रारूप में ढाला गया है। इसके तहत प्रदेशभर के युवाओं को भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से छह अलग-अलग जोन में बांटकर भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि कोई भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक या प्राकृतिक स्थल छूट न जाए।
छह अलग-अलग जोन में बंटी है विविधता की यह अनूठी यात्रा
मध्य प्रदेश अपनी समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर, वन्यजीवों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। 'माँ तुझे प्रणाम योजना' के तहत बनाए गए 6 जोन प्रदेश के अलग-अलग सांस्कृतिक और भौगोलिक स्वरूप को दर्शाते हैं:
- मालवा जोन: इस क्षेत्र में युवाओं को महाकाल की नगरी उज्जैन (महाकालेश्वर), गांधी सागर, पशुपतिनाथ मंदिर, धर्मराजेश्वर, ओंकारेश्वर के साथ-साथ ऐतिहासिक मांडू और महेश्वर के किलों व घाटों का भ्रमण कराया जाता है।
- भोपाल जोन: राजधानी और उसके आसपास के इलाके अपनी प्राचीन सास्कृति के लिए जाने जाते हैं। इसमें सांची के स्तूप, उदयगिरि की गुफाएं, भोजपुर का विशाल मंदिर, रातापानी, मानव संग्रहालय, शौर्य स्मारक, भीमबेटका की पाषाण कलाएं, मढ़ई और पचमढ़ी की वादियां शामिल हैं।
- ग्वालियर-चंबल जोन: इस ऐतिहासिक जोन में ग्वालियर का भव्य किला और पैलेस, कूनो नेशनल पार्क, दतिया के प्राचीन स्थल, चंदेरी की हथकरघा संस्कृति और माधव नेशनल पार्क की सैर कराई जाती है।
- बुंदेलखंड जोन: वास्तुकला के बेजोड़ नमूनों वाले खजुराहो के मंदिर, जटाशंकर, पन्ना टाइगर रिजर्व, ओरछा के रामराजा मंदिर और नौरादेही टाइगर रिजर्व को इस जोन में जगह मिली है।
- बघेलखंड जोन: मैहर के शारदा माता मंदिर, ऐतिहासिक चित्रकूट, बांधवगढ़ नेशनल पार्क, रीवा के महामृत्युंजय मंदिर और व्हाइट टाइगर सफारी का रोमांचक अनुभव इस जोन का हिस्सा है।
- महाकौशल जोन: भेड़ाघाट की संगमरमर की चट्टानें, चौसठ योगिनी मंदिर, कान्हा नेशनल पार्क और पेंच नेशनल पार्क के प्राकृतिक सौंदर्य से युवा रूबरू होते हैं।
तीन दिवसीय यात्रा में रोमांच और इतिहास का अनूठा संगम
- यह पूरा भ्रमण कार्यक्रम तीन दिनों का होता है, जिसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कम समय में अधिकतम और गुणवत्तापूर्ण अनुभव मिल सके। इस दौरान युवाओं को केवल ऐतिहासिक इमारतों के बारे में ही नहीं बताया जाता, बल्कि वन विभाग के सहयोग से विभिन्न साहसिक गतिविधियों (Adventure Activities) से भी उनका परिचय कराया जाता है। इससे युवाओं में लीडरशिप क्वालिटी, टीम वर्क और प्रकृति के प्रति संवेदना विकसित होती है। वे समझ पाते हैं कि हमारा पर्यावरण और वन्यजीवन हमारे इतिहास जितना ही मूल्यवान है।
प्रतिभाशाली युवाओं का पारदर्शी चयन और सरकार द्वारा पूरी मेहमाननवाजी
- इस योजना की सबसे बड़ी खूबी इसकी चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता है। राज्य के प्रत्येक विकासखंड (Block) से कुल 10 प्रतिभाशाली युवाओं का चयन किया जाता है। इसमें इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि समाज के हर वर्ग और हर गतिविधि से जुड़े युवाओं को मौका मिले। चयनित युवाओं में एनसीसी (NCC) और एनएसएस (NSS) के कैडेट्स, उत्कृष्ट खिलाड़ी, स्कूलों-कॉलेजों के मेधावी विद्यार्थी, स्काउट गाइड और सांस्कृतिक गतिविधियों में नाम कमाने वाले युवा शामिल होते हैं।
- हर विकासखंड से 5 युवक और 5 युवतियों का चयन कर शत-प्रतिशत लैंगिक समानता (Gender Equality) का उदाहरण पेश किया जाता है। इन युवाओं के आने-जाने का किराया, दैनिक भत्ता, ठहरने के लिए आवास, पौष्टिक भोजन और यहाँ तक कि ट्रैक सूट जैसी जरूरी चीजें खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि किसी भी युवा को आर्थिक तंगी के कारण इस सुनहरे अवसर से वंचित न रहना पड़े।
निष्कर्ष: उज्जवल भविष्य की ओर एक मजबूत कदम
- आज के दौर में जब युवा सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया में सिमटते जा रहे हैं, तब 'माँ तुझे प्रणाम योजना' उन्हें ज़मीन से जोड़ने का काम कर रही है। जब ये युवा अपने प्रदेश के कोने-कोने में जाकर वहाँ के इतिहास, संस्कृति और प्रकृति को खुद महसूस करते हैं, तो उनके भीतर देश और प्रदेश के प्रति एक अलग ही जिम्मेदारी का अहसास पैदा होता है। निश्चित रूप से यह योजना मध्य प्रदेश के युवाओं को मानसिक और वैचारिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।