ग्वालियर के शीतला माता मंदिर रोड हादसे पर कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और प्रशासन पर उठाए सवाल। मौतों पर जवाबदेही तय करने की मांग की।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ग्वालियर के शीतला माता मंदिर रोड पर हुए हादसे को लेकर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की घटनाओं में मौतों पर जिम्मेदारी तय होना अनिवार्य है।
ग्वालियर पहुंचे मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शीतला माता मंदिर रोड पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा उठाया। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही की पोल खोल दी है। उन्होंने मांग की कि इस प्रकार के हादसों में केवल सतही कार्रवाई के बजाय सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विभिन्न गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरा
अपनी यात्रा के दौरान जीतू पटवारी ने केवल शीतला माता हादसे तक अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई अन्य बड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने राज्य में बच्चों की हुई मौतों, जहरीली शराब के सेवन से जा रही जानों, लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और बढ़ते हत्याकांडों का विशेष रूप से जिक्र किया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इन तमाम गंभीर मामलों में राज्य सरकार और जिम्मेदार अधिकारी अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे हैं और अपराधियों या लापरवाह अधिकारियों पर शिकंजा कसने के मामले में ढिलाई बरती जा रही है।
पीड़ित परिवारों से मुलाकात और संवेदना
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जीतू पटवारी ग्वालियर में शीतला माता मंदिर रोड हादसे में अपनी जान गंवाने वाले लोगों के शोकाकुल परिजनों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे। वे पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाएंगे और दुर्घटना में घायल हुए अन्य लोगों का हाल-चाल जानने के लिए अस्पताल भी जाएंगे। इस दौरान उनके साथ स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहेंगे, जो पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और प्रशासनिक सहायता की मांग को लेकर चर्चा कर सकते हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज
ग्वालियर में हुए इस हादसे के बाद से ही राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार पर हमलावर हैं और यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों के चलते यह हादसा हुआ और इसके लिए जमीनी स्तर पर कौन जिम्मेदार है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों और प्रशासनिक चूक के संबंध में विस्तृत और अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर शहरी विकास, सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी के बुनियादी मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।