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एमपी में मानसून की रफ्तार धीमी: झमाझम बारिश पर ब्रेक, जानिए कब होगी वापसी

एमपी में मानसून की रफ्तार धीमी: झमाझम बारिश पर ब्रेक, जानिए कब होगी वापसी

मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक एक नया मोड़ ले लिया है। लंबे समय से झमाझम बारिश और बाढ़ जैसे हालातों से जूझ रहे सूबे में अब मानसून की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों और सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, फिलहाल पूरे प्रदेश में बादलों की आवाजाही कम हो गई है और अधिकांश हिस्सों में तेज धूप ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। लगातार हो रही बारिश से राहत तो मिली है, लेकिन उमस और गर्मी ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

मौसम विभाग का ताजा अपडेट: क्या कहता है पूर्वानुमान?

मौसम केंद्र भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में मध्य प्रदेश के ऊपर कोई भी मजबूत या प्रभावी वेदर सिस्टम सक्रिय नहीं है। हालांकि, राज्य के पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन जरूर बना हुआ है, लेकिन इसका असर बेहद सीमित है और यह सूबे के बड़े हिस्से को भीगा पाने में नाकाम साबित हो रहा है। यही वजह है कि पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के किसी भी कोने से भारी बारिश की कोई सूचना नहीं मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन दिनों तक मौसम का मिजाज कमोबेश ऐसा ही बना रहेगा। आसमान साफ रहने और धूप निकलने से तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। हालांकि, उमस भरा यह मौसम कुछ दिनों का ही मेहमान है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में हलचल के चलते जल्द ही नए सिस्टम के एक्टिव होने की उम्मीद जताई जा रही है।

गुरुवार को राहत, शुक्रवार को इन चार जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

आज यानी गुरुवार को मध्य प्रदेश के किसी भी जिले के लिए भारी बारिश का कोई भी रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी नहीं किया गया है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन समेत तमाम बड़े शहरों में दिनभर धूप खिली रहने और स्थानीय बादलों के बनने से छिटपुट या हल्की बौछारें पड़ने की ही संभावना है।

हालांकि, यह राहत बहुत लंबी नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, कल यानी शुक्रवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ चुनिंदा जिलों में बादलों का मिजाज फिर से तल्ख हो सकता है:

  • उमरिया: यहां गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं।
  • मंडला: पिछले दौर की तरह एक बार फिर यहां भारी बारिश का अनुमान है।
  • बालाघाट: नदी-नालों के जलस्तर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
  • डिंडौरी: इस पहाड़ी और मैदानी इलाके में भी पानी बरसने के आसार हैं।

13 सितंबर से फिर करवट लेगा मौसम

अगर आप लगातार बरसते पानी से परेशान थे और थोड़ी धूप चाहते हैं, तो यह समय आपके अनुकूल है। लेकिन यदि आपको बारिश पसंद है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आगामी 13 सितंबर से मध्य प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस दौरान विशेष रूप से पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में एक नया वेदर सिस्टम एक्टिव होगा, जिससे झमाझम बारिश का दौर दोबारा शुरू हो सकता है।

पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश का वर्तमान गणित

मानसून के इस सुस्त दौर के बीच सूबे के दोनों प्रमुख हिस्सों (पूर्वी और पश्चिमी एमपी) के बारिश के आंकड़े बेहद दिलचस्प स्थिति बयां कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि किस संभाग और जिले में पानी की स्थिति कैसी बनी हुई है:

पूर्वी मध्य प्रदेश का हाल

पूर्वी हिस्से की बात करें तो जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में समग्र रूप से बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 1 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है। पिछले कुछ हफ्तों में यहां मूसलाधार बारिश और बाढ़ जैसे हालात के कारण यह अंतर काफी कम हो गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से बारिश थमने के बाद यह मामूली अंतर फिर से सामने आ गया है।

इसके अलावा बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में सामान्य से 5 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली और टीकमगढ़ में स्थिति बेहतर है और यहां औसत से ज्यादा पानी बरसा है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश का हाल

पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में बारिश के आंकड़ों में भारी विविधता देखने को मिल रही है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत की तुलना में 7 प्रतिशत से लेकर 55 प्रतिशत तक कम बारिश आंकी गई है।

दूसरी तरफ, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी ऐसे जिले रहे हैं जहां बादलों ने जमकर मेहरबानी दिखाई है और यहां सीजन की औसत बारिश का कोटा पूरा हो चुका है या उससे भी अधिक दर्ज किया गया है।

आम जनजीवन और किसानों पर असर

मानसून के इस प्रकार अचानक सुस्त पड़ने से कृषि सेक्टर पर मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। जिन इलाकों में फसलें पानी की अधिकता से खराब होने की कगार पर थीं, वहां खिली धूप से किसानों को बड़ी राहत मिली है। किसान अपनी फसलों में कीटनाशक और खाद का छिड़काव इस सूखे मौसम में आसानी से कर पा रहे हैं। वहीं, जिन जिलों में अभी भी बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है, वहां के किसान 13 सितंबर से शुरू होने वाले नए सिस्टम का टकटकी लगाकर इंतजार कर रहे हैं ताकि उनकी फसलों को पर्याप्त नमी मिल सके।

फिलहाल, अगले चौबीस से अड़तालीस घंटों तक राज्यभर में मौसम के शुष्क बने रहने की संभावना है। तापमान में मामूली उछाल आ सकता है, लेकिन शाम के समय चलने वाली हल्की हवाएं लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत जरूर देंगी। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आगामी तंत्र के सक्रिय होते ही नया बुलेटिन जारी किया जाएगा।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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