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राजगढ़ में नेशनल लोक अदालत का जलवा: एक ही दिन में सुलझे हजारों पुराने कानूनी विवाद

राजगढ़ में नेशनल लोक अदालत का जलवा: एक ही दिन में सुलझे हजारों पुराने कानूनी विवाद

कानूनी दांव-पेच और तारीख पर तारीख के लंबे दौर से राहत पाने का जरिया बनी राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आपसी समझौते से बड़े से बड़े विवादों का अंत संभव है। शनिवार, 12 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में साल की तीसरी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसने मुकदमों के बोझ तले दबे हजारों वादकारियों के चेहरों पर सुकून भरी मुस्कान ला दी। जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक अदालतों में सुबह से ही आम जनता का तांता लगा रहा, जहां वर्षों पुराने विवाद चंद पलों की समझाइश से हमेशा के लिए खत्म हो गए।

एडीआर सेंटर में हुआ गरिमामयी शुभारंभ

स्थानीय न्यायालय परिसर स्थित एडीआर सेंटर के सभागार में इस बहुप्रतीक्षित आयोजन का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजीव म. आपटे ने अपने संबोधन में लोक अदालतों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर बार आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत में सकारात्मक और बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। इस वर्ष आयोजित की गई पूर्व की दोनों लोक अदालतों की सफलता इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि अब आम जनता के भीतर कानूनी अधिकारों और दायित्वों को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। लोग अब कोर्ट के चक्कर काटने की बजाय सौहार्दपूर्ण माहौल में अपने मामलों का निपटारा करना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं।

पूरे जिले में कुल 26 खंडपीठों का हुआ गठन

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली की कार्ययोजना और मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के दिशा-निर्देशों के तहत इस महाअभियान को अमलीजामा पहनाया गया। राजगढ़ जिला मुख्यालय के अलावा ब्यावरा, नरसिंहगढ़, सारंगपुर, खिलचीपुर और जीरापुर के तहसील न्यायालयों में भी लोक अदालत का व्यापक स्तर पर आयोजन किया गया। मामलों के त्वरित और सुगम निराकरण के लिए पूरे जिले में कुल 26 विशेष खंडपीठों (Benches) का गठन किया गया था।

इन खंडपीठों के माध्यम से न्याय की प्रक्रिया को सुलभ बनाया गया। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत अलग-अलग न्यायालयों में खंडपीठों की संख्या इस प्रकार तय की गई थी:

  • जिला मुख्यालय राजगढ़ 7 खंडपीठ
  • ब्यावरा: 6 खंडपीठ
  • नरसिंहगढ़: 5 खंडपीठसारंगपुर: 4 खंडपीठ
  • खिलचीपुर: 2 खंडपीठ
  • जीरापुर: 2 खंडपीठ

हजारों मामलों को रखा गया सुनवाई के लिए

इस मेगा लोक अदालत में न्याय की आस लगाए बैठे लोगों के लिए भारी-भरकम संख्या में पत्रावलियां प्रस्तुत की गईं। कुल मिलाकर 10,697 लंबित प्रकरण और 1,898 प्रीलिटिगेशन (यानी कुल 12,595) मामलों को विचारार्थ रखा गया। इन सभी मामलों में जजों और वकीलों की टीमों ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर आपसी सुलह और राजीनामे के रास्ते तलाशने पर जोर दिया। अदालत का मुख्य उद्देश्य मुकदमों की पेंडेंसी कम करने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द को बचाए रखना भी था।

तीन लाख रुपए के लेन-देन का विवाद सुलझा

लोक अदालत की सार्थकता का एक बेहतरीन उदाहरण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) राजगढ़ नीलिमा देव दत्त की अदालत में देखने को मिला। यहां दो पक्षों के बीच पिछले काफी समय से 3 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर कानूनी विवाद चल रहा था। मामले की गंभीरता को समझते हुए न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को अपने सामने बुलाया और उन्हें सकारात्मक न्यायिक सलाह दी। अदालत के समझाने पर दोनों पक्षों ने जिद छोड़कर आपसी सहमति से समझौता करने का मन बनाया। नतीजा यह रहा कि पलक झपकते ही बरसों पुराना वित्तीय विवाद हमेशा के लिए खत्म हो गया और दोनों पक्षों ने खुशी-खुशी एक-दूसरे को गले लगाया।

न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं का रहा विशेष योगदान

इस आयोजन को सफल बनाने में न्यायपालिका से जुड़े हर वर्ग ने अपनी अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान विशेष न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश, अन्य जिला न्यायाधीश, व्यवहार न्यायाधीश के साथ-साथ अभिभाषक संघ के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्य, शासकीय अधिवक्ता और विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने मिलकर वादकारियों को प्रेरित किया कि वे मुकदमेबाजी के बोझ से मुक्त होकर अपने जीवन की नई शुरुआत करें।

कानूनी जागरूकता बनी सफलता की कुंजी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की लोक अदालतें भारतीय न्याय व्यवस्था की रीढ़ बनती जा रही हैं। जिस प्रकार से राजगढ़ जिले में लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी सहमति से मामलों का निबटारा कराया, वह एक स्वस्थ समाज की निशानी है। इससे न केवल अदालतों का समय बचता है, बल्कि आम नागरिकों की ऊर्जा और धन की भी भारी बचत होती है। आने वाले दिनों में इस तरह के आयोजनों से न्याय के प्रति आम जनता का भरोसा और अधिक मजबूत होने की पूरी उम्मीद है।

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नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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