चुनावी मौसम की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो जाती हैं, लेकिन कई बार जोश में नियम-कानूनों की अनदेखी भी भारी पड़ जाती है। ताजा मामला महाराष्ट्र के गोंदिया जिले से सामने आया है, जहां प्रशासनिक सख्ती के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। गोंदिया के गोरेगांव इलाके में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होने के बावजूद बड़े पैमाने पर राजनीतिक बैनर और पोस्टर नजर आने से स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। इस लापरवाही के सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं कि आखिर अधिकारियों की नजरों से बचकर ये प्रचार सामग्रियां कैसे लग गईं।
गोरेगांव में सड़कों पर दिखे राजनीतिक पोस्टर, आम नागरिकों में रोषलोकतंत्र के इस सबसे बड़े पर्व में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग द्वारा कड़े नियम बनाए जाते हैं। आदर्श आचार संहिता का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी दल या उम्मीदवार को प्रचार के मामले में अनुचित लाभ न मिल सके। हालांकि, गोरेगांव के कई प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों के बैनर-पोस्टर शान से लहराते हुए देखे गए। जैसे ही यह मामला आम जनता और विपक्षी दलों के संज्ञान में आया, स्थानीय स्तर पर विरोध के सुर उठने लगे। लोगों का कहना है कि जब आम नागरिकों और छोटे दुकानदारों के लिए इतने कड़े नियम हैं, तो फिर राजनीतिक दलों को यह खुली छूट क्यों मिल रही है?
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रात के अंधेरे में या सुनियोजित तरीके से इन बैनरों और पोस्टर्स को चस्पा किया गया है, ताकि प्रशासनिक अमले की नजर इन पर न पड़ सके। लेकिन, जिस तरह से मुख्य मार्गों पर ये बैनर टंगे हुए थे, उससे प्रशासन की मुस्तैदी पर भी सवालिया निशान लगना लाजिमी है।
प्रशासन की नींद टूटी: चुनाव अधिकारियों ने दिए त्वरित हटाने के निर्देश
मामले के तूल पकड़ने और मीडिया रिपोर्ट्स में खबरें सामने आने के बाद गोंदिया जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। गोरेगांव के निर्वाचन अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत अपनी टीमों को मैदान में उतार दिया है। चुनाव आयोग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने संबंधित इलाकों से सभी अवैध राजनीतिक बैनर, पोस्टर, और होर्डिंग्स को तत्काल हटाने के सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गोरेगांव क्षेत्र में तैनात उड़नदस्ता (Flying Squad) और स्टेटिक सर्विलांस टीम (SST) को विशेष रूप से सक्रिय कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी दल या व्यक्ति से जुड़ा मामला क्यों न हो।
नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
प्रशासन ने केवल बैनर हटाने तक ही सीमित रहने के बजाय दोषियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की भी तैयारी कर ली है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, आचार संहिता के दौरान बिना अनुमति के किसी भी सार्वजनिक संपत्ति पर विज्ञापन करना, बैनर लगाना या दीवार पर पेंटिंग करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
- सार्वजनिक संपत्ति का विरूपण अधिनियम: सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाने वाले उम्मीदवारों और उनके समर्थकों पर इस अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं।
- खर्च में जुड़ेगी लागत: अवैध रूप से लगाए गए इन बैनर-पोस्टर और होर्डिंग्स को छपवाने तथा लगवाने में जितना भी खर्च आया है, उसे संबंधित उम्मीदवार के आधिकारिक चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा।
- आपराधिक मामला: यदि चेतावनी के बाद भी इस तरह की हरकतें पाई गईं, तो संबंधित पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
चुनावी पारदर्शिता पर बड़ा सवाल: क्या सो रहा था स्थानीय अमला?
इस पूरी घटना के बाद गोरेगांव के राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गोरेगांव जैसे क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की यह सुस्ती चुनाव के दौरान निष्पक्षता के दावों की पोल खोलती है। जब चुनावी बिगुल बज चुका है और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने के लिए प्रशासनिक दल तैनात हैं, तब इतने बड़े पैमाने पर बैनर-पोस्टर का लग जाना स्थानीय खुफिया तंत्र और अमले की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
क्या स्थानीय अधिकारियों को इन पोस्टर्स के लगने की भनक नहीं थी, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही थी? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आम जनता जानना चाहती है। हालांकि, अब प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से यह जरूर संदेश गया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
आम जनता और राजनीतिक दलों के लिए कड़ा संदेश
इस घटना से गोंदिया जिले के अन्य इलाकों के राजनीतिक दलों और भावी प्रत्याशियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश चला गया है। चुनाव आयोग इस बार हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर अपनी डिजिटल और मैदानी नजर बनाए हुए हैं। सी-विजिल (cVIGIL) ऐप जैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से आम नागरिक भी अब आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत सीधे चुनाव आयोग तक पहुंचा सकते हैं। यही वजह है कि गोरेगांव में हुई इस चूक को तुरंत पकड़ लिया गया और प्रशासन को एक्शन मोड में आना पड़ा।
आगामी दिनों में गोंदिया जिले में चुनावी पारा और अधिक चढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या सभी राजनीतिक दल और उनके समर्थक चुनाव आयोग के नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं या फिर प्रशासनिक सख्ती के बावजूद इस तरह की छींटें-छूटें घटनाएं फिर से सामने आती हैं। फिलहाल, गोरेगांव प्रशासन ने सभी बैनरों को हटवाकर स्थिति को नियंत्रण में ले लिया है और लगातार गश्त जारी रखने का ऐलान किया है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से बचा जा सके।