चार महीने के बकाया मानधन भुगतान, एक हजार रुपये की वेतन वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर यवतमाल जिले में स्कूलों के रसोइया और मददनीसों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
यवतमाल में शालेय पोषण आहार तैयार करने वाले रसोइया और मददनीसों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर जिला परिषद प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आयटक महाराष्ट्र राज्य शालेय पोषण आहार कर्मचारी यूनियन की यवतमाल जिला इकाई के नेतृत्व में निकाले गए इस मोर्चे के दौरान प्रदर्शनकारियों ने थाली और बर्तन बजाकर सरकार तथा प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया। आंदोलनकारियों का मुख्य आरोप है कि उन्हें पिछले चार महीनों से मानधन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
श्रमशक्ति भवन से जिला परिषद तक निकला विरोध मार्च
इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत शहर के श्रमशक्ति भवन स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर से हुई। सैकड़ों की संख्या में रसोइया और मददनीस हाथों में तख्तियां लेकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। यह मोर्चा आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर से शुरू होकर संविधान चौक, नेताजी भवन, नेताजी मार्केट, दत्त चौक और बसस्थानक चौक से होता हुआ जिला परिषद कार्यालय पहुंचा। मार्ग में प्रदर्शनकारियों ने सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जिला परिषद कार्यालय पहुंचने के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी को मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और समस्याओं का त्वरित समाधान निकालने की मांग की।
सेंट्रल किचन पद्धति का तीखा विरोध
यूनियन ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए पोषण आहार तैयार करने और वितरित करने का काम 'सेंट्रल किचन' पद्धति के जरिए इस्कॉन से जुड़ी संस्था 'अन्नामृत फाउंडेशन' और अन्य बाहरी संगठनों को सौंपने के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि इस व्यवस्था के लागू होने से स्थानीय स्तर पर स्कूलों में काम करने वाले हजारों रसोइया और मददनीसों का रोजगार छिन जाने का खतरा है। उन्होंने मांग की है कि पोषण आहार तैयार करने के मौजूदा स्थानीय तंत्र को ही जारी रखा जाए और कर्मचारियों के हितों की पूरी रक्षा की जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा घोषित एक हजार रुपये की वृद्धि लागू करने की मांग
प्रदर्शन के दौरान यूनियन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा रसोइयों के मानधन में एक हजार रुपये की वृद्धि किए जाने की घोषणा का विशेष रूप से उल्लेख किया। यूनियन ने मांग की कि इस घोषणा की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि यह वृद्धि अब तक अमलीजामा नहीं पहन पाई है, तो इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इसके साथ ही, इन कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने, दुर्घटना बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा सेवानिवृत्ति के बाद एकमुश्त आर्थिक सहायता या पेंशन देने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई गई।
राज्य और केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजने की अपील
जिला परिषद प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में यूनियन ने यह भी आग्रह किया है कि उनकी इन सभी मांगों से जुड़े प्रस्ताव और ज्ञापन को राज्य के मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक भी भेजा जाए। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके चार महीने के बकाया मानधन का भुगतान और घोषित वेतन वृद्धि पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।