छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बड़ी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट सामने आ रही है। हाल ही में हरदीबाजार तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम अमगांव में एसईसीएल (SECL) द्वारा अधिग्रहित भूमि पर स्थित शासकीय भवनों को लेकर सोशल मीडिया और कुछ हलकों में यह खबर तेजी से फैली थी कि इन भवनों को जबरन और बलपूर्वक तोड़ा गया है। इन दावों के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया और आज रविवार को आधिकारिक रूप से इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इन खबरों का पूरी तरह से खंडन किया है।
प्रशासन ने स्पष्ट की स्थिति: क्या थी हकीकत?
जिला प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ग्राम अमगांव में कोयला खदान क्षेत्र के समीप स्थित पटवारी कार्यालय, आंगनबाड़ी भवन और छात्रावास के भवन काफी समय से जर्जर अवस्था में पहुंच चुके थे। खदान क्षेत्र के बेहद नजदीक होने के कारण इन भवनों में किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अप्रिय घटना की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता था। सुरक्षा की इसी सर्वोच्च प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए, इन सभी शासकीय संस्थानों को विध्वंस की किसी भी कार्रवाई को अंजाम देने से बहुत पहले ही पूरी तरह से सुरक्षित वैकल्पिक स्थानों पर सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया जा चुका था।
प्रशासन ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पटवारी कार्यालय को विध्वंस कार्रवाई से लगभग दो महीने पहले ही पास की तहसील कार्यालय में शिफ्ट कर दिया गया था। ठीक इसी प्रकार, स्थानीय बच्चों और माताओं के कल्याण से जुड़े छात्रावास तथा आंगनबाड़ी केंद्र को भी अन्य उपयुक्त और सुरक्षित स्थानों पर منتقل (स्थानांतरित) किया जा चुका था, ताकि आम जनता को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के स्थानांतरण पर भी दी जानकारी
स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में प्रशासन ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का पुराना भवन भी खदान क्षेत्र के खतरनाक दायरे के पास स्थित था। सुरक्षा कारणों से इस भवन को भी किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाना अत्यंत आवश्यक हो गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) द्वारा पत्र के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों को पहले ही अवगत करा दिया गया था।
चिकित्सा अधिकारी के पत्र और सुरक्षा मानकों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को भवनों के विध्वंस की आधिकारिक कार्रवाई से ठीक दो दिन पहले ही नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया था। वर्तमान समय में इस क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी रुकावट के वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए सुचारू रूप से संचालित की जा रही हैं।
सुरक्षा और खदान विस्तार बना मुख्य कारण
जिला प्रशासन ने अपने आधिकारिक बयान में यह भी रेखांकित किया है कि खदान क्षेत्र के तेजी से हो रहे विस्तार, आम नागरिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा, तथा भवनों की अत्यंत जर्जर और निष्प्रयोज्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। संबंधित सभी शासकीय संस्थानों को जब पूरी तरह से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया, उसके बाद ही एसईसीएल प्रबंधन ने जिला प्रशासन के साथ पूर्ण समन्वय और आपसी सहयोग से इन जर्जर व बेकार हो चुके ढांचों को हटाने की कार्रवाई की।
प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी चल रहे शासकीय कार्यालय या सक्रिय संस्था को न तो जबरन तोड़ा गया है और न ही बलपूर्वक हटाया गया है। इसलिए, मीडिया के कुछ हिस्सों में प्रकाशित होने वाली वे खबरें तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह निराधार और असत्य हैं, जिनमें जबरन विध्वंस का दावा किया जा रहा था।
ग्रामीणों की समस्याओं और पुनर्वास पर भी हो रहा काम
इस पूरे प्रकरण के अलावा, जिला प्रशासन ने यह भी जानकारी साझा की है कि ग्राम हरदीबाजार समेत तमाम खदान प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के रहवासियों की विभिन्न मांगों, जैसे कि रोजगार, पुनर्वास पैकेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर एसईसीएल प्रबंधन के साथ उच्च स्तर पर निरंतर बातचीत और समन्वय जारी है। ग्रामीणों के हितों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों पर नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, ताकि क्षेत्र के विकास के साथ-साथ आम जनता के अधिकारों की भी पूरी रक्षा हो सके।
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अपुष्ट या भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें और तथ्यात्मक जानकारियों के लिए आधिकारिक स्रोतों पर ही निर्भर रहें।