अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के खिलाफ भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। कई मामलों में वांछित और पिछले दो साल से फरार चल रहे कुख्यात नार्को-ट्रैफिकिंग सिंडिकेट के सरगना नवप्रीत सिंह को तुर्की से डिपोर्ट करके भारत वापस लाया जा चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया के जरिए इस बड़ी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि की है।
फर्जी पहचान का नकाब और तुर्की की नागरिकता
34 साल का नवप्रीत सिंह, जिसे 'नव' के नाम से भी जाना जाता है, देश की जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। उसने तुर्की में 'नवाब विर्क' के नाम से एक फर्जी पहचान बना ली थी और वहां की नागरिकता भी हासिल कर ली थी। इस फर्जी पहचान के पीछे छिपकर वह अफगानिस्तान से भारत के रास्ते हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों की तस्करी का पूरा खेल चला रहा था।
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि भारत सरकार देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को छोड़ेगी नहीं। उन्होंने कहा, 'हमारी एजेंसियों ने इस अपराधी के हर एक नकाब को उतारकर उसकी असलियत का पता लगाया और तुर्की से उसका डिपोर्टेशन सुनिश्चित किया।'
चचेरे भाई से जुड़ा था तस्करी का पूरा नेटवर्क
पंजाब के रहने वाले नवप्रीत सिंह ने एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट खड़ा किया था। भारत में इस पूरे नेटवर्क को उसके चचेरे भाई प्रभदीप सिंह उर्फ 'हैरी' द्वारा संचालित किया जा रहा था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के साथ मिलकर इसी साल 13 मई को प्रभदीप को अज़रबैजान से एक्सट्रडाइट (प्रत्यर्पण) करके भारत लाई थी।
प्रभदीप सिंह एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम से जुड़े एक बड़े मामले में वांछित था। साल 2021 में अधिकारियों ने एक भारी मात्रा में ड्रग्स की खेप पकड़ी थी, जिसके तार इसी सिंडिकेट से जुड़े थे। फरीदाबाद में एक वाहन से 166 किलो और दूसरे वाहन से 115 किलो हेरोइन बरामद की गई थी। इसके अलावा एक किराए के ठिकाने से भारी मात्रा में अन्य नशीले पदार्थ भी मिले थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि प्रभदीप घटना के समय एक अर्धसैनिक बल में तैनात था। जब इस पूरे मामले में उसका नाम सामने आया, तो वह साल 2023 में फरार हो गया था। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के डीसीपी प्रवीण त्रिपाठी के अनुसार, प्रभदीप ही वह मुख्य कड़ी था जो नवप्रीत के निर्देशों को भारत में मौजूद अन्य गुर्गों तक पहुंचाता था।
भारत सरकार का नार्को-कार्टेल के खिलाफ कड़ा रुख
भारत सरकार ने 2023-24 के दौरान ही तुर्की के अधिकारियों के पास नवप्रीत के प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध भेज दिया था। इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए देश की खुफिया और जांच एजेंसियों ने महीनों तक कड़ी मेहनत की। गृह मंत्री अमित शाह ने दिसंबर 2029 तक देश से हर एक नार्को-कार्टेल को नेस्तनाबूद करने का संकल्प दोहराया है।
भारत की मजबूत होती कूटनीतिक और कानूनी पकड़
भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने का यह अभियान केवल ड्रग्स तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। सरकार की इस रणनीति के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं:
- BHARATPOL पोर्टल: जनवरी 2025 में गृह मंत्री द्वारा लॉन्च किए गए इस एकीकृत प्लेटफॉर्म से सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय सीधे जुड़ गए हैं। आज 1,400 से अधिक इकाइयां इस पर काम कर रही हैं, जिससे सूचनाओं के आदान-प्रदान का समय महीनों से घटकर अब मात्र 3 से 20 दिन रह गया है।
- भगोड़ों की वापसी: गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019 से अगस्त 2026 के बीच 36 अलग-अलग देशों से कुल 288 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।
- इंटरपोल रेड कार्तर नोटिस: पिछले तीन वर्षों में अपराधियों पर शिकंजा कसते हुए 401 रेड कार्नर नोटिस जारी किए गए हैं। अकेले साल 2026 में जुलाई तक 182 नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
- संपत्ति कुर्क: मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के कड़े प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार ने 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों की 17,874 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।
नवप्रीत सिंह की गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन इस बात का स्पष्ट संदेश है कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार छिपकर भारत के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले अपराधियों के लिए कानून के लंबे हाथों से बचना अब असंभव होता जा रहा है। भारतीय एजेंसियां देश की सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह मुस्तैद हैं।