डिजिटल युग में तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराध के नए-नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। आम आदमी की जरा सी लापरवाही उसे भारी वित्तीय नुकसान और मानसिक परेशानी में डाल सकती है। ताजा मामला बिहार के नवादा जिले से जुड़ा है, जहां पुलिस ने एक ऐसे शातिर साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है जो जरूरतमंदों को सस्ते लोन का लालच देकर उनके बैंक खातों को खाली कर रहा था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है और इस अंतरराष्ट्रीय या अंतर-राज्यीय नेटवर्क के कई और तार खंगाले जा रहे हैं।
गुप्त सूचना पर वारिसलीगंज में हुई छापेमारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मीरचक चमर टोली इलाके में इन दिनों साइबर ठगी का एक बड़ा खेल चल रहा था। पुलिस को मुखबिरों के जरिए गुप्त सूचना मिली थी कि इस इलाके में कुछ लोग संगठित तरीके से भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में एक विशेष छापामार दल का गठन किया।
पुलिस टीम ने जब मीरचक चमर टोली में बताए गए ठिकाने पर अचानक दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। आरोपी धड़ल्ले से फर्जीकॉल कर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे थे। पुलिस ने मौके से घेराबंदी कर कुल पांच आरोपियों को दबोच लिया। तलाशी के दौरान इनके पास से आधुनिक तकनीक के 8 एंड्रॉयड मोबाइल फोन और दर्जनों फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल केवल ठगी के लिए किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और उनका तरीका
पकड़े गए सभी पांचों आरोपी स्थानीय स्तर पर ही सक्रिय थे और सुनियोजित तरीके से इस धंधे को चला रहे थे। पुलिस द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
- जोगिंदर दास (मीरचक चमर टोली निवासी)
- गौतम कुमार (मीरचक चमर टोली निवासी)
- टुनटुन रविदास (मीरचक चमर टोली निवासी)
- प्रकाश रविदास (मीरचक चमर टोली निवासी)
- धर्मेंद्र रविदास (मीरचक चमर टोली निवासी)
इन सभी से जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो इन्होंने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले थे। आरोपियों ने बताया कि वे देश की प्रतिष्ठित वित्तीय कंपनियों जैसे बजाज फाइनेंस और रिलायंस फाइनेंस के नाम का धड़ल्ले से दुरुपयोग करते थे। लोगों को यह यकीन दिलाया जाता था कि उनकी कंपनी न्यूनतम ब्याज दर पर और बिना किसी कागजी झंझट के तुरंत लोन उपलब्ध करा रही है।
सोशल मीडिया और कस्टमर डेटा का होता था इस्तेमाल
यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से अपने पीड़ितों को चुनता था। आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स खासकर फेसबुक और विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से लोगों के मोबाइल नंबर और पर्सनल डेटा हासिल करते थे। इसके बाद, वे इन नंबरों पर सीधे संपर्क करते थे।
विश्वास जीतने के लिए ये ठग खुद को बड़ी कंपनियों का बैंक मैनेजर या वरिष्ठ अधिकारी बताते थे। उनकी बातचीत का लहजा इतना पेशेवर होता था कि आम आदमी आसानी से उनके झांसे में आ जाता था। जब पीड़ित लोन लेने के लिए हामी भर देता था, तो उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और ईमेल आईडी जैसी बेहद संवेदनशील जानकारियां मंगवा ली जाती थीं।
प्रोसेसिंग फीस और लोन अप्रूवल के नाम पर ठगी
एक बार जब ठगों के पास पीड़ित के सारे दस्तावेज पहुंच जाते थे, तो उनका अगला कदम वित्तीय शोषण होता था। वे पीड़ितों को फोन करके कहते थे कि आपका लोन स्वीकृत हो गया है, लेकिन इसके लिए पहले प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस चार्ज या जीएसटी के रूप में कुछ मामूली रकम जमा करनी होगी।
विश्वास में आ चुके लोग जल्दी से लोन पाने की चाहत में ऑनलाइन माध्यमों से पैसे ट्रांसफर कर देते थे। जैसे ही पैसे ट्रांसफर होते थे, ये ठग अपने मोबाइल फोन और सिम कार्ड बंद कर लेते थे और पीड़ित से संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। इस तरह ये गिरोह रोजाना कई लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाता था।
एसपी अभिनव धीमान के सख्त निर्देश पर बड़ी कार्रवाई
इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में जिला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिनव धीमान के सख्त निर्देश और मॉनिटरिंग की अहम भूमिका रही है। एसपी के कड़े रुख के बाद से ही नवादा पुलिस जिले में सक्रिय साइबर अपराधियों पर लगातार नकेल कस रही है।
एसडीपीओ सुजय विद्यार्थी और थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले की पूरी जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ये आरोपी पिछले काफी समय से इस अवैध कारोबार में संलिप्त थे और देश के विभिन्न राज्यों के नागरिकों को अपना शिकार बना चुके हैं। पुलिस अब इनके बैंक खातों का पूरा ब्योरा खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कुल कितनी रकम की ठगी को अंजाम दिया जा चुका है।
सीडीआर (CDR) और बैंक खातों की हो रही है गहन जांच
जांच का दायरा अब और अधिक बढ़ा दिया गया है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइलों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे। इसके अलावा, जिन बैंक खातों में ठगी की रकम मंगवाई जाती थी, उन्हें होल्ड करा दिया गया है और उन खातों से जुड़े अन्य सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं जो इन्हें फर्जी सिम या बैंक खाते उपलब्ध कराते थे।
आम जनता के लिए जरूरी चेतावनी और सुरक्षा सलाह
इस घटना के सामने आने के बाद जिला पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर आम नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने अपील की है कि लोग ऑनलाइन या फोन पर आने वाले लुभावने विज्ञापनों से पूरी तरह सावधान रहें।
- किसी भी अनजान व्यक्ति को फोन कॉल पर अपने दस्तावेज (आधार, पैन, बैंक डिटेल्स) साझा न करें।
- यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोन देने के नाम पर एडवांस पैसे मांगे, तो समझ लें कि वह ठग है।
- किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान की आधिकारिक शाखा में जाकर पुष्टि अवश्य करें।
- साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कराएं।
नवादा पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है। यह घटना यह भी याद दिलाती है कि थोड़ी सी सावधानी और सतर्कता बरतकर ही हम खुद को डिजिटल ठगों के बड़े जाल से सुरक्षित रख सकते हैं।