बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मंगलवार, 08 सितंबर 2026 को बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राज्य के तीन अलग-अलग जिलों—जहानाबाद, शेखपुरा और पटना में निगरानी विभाग की टीमों ने एक साथ ट्रिपल स्ट्राइक करते हुए तीन सरकारी कर्मियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और भ्रष्ट अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बीच गहरी खलबली मची हुई है।
पहला मामला: जहानाबाद में मनरेगा का कनीय अभियंता गिरफ्तार
कार्रवाई के पहले चरण में निगरानी ब्यूरो की टीम ने जहानाबाद जिले के सदर प्रखंड में पदस्थापित मनरेगा के कनीय अभियंता (JE) अमन कुमार को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इस मामले की पृष्ठभूमि बेहद दिलचस्प और गंभीर है। मखदुमपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत जामुक के रहने वाले परिवादी अशोक कुमार ने निगरानी विभाग में एक शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के मुताबिक, ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत 6,77,790 रुपये की लागत से कुल तीन योजनाएं पूरी की गई थीं। इन योजनाओं की मापी पुस्तक (Measurement Book) के सत्यापन के एवज में कनीय अभियंता अमन कुमार द्वारा कुल राशि का 3 प्रतिशत यानी 20,000 रुपये घूस के रूप में मांगे जा रहे थे। परिवादी की शिकायत पर निगरानी विभाग ने बेहद मुस्तैदी से इसका गुप्त सत्यापन कराया, जिसमें आरोप पूरी तरह सही पाए गए। इसके बाद डीएसपी आसिफ इकबाल मेहदी के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से अंबेडकर चौक के पास स्थित एक ढाबे पर छापेमारी कर आरोपी जेई को रंगे हाथों धर दबोचा।
दूसरा मामला: शेखपुरा डीटीओ कार्यालय का लिपिक हत्थे चढ़ा
दूसरी बड़ी कार्रवाई शेखपुरा जिले में जिला परिवहन कार्यालय (DTO) के भीतर अंजाम दी गई। यहां निगरानी की टीम ने कार्यालय के निम्नवर्गीय लिपिक (LDC) कुणाल कुमार को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
अरियरी थाना क्षेत्र के निवासी राजू प्रसाद ने विभाग में शिकायत की थी कि उनके कृषि ट्रैक्टर (पंजीयन संख्या UP 30 AC 4378) का बिहार का नया रजिस्ट्रेशन नंबर आवंटित करने के नाम पर लिपिक द्वारा अवैध रूप से पैसों की मांग की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी राजेन्द्र प्रसाद की अगुवाई में एक टीम बनाई गई। निगरानी की इस टीम ने जिला परिवहन कार्यालय के वरीय लिपिक कक्ष में औचक छापेमारी की और आरोपी लिपिक कुणाल कुमार को रिश्वत के रूप में ली गई पूरी रकम के साथ दबोच लिया।
तीसरा मामला: राजधानी पटना के जेपी गंगा पथ पर दरोगा गिरफ्तार
तीसरी और बेहद सनसनीखेज कार्रवाई सीधे राजधानी पटना के वीवीआईपी इलाके जेपी गंगा पथ पर स्थित यातायात थाने में हुई। यहां निगरानी विभाग की टीम ने गांधी मैदान यातायात थाना के पुलिस अवर निरीक्षक (SI) उपेन्द्र साह को 10,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
कैमूर जिले के रहने वाले परिवादी जमील अंसारी ने ब्यूरो को दी गई शिकायत में बताया था कि उनकी एक गाड़ी को यातायात पुलिस ने जब्त कर लिया था। उसी जब्त गाड़ी को बिना किसी कानूनी अड़चन के मुक्त करने के एवज में दरोगा उपेन्द्र साह द्वारा पैसों की मांग की जा रही थी। डीएसपी श्रीराम चौधरी के नेतृत्व में गठित धावा दल ने दीघा स्थित यातायात थाना के सिरिस्ता कक्ष में अचानक दबिश दी और दरोगा को रिश्वत की नकदी के साथ धर दबोचा।
गुप्त सत्यापन के बाद बनाई गई पुख्ता रणनीति
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन तीनों ही मामलों में शिकायत मिलने के बाद विभाग ने किसी भी जल्दबाजी के बजाय बेहद पेशेवर तरीके से काम किया। सभी मामलों में पहले गोपनीय तरीके से भौतिक और तकनीकी सत्यापन (Secret Verification) कराया गया था। जब यह स्पष्ट हो गया कि सरकारी कर्मी वाकई अवैध रूप से रिश्वत की मांग कर रहे हैं और इसके पुख्ता सबूत हाथ लग गए, तब जाकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गईं।
विशेष निगरानी अदालत में होगी पेशी
रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद तीनों आरोपियों से निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के गुप्त ठिकाने पर लंबी पूछताछ की गई। उनसे जुड़े अन्य दस्तावेजों और ठिकानों को लेकर भी छानबीन शुरू कर दी गई है। पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी आरोपियों को पटना और भागलपुर स्थित संबंधित विशेष निगरानी न्यायालय (Special Vigilance Court) में प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आम जनता के लिए संदेश
निगरानी विभाग ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि राज्य का कोई भी सरकारी मुलाजिम अपने आधिकारिक कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो आम नागरिक सीधे तौर पर निगरानी ब्यूरो से संपर्क कर सकते हैं। इस प्रकार की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों से यह साबित होता है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से काम चल रहा है, जिससे भ्रष्ट तत्वों में अब डर का माहौल बनने लगा है।