जौनपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में अब बदलाव की बयार बहने लगी है। शिक्षा और स्वास्थ्य के बाद अब युवा अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए मुखर होने लगे हैं। ताज़ा मामला जिले के कुछमुछ गांव से सामने आया है, जहां के युवाओं ने खेल मैदान की मांग को लेकर एक बड़ी हुंकार भरी है। मैदान के अभाव में प्रतिभाओं के दम घुटने की बात कहते हुए युवाओं ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
खेलकूद से दूर होते जा रहे हैं युवा
किसी भी समाज और देश के विकास में खेल की अहम भूमिका होती है। लेकिन, जब गांवों में ही खेलकूद के लिए कोई जगह न बचे, तो वहां की प्रतिभाएं कैसे आगे बढ़ेंगी? कुछमुछ गांव के युवाओं का दर्द अब खुलकर सामने आ रहा है। उनका कहना है कि गांव में न तो कोई खेल का मैदान है और न ही युवाओं के शारीरिक विकास के लिए कोई अन्य बुनियादी सुविधा।
स्थानीय युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे को लेकर लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। उनका साफ कहना है कि डिजिटल युग में भी यदि ग्रामीण युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाने के लिए मैदान न मिले, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है।
क्या है मुख्य मांगें?
- गांव में तत्काल एक सुरक्षित और सुविधामुक्त खेल मैदान का निर्माण किया जाए।
- खेल मैदान के लिए सरकारी जमीन की पैमाइश कर उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
- मैदान में मिट्टी भराई और खेल से जुड़े न्यूनतम उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
- युवाओं के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए नियमित खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन हो।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
ग्रामीण इलाकों में खेल के मैदानों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कई जगह सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हैं तो कई जगहों पर फाइलें धूल फांक रही हैं। कुछमुछ गांव के युवाओं का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला।
एक स्थानीय युवा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हम लगातार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। क्या ग्रामीण युवाओं को खेलने का भी अधिकार नहीं है?"
प्रतिभाओं को मिल रहा है बढ़ावा, पर सुविधाएं नदारद
आज के दौर में ग्रामीण अंचलों से निकलकर युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार भी खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं ला रही है। ऐसे में, ज़मीनी स्तर पर इस तरह की लापरवाही सरकारी योजनाओं की पोल खोलती नजर आ रही है।
यदि कुछमुछ गांव के युवाओं को सही समय पर खेल मैदान मिल जाता है, तो आने वाले समय में यहां से कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं। लेकिन, बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह सपने अधूरे नजर आ रहे हैं।
आगे की रणनीति
युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रशासन ने उनकी मांग पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस आंदोलन में न केवल कुछमुछ गांव, बल्कि आसपास के गांवों के युवा भी समर्थन देने के लिए आगे आ रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितना गंभीर रुख अपनाता है और कब तक कुछमुछ गांव के युवाओं को उनके हक का खेल मैदान मिल पाता है। ग्रामीण भारत की इस सुलगती चिंगारी पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।