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जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नियमों में बड़ा बदलाव: 2 साल से ज्यादा देरी हुई तो जाना पड़ेगा कोर्ट, संसद से बिल पास

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नियमों में बड़ा बदलाव: 2 साल से ज्यादा देरी हुई तो जाना पड़ेगा कोर्ट, संसद से बिल पास

अगर आपके घर में किसी बच्चे का जन्म हुआ है या किसी परिजन का निधन, तो उसका प्रमाण पत्र बनवाने में अब बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें। राज्यसभा ने विपक्षी हंगामे के बीच 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल 2026' को ध्वनि मत से पास कर दिया है। 31 जुलाई को यह बिल लोकसभा से भी पारित हो चुका था। नए कानून के तहत अगर आपने रजिस्ट्रेशन में 2 साल से ज्यादा की देरी की, तो आपको कोर्ट के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।

समयसीमा के हिसाब से बदल गए नियम: समझें पूरी प्रक्रिया

सरकार ने साफ किया है कि सामान्य रजिस्ट्रेशन की पुरानी प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन देरी करने पर जांच और मंजूरी की प्रक्रिया को बेहद सख्त बना दिया गया है:

  • 21 दिन तक: जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों के भीतर देने पर प्रक्रिया पहले की तरह ही सामान्य और आसान रहेगी।
  • 21 दिन से 1 साल तक: इस अवधि के दौरान आवेदन करने पर तय नियमों के अनुसार विलंब शुल्क (Late Fee) देकर पंजीकरण कराया जा सकेगा।
  • 1 साल से 2 साल के बीच: 1 वर्ष बीत जाने के बाद पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी की लिखित अनुमति जरूरी होगी।
  • 2 साल से अधिक की देरी: अगर 2 साल के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया है, तो अब किसी प्रशासनिक अधिकारी के पास इजाजत देने का अधिकार नहीं होगा। इसके लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) के आदेश की आवश्यकता होगी।

क्यों सख्त किए गए नियम?

नियमों को कड़ा करने का मुख्य उद्देश्य रिकॉर्ड की सत्यता बनाए रखना और फर्जीवाड़े को रोकना है। अब किसी भी तरह की अनुमति देने से पहले संबंधित अधिकारी को सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करनी होगी।

"देश में पैदा होने वाले हर नागरिक का सही रिकॉर्ड होना चाहिए। मृत व्यक्तियों का सही आंकड़ा दर्ज न होने से वे 'घोस्ट वोटर' (Ghost Voters) बन जाते हैं और फर्जी वोटिंग का जरिया बनते हैं। इस बिल से तुष्टिकरण और धांधली पर रोक लगेगी।" - नित्यानंद राय, गृह राज्य मंत्री

सदन में विपक्ष का भारी हंगामा

राज्यसभा में जब गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय इस बिल को पेश कर रहे थे, तब विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया और गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग की। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी विस्तृत चर्चा की बात कही। हालांकि, भारी शोर-शराबे के बीच ही इस महत्वपूर्ण बिल को पारित कर दिया गया।

आम जनता के लिए क्या है सलाह?

सरकार का कहना है कि हर बच्चे का सही समय पर जन्म दर्ज होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसी आधार पर उसे भविष्य में पहचान, स्कूल में दाखिला, राशन कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। प्रशासनिक झंझटों और अदालती प्रक्रियाओं से बचने के लिए जन्म या मृत्यु के 21 दिनों के भीतर ही अस्पताल या स्थानीय निकाय के पास पंजीकरण करा लेना सबसे बेहतर रहेगा।

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