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13 साल की उम्र में अखाड़ा, फिर रचा इतिहास: जानिए कौन हैं गीतिका जाखड़

13 साल की उम्र में अखाड़ा, फिर रचा इतिहास: जानिए कौन हैं गीतिका जाखड़

जब भी भारतीय महिला कुश्ती (Women Wrestling in India) के स्वर्णिम इतिहास की बात होती है, तो एक नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है—गीतिका जाखड़। आज भले ही देश की बेटियां कुश्ती के अखाड़े में दुनिया भर में तिरंगा लहरा रही हैं, लेकिन एक ऐसा दौर भी था जब इस खेल में महिलाओं की हिस्सेदारी न के बराबर थी। ऐसे समय में हरियाणा की एक युवा लड़की ने रूढ़ियों को तोड़ते हुए ऐसा इतिहास लिखा, जिसने देश की आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ते हमेशा के लिए आसान कर दिए।

अखाड़े की मिट्टी से जुड़ा बचपन और खेल विरासत

हरियाणा के हिसार जिले के ऐतिहासिक गांव अग्रोहा में 18 अगस्त 1985 को जन्मी गीतिका जाखड़ के लिए खेल कोई नया शब्द नहीं था। कुश्ती का जुनून उन्हें विरासत में मिला था। उनके दादाजी खुद एक जाने-माने पहलवान थे, और उनके पिता एक स्पोर्ट्स ऑफिसर के रूप में खेलों से जुड़े हुए थे। घर का माहौल पूरी तरह से खेलमय था, जिससे गीतिका का झुकाव स्वाभाविक रूप से कुश्ती की तरफ हो गया।

महज 13 साल की कोमल उम्र में, जब बच्चे खेलकूद और पढ़ाई की प्राथमिक कक्षाओं में उलझे होते हैं, गीतिका ने कुश्ती के कड़े अखाड़े में कदम रख दिया था। शुरुआती झिझक को पीछे छोड़कर उन्होंने अपनी मेहनत और पसीने से अखाड़े की मिट्टी को अपनी तकदीर लिखना शुरू किया।

महज 15 साल की उम्र में 'भारत केसरी' का खिताब

गीतिका जाखड़ की प्रतिभा इतनी असाधारण थी कि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही बड़े दिग्गजों को चौंकाना शुरू कर दिया था। उन्होंने मात्र 15 साल की उम्र में प्रतिष्ठित 'भारत केसरी' का खिताब अपने नाम कर लिया। यह कोई आम उपलब्धि नहीं थी। इसके बाद गीतिका का जलवा ऐसा कायम हुआ कि उन्होंने लगातार 9 सालों तक इस खिताब पर अपना अधिकार बनाए रखा, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है।

प्रमुख उपलब्धियां एक नजर में:

  • अर्जुन पुरस्कार (2006): यह सम्मान पाने वाली वह भारत की पहली महिला पहलवान बनीं।
  • कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप: साल 2003 और 2005 में स्वर्ण पदक (Gold Medal), और 2007 में रजत पदक (Silver Medal)।
  • एशियन गेम्स: साल 2006 में सिल्वर और 2014 में ब्रॉन्ज मेडल देश के नाम किया।
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2014: ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता।

अर्जुन पुरस्कार जीतकर रचा नया इतिहास

साल 2006 भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक साल था, खासकर महिलाओं के कुश्ती के लिहाज से। गीतिका जाखड़ को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए देश के प्रतिष्ठित 'अर्जुन पुरस्कार' से नवाजा गया। इस मुकाम को हासिल करने वाली वह भारत की इतिहास में पहली महिला पहलवान बनीं।

"सफलता शॉर्टकट से नहीं, बल्कि रोजाना की जाने वाली अनथक मेहनत से मिलती है। अखाड़े में बहाया गया हर एक बूंद पसीना आपके भविष्य की इबारत लिखता है।" — गीतिका जाखड़ (अपने एक इंटरव्यू में)

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद उन्हें हरियाणा सरकार द्वारा राज्य के सर्वोच्च खेल सम्मान 'भीम पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा, साल 2009 में उनकी उपलब्धियों और समाज में प्रेरणास्त्रोत बनने के लिए उन्हें प्रतिष्ठित 'कल्पना चावला उत्कृष्टता पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया।

खाकी वर्दी और खेल का सफर

खेल के मैदान से संन्यास या उम्र बढ़ने के बाद भी गीतिका का जज्बा कम नहीं हुआ। उन्होंने हरियाणा पुलिस में डीएसपी (DSP) के पद पर जिम्मेदारी संभालते हुए भी खेल के प्रति अपने प्रेम को जीवित रखा। साल 2019 में उन्होंने वर्ल्ड पुलिस गेम्स में हिस्सा लिया और 60 किलोग्राम भार वर्ग में देश के लिए सिल्वर मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि चैंपियन कभी बूढ़े नहीं होते।

आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

गीतिका जाखड़ का जीवन इस बात की सबसे बड़ी मिसाल है कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उन्होंने तब रास्ता बनाया जब महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में राह बहुत कठिन थी। आज जब देश की बेटियां कुश्ती में ओलंपिक मेडल जीत रही हैं, तो उसकी नींव रखने वालों में गीतिका जाखड़ का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: अर्जुन पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान कौन हैं?

Ans: गीतिका जाखड़ अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने वाली भारत की पहली महिला पहलवान हैं, जिन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार वर्ष 2006 में मिला था।

Q2: गीतिका जाखड़ ने किस उम्र में कुश्ती शुरू की थी?

Ans: गीतिका ने महज 13 साल की उम्र में कुश्ती के अखाड़े में कदम रख दिया था और मात्र 15 साल की उम्र में 'भारत केसरी' का खिताब जीत लिया था।

Q3: गीतिका जाखड़ वर्तमान में किस पद पर कार्यरत हैं?

Ans: गीतिका जाखड़ हरियाणा पुलिस में डीएसपी (DSP) के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं और खेल विभाग से भी जुड़ी रही हैं।

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गुंजा पांडेय

गुंजा पांडेय

Chief Sub Editor

गुंजा पांडेय तेज़ी से बदलती खबरों की दुनिया में अपनी पकड़ के लिए जानी जाती हैं। वे खेल और विज्ञान जैसे विषयों को न सिर्फ अपडेटेड रखती हैं, बल्कि उन...

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