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यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार को दिया 6 महीने में प्रक्रिया पूरी करने का आदेश

यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार को दिया 6 महीने में प्रक्रिया पूरी करने का आदेश

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों का इंतजार कर रहे ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनाव में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि आगामी छह महीने के भीतर पंचायत चुनाव की संपूर्ण प्रक्रिया को हर हाल में पूरा किया जाए।

कोर्ट ने जताई गंभीर नाराजगी, पूछा- आखिर क्यों हो रही देरी?

पंचायत चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण मामले 'दशरथ यादव बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली और टालमटोल वाले रवैये पर सख्त नाराजगी व्यक्त की। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार का पक्ष रख रहे अधिवक्ता श्री मनीष गोयल से कई तीखे और महत्वपूर्ण सवाल पूछे। जब सरकार की तरफ से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कड़ी फटकार लगाई।

"लोकतंत्र की सबसे छोटी और अहम इकाई यानी पंचायतों के चुनाव में अनावश्यक विलंब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार समयबद्ध तरीके से चुनावी प्रक्रिया पूरी करे।" - इलाहाबाद उच्च न्यायालय

पिछड़ा वर्ग आयोग के हलफनामे पर असंतोष

मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अदालत ने केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पिछड़ा वर्ग आयोग के रुख पर भी असंतोष जताया। पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री शशि नंदन द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे की समीक्षा करते हुए कोर्ट ने पाया कि उसमें दिए गए तर्क तार्किक नहीं थे। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि तकनीकी या प्रशासनिक वजहों से जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को लंबे समय तक बाधित नहीं रखा जा सकता।

निगरानी के लिए 'एमिकस क्यूरी' की नियुक्ति

चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और समय सीमा का पालन हो, इसके लिए हाईकोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है:

  • एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) की नियुक्ति: हाईकोर्ट ने अधिवक्ता श्री विजय सिंह को मामले में न्यायमित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया है।
  • कड़ी निगरानी: श्री विजय सिंह पूरी चुनावी तैयारी और प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी करेंगे और समय-समय पर न्यायालय को रिपोर्ट सौंपकर उसकी सहायता करेंगे।

अगली सुनवाई 14 अगस्त 2026 को तय

न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद अब राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तय सीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी करनी होंगी। परिसीमन, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और आरक्षण व्यवस्था जैसी जटिल प्रक्रियाओं को अब तेजी से निपटाना होगा। हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है, जिस दिन सरकार को अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।

कोर्ट के इस आदेश के बाद अब प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर तेज होने की पूरी उम्मीद है।

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नसीम अहमद

नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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