सनातन संस्कृति में एकादशी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। पंचांग के अनुसार, आज यानी 22 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi 2026) के रूप में पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की उपासना करने से समस्त प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है। आज के दिन परिवर्तिनी एकादशी के साथ-साथ कल्कि द्वादशी का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस तिथि का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
आज का पंचांग और मुख्य तिथियां
आज मंगलवार का दिन है और विक्रम संवत 2083 चल रहा है। आइए नजर डालते हैं आज के पंचांग के मुख्य बिंदुओं पर:
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: एकादशी (रात्रि 09 बजकर 43 मिनट तक, तत्पश्चात द्वादशी तिथि)
- नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा (प्रातः 07 बजकर 06 मिनट तक), उसके बाद श्रवण नक्षत्र पूरी रात्रि रहेगा।
- योग: अतिगण्ड योग (सायं 04 बजकर 29 मिनट तक, इसके बाद सुकर्मा योग)
- करण: वणिज (प्रातः 08 बजकर 55 मिनट तक), इसके बाद विष्टि (भद्रा) रात्रि 09 बजकर 43 मिनट तक और फिर बव करण।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति एवं राशियां
खगोलीय गणना के अनुसार, आज सूर्य देव कन्या राशि में विराजमान हैं, जबकि चंद्रमा अपनी राशि बदलकर मकर राशि में संचरण कर रहे हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय इस प्रकार है:
- सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 09 मिनट पर
- सूर्यास्त: सायं 06 बजकर 18 मिनट पर
- चंद्रोदय: दोपहर 03 बजकर 53 मिनट पर
- चंद्रास्त: मध्यरात्रि के बाद 02 बजकर 37 मिनट पर (23 सितंबर)
श्रवण नक्षत्र और उसके प्रभाव
आज का दिन श्रवण नक्षत्र के प्रभाव से भी विशेष माना जा रहा है। श्रवण नक्षत्र के देवता स्वयं सृष्टि के पालनहार विष्णुदेव हैं और इसके नक्षत्र स्वामी चंद्रदेव तथा राशि स्वामी शनिदेव हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले या इस दौरान विशेष कार्य करने वाले जातक जिज्ञासु, बुद्धिमान, उच्च बौद्धिक क्षमता वाले और अच्छे श्रोता माने जाते हैं।
आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त
धार्मिक अनुष्ठानों, नई शुरुआत या किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को करने से पहले शुभ और अशुभ समय की जानकारी होना आवश्यक है।
शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक
- अमृत काल: रात्रि 09 बजकर 52 मिनट से रात्रि 11 बजकर 36 मिनट तक
अशुभ समय (राहुकाल एवं अन्य)
- राहुकाल: दोपहर 03 बजकर 16 मिनट से सायं 04 बजकर 47 मिनट तक
- गुलिकाल: दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से दोपहर 01 बजकर 45 मिनट तक
- यमगण्ड: प्रातः 09 बजकर 11 मिनट से प्रातः 10 बजकर 43 मिनट तक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल के दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक या नए कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत और पारण का समय
एकादशी का व्रत केवल एक दिन की पूजा नहीं है, बल्कि इसके नियमों का, विशेषकर पारण का, कड़ाई से पालन करना जरूरी होता है।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 21 सितंबर, रात 08:00 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 22 सितंबर, रात 09 बजकर 43 मिनट तक
- व्रत पारण का समय (23 सितंबर): सुबह 06 बजकर 10 मिनट से 08 बजकर 35 मिनट तक
- द्वादशी तिथि समाप्त: 23 सितंबर, रात 10 बजकर 50 मिनट तक
पारण से जुड़े जरूरी नियम
एकादशी व्रत का समापन यानी पारण सूर्योदय के बाद ही किया जाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण करना अनिवार्य माना गया है। यदि समय पर व्रत न खोला जाए, तो उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इसके साथ ही, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि 'हरि वासर' के दौरान व्रत का पारण बिल्कुल न करें। द्वादशी तिथि का प्रथम एक-चौथाई भाग हरि वासर कहलाता है, जिसके बीतने का इंतजार करना उचित माना जाता है। व्रत खोलने के लिए प्रातःकाल का समय सबसे उत्तम माना गया है।