बिहार की राजधानी पटना और उसके आसपास के इलाकों में बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। सितंबर 2026 के इस दौर में, गंगा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई दियारा और तटीय इलाकों में पानी घुस आया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस चुनौती से पार पाने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी मुस्तैदी के साथ मैदान में उतर चुका है और प्रभावित परिवारों तक हरसंभव मदद पहुंचाई जा रही है।
सुरक्षित आवागमन और बचाव के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और उनके आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर इंतजाम किए हैं। जिलाधिकारी कुन्दन कुमार के सख्त निर्देशों के बाद संवेदनशील इलाकों में कुल 189 नौकाओं को पूरी तरह से तैनात कर दिया गया है। इन नावों की तैनाती इलाकों की गंभीरता के आधार पर की गई है:
- फतुहा क्षेत्र: 37 नौकाएं
- दीदारगंज क्षेत्र: 32 नौकाएं
- मनेर क्षेत्र: 27 नौकाएं
- अन्य संवेदनशील घाट और जलमग्न इलाके: शेष नौकाएं लगातार गश्त पर हैं।
इसके साथ ही, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (SDRF) की 8 और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 2 विशेष टीमों को भी मैदान में उतार दिया गया है। ये टीमें लगातार राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रही हैं ताकि समय रहते किसी अनहोनी को टाला जा सके।
दियारा क्षेत्रों में वन्यजीवों से सुरक्षा के लिए विशेष अलर्ट
बाढ़ के पानी के कारण दियारा इलाकों का पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हुआ है। पानी भरने की वजह से जंगली सूअर और अन्य वन्यजीवों के रिहाइशी इलाकों की तरफ रुख करने की आशंका लगातार बनी हुई है। इस खतरे को भांपते हुए वन विभाग की विशेष रेस्क्यू टीम को दो डेडिकेटेड वाहनों के साथ हाई अलर्ट पर रखा गया है।
यह रेस्क्यू टीम लगातार वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और यदि कोई जानवर आबादी के नजदीक आता है, तो उसे सुरक्षित रूप से रेस्क्यू करने की कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से खास अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास कोई भी जंगली जानवर दिखाई दे, तो उसे किसी भी तरह से परेशान या छेड़ने के बजाय तुरंत स्थानीय प्रशासन या वन विभाग के हेल्पलाइन नंबरों पर सूचना दें।
स्वास्थ्य सेवाओं का महाजाल: 20 मेडिकल कैंप और 6 बोट एम्बुलेंस
बाढ़ के दिनों में जलजनित बीमारियों और संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को तुरंत मेडिकल हेल्प देने के लिए कुल 20 विशेष मेडिकल कैंप सक्रिय किए गए हैं, जहां डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम मौजूद है।
आपातकाल और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 28 सामान्य एम्बुलेंस के साथ-साथ जलमग्न इलाकों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई 6 बोट एम्बुलेंस को भी लगाया गया है, जो पानी वाले रास्तों पर लगातार भ्रमण कर रही हैं।
सामुदायिक रसोई के जरिए भूखे पेटों को राहत
घर-बार छोड़कर ऊंचे स्थानों या राहत शिविरों में शरण लेने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या दो वक्त की रोटी की होती है। इस समस्या का समाधान करते हुए प्रशासन ने जिले में सामुदायिक रसोई केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 34 कर दी है। इन रसोईघरों में रोजाना हजारों बाढ़ पीड़ितों के लिए ताजा और पौष्टिक भोजन तैयार किया जा रहा है और समय पर उसका वितरण किया जा रहा है ताकि कोई भी भूखा न रहे।
पशुधन की सुरक्षा और राहत सामग्री का वितरण
इंसानों के साथ-साथ मवेशियों की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। बाढ़ राहत अभियानों के तहत पशुधन की देखभाल के लिए 15 विशेष पशु शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में अब तक 1680 से अधिक पशुओं का सफल इलाज किया जा चुका है और उनके चारे के लिए 1000 क्विंटल से ज्यादा पशुचारा बांटा गया है।
इसके अलावा, राहत शिविरों और खुले आसमान के नीचे रहने वाले परिवारों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अब तक 6018 पॉलीथीन शीट्स (तिरपाल) का वितरण किया जा चुका है, ताकि लोग बारिश और धूप से अपना बचाव कर सकें। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) द्वारा प्रभावित इलाकों में स्वच्छ पेयजल के टैंकर और अस्थायी शौचालयों का निर्माण किया गया है, जबकि नगर निगम की टीमें साफ-सफाई और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव में जुटी हैं।
अधिकारियों का जमीनी निरीक्षण और तटबंधों की निगरानी
जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीमें लगातार गंगा और अन्य नदियों के तटबंधों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। रिसाव या ओवरफ्लो की किसी भी छोटी सी सूचना पर तुरंत एक्शन लिया जा रहा है, और बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत का कार्य भी युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी कुंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। हाल ही में दोनों शीर्ष अधिकारियों ने गंगा नदी के विभिन्न प्रमुख घाटों, पुनपुन नदी के इलाकों और कई सामुदायिक रसोई केंद्रों का औचक दौरा किया। उन्होंने वहां चल रहे राहत कार्यों का जायजा लिया और मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को पूरी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ काम करने के सख्त निर्देश दिए हैं, ताकि पीड़ित जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।