प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी महत्वपूर्ण विदेश यात्रा के तहत किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच चुके हैं। बिश्केक के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री यहां आयोजित होने जा रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन को कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर गहन मंथन होगा।
बिश्केक में भव्य स्वागत और कूटनीतिक हलचल
रविवार को जब प्रधानमंत्री मोदी का विशेष विमान बिश्केक हवाई अड्डे पर उतरा, तो किर्गिस्तान के उच्चाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस यात्रा के दौरान क्षेत्रीय शांति और आपसी साझेदारी को मजबूत करने पर मुख्य रूप से जोर दिया जाएगा। वैश्विक राजनीति के मौजूदा परिदृश्य में SCO शिखर सम्मेलन का मंच भारत के लिए अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखने का एक बड़ा अवसर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के सम्मेलन में मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों को नई दिशा देने पर बातचीत हो सकती है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं, जिन पर प्रधानमंत्री मोदी अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।
SCO शिखर सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) यूरेशियाई क्षेत्र का एक प्रभावशाली आर्थिक और सुरक्षा ब्लॉक है। इस वर्ष के सम्मेलन में निम्नलिखित मुख्य मुद्दों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है:
- क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद: सीमा पार आतंकवाद से निपटना और खुफिया जानकारी साझा करना।
- आर्थिक सहयोग और व्यापार: सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नए रास्ते तलाशना।
- कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स: उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देना।
- सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान: युवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाना।
द्विपक्षीय बैठकों पर टिकी हैं निगाहें
शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी संभावना है। इन बैठकों का उद्देश्य द्विपक्षीय रिश्तों को और अधिक मजबूत करना तथा वैश्विक मंचों पर आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत हमेशा से मध्य एशियाई देशों के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्राथमिकता देता रहा है, और यह यात्रा इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
आगामी सत्रों में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन पर भी पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, जिसमें वह भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से रखेंगे। सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर भारत की बढ़ती भूमिका के बीच यह दौरा भारत की विदेश नीति की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
