वेब सीरीज से मिला आइडिया, ऑनलाइन मंगवाया कागज; राजस्थान पुलिस ने छह आरोपियों को दबोचा
राजस्थान के डूंगरपुर जिले में नकली भारतीय मुद्रा छापने वाले एक बड़े और संगठित अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जिला पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अभिनेता शाहिद कपूर की चर्चित वेब सीरीज 'फर्जी' से प्रेरित होकर नकली नोट छापने की साजिश रची थी। पुलिस इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय और अन्य संपर्कों की गहनता से पड़ताल कर रही है।
30 सितंबर को सामने आया मामला
डूंगरपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) मनीष कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस कार्रवाई की शुरुआत 30 सितंबर को हुई थी। उस दिन स्थानीय पुलिस ने रामसागडा थाना क्षेत्र के माडा स्कूल ग्राउंड के पास संदिग्ध गतिविधि के चलते दो लोगों को हिरासत में लिया था। पकड़े गए आरोपियों की पहचान भावेश खटीक और नयन जोशी के रूप में हुई। तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके कब्जे से 4,95,500 रुपये मूल्य के 500-500 के नकली नोट बरामद किए। इसके बाद शुरू हुई पूछताछ में इस पूरे सिंडिकेट की परतें खुलती चली गईं।
मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के लिए 1300 किमी पीछा
पुलिस पूछताछ में उत्तर प्रदेश निवासी रवि कुमार मिश्रा का नाम इस गिरोह के मुख्य सरगना के रूप में सामने आया। पुलिस की दबिश की भनक लगते ही रवि मिश्रा डूंगरपुर से फरार हो गया था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। आरोपी को दबोचने के लिए डूंगरपुर पुलिस की एक विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस की मदद ली और लगातार तीन दिनों तक करीब 1,300 किलोमीटर तक उसका पीछा किया। आखिरकार पुलिस ने उसे पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से धर दबोचा।
अलीबाबा और टेलीग्राम के जरिए होती थी सामग्री की आपूर्ति
पुलिस अनुसंधान में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने नकली नोट छापने के लिए तकनीक और सामग्री अलग-अलग स्रोतों से जुटाई थी। हरियाणा के अंबाला निवासी आनंद राजपूत ने मुख्य सरगना रवि मिश्रा को नकली नोट तैयार करने का प्रशिक्षण दिया था। आनंद ने ही ऑनलाइन मार्केटप्लेस 'अलीबाबा' के माध्यम से नोट छापने के लिए खास कागज मंगाने में मास्टरमाइंड की मदद की थी। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के कानपुर से आरिफ मोहम्मद नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जो 'अंकित पेपर सेलर' नाम से एक टेलीग्राम चैनल संचालित करता था। इसी चैनल के जरिए गिरोह को अवैध छपाई के लिए आवश्यक कागज की आपूर्ति की जाती थी।
फोटोशॉप और यूट्यूब से सीखा हुनर
जांच में यह भी सामने आया है कि छत्तीसगढ़ निवासी तरुण मलेकर ने गिरोह के मास्टरमाइंड को 500 रुपये के नोटों की डिजाइन वाली फोटोशॉप PSD (Photoshop Document) फाइलें उपलब्ध कराई थीं। पुलिस के अनुसार, इस पूरे खेल का प्रशिक्षण देने वाले आनंद राजपूत ने खुद यूट्यूब वीडियो और फोटोशॉप टूल्स की सहायता से नकली नोट तैयार करने की तकनीक सीखी थी। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार सभी छह आरोपियों से विस्तृत पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन लोगों ने बाजार में अब तक कुल कितनी नकली मुद्रा खपाई है और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।