मथुरा में आधुनिकीकरण के दौर और अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के बीच ब्रजभाषा की समृद्ध भाषाई विरासत को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वृंदावन शोध संस्थान ने जीएलए विश्वविद्यालय के सहयोग से एक उन्नत ब्रजभाषा शब्दकोश तैयार करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के पारंपरिक शब्दों को संरक्षित करना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है ताकि भाषा का मूल स्वरूप सुरक्षित रह सके।
ऐतिहासिक रूप से ब्रजभाषा का दायरा काफी बड़ा रहा है और अतीत में यह देश के एक बड़े हिस्से में समझ और बोली जाती थी। हालांकि, समय के साथ इसका दायरा सिमटा है और साहित्यिक सृजन भी सीमित हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में भाषा के अस्तित्व को पुन:प्रतिष्ठा दिलाने के लिए वृंदावन शोध संस्थान ने जीएलए विश्वविद्यालय के साथ मिलकर ब्रजभाषा शोध पीठ की स्थापना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
तीन विशेष समितियों का हुआ गठन
शब्दकोश तैयार करने की इस वृहद परियोजना को गति देने के लिए पिछले महीने तीन अलग-अलग समितियों का गठन किया गया है। इनमें शब्द संकलन समिति, तकनीकी समिति और परामर्शदात्री समिति शामिल हैं। इन समितियों में उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान और दिल्ली के प्रतिष्ठित साहित्यकारों और विषय विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जिन्होंने अपना काम शुरू कर दिया है।
संस्थान के निदेशक राजीव द्विवेदी के अनुसार, अब तक ब्रजभाषा के तीन शब्द सामने आ चुके हैं, लेकिन प्रत्येक में कुछ न कुछ कमियां रह गई थीं। इस नए और उन्नत शब्दकोश के निर्माण के दौरान पुराने सभी उपलब्ध शब्दकोशों का सूक्ष्म परीक्षण (स्कैनिंग) किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कौन से महत्वपूर्ण शब्द छूट गए हैं और कौन से शब्द गलत तरीके से भाषा में शामिल हो गए हैं।
दो से ढाई वर्ष में पूरा होगा कार्य
वरिष्ठ शोध प्रकाशन सहायक करुणेश उपाध्याय ने जानकारी दी कि इस संपूर्ण शब्दकोश को तैयार करने में लगभग दो से ढाई साल का समय लगने का अनुमान है। इस अवधि के दौरान सभी गठित समितियां मिलकर शब्दों के चयन, उनके अर्थ और तकनीकी पहलुओं पर बारीकी से काम करेंगी।
समितियों में शामिल प्रमुख विशेषज्ञ
शब्दकोश निर्माण के लिए बनाई गई समितियों में देश के कई जाने-माने विद्वानों को स्थान मिला है:
- शब्द संकलन समिति: इसमें प्रो. विद्योतमा मिश्रा, प्रो. माधव हाड़ा, डॉ. नटवर नागर, डॉ. विजेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. संध्या द्विवेदी, डॉ. आशुतोष कुमार, डॉ. नृत्य गोपाल और डॉ. अनुपम श्रीवास्तव को शामिल किया गया है।
- परामर्शदात्री समिति: इस समिति की कमान डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित, विष्णु के. आचार्य, डॉ. अभिनव तिवारी और अखिलेश व्यास को सौंपी गई है।
- तकनीकी समिति: पद्मश्री ऊषा यादव, डॉ. जगदीश व्योम, डॉ. रामसनेहीलाल यायावर और डॉ. शेफाली चतुर्वेदी तकनीकी समिति के सदस्य हैं।