अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद भारत लाने की तैयारी के बीच रोहतक के कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और उसके बाल सखा रहे अंकित उर्फ बाबा के बीच की खूनी दुश्मनी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। दोनों के बीच वर्ष 2019 में शुरू हुआ एक मामूली कार विवाद किस तरह हरियाणा के एक गांव को दहलाने वाली खूनी गैंगवार में बदल गया, इसकी पूरी दास्तान अब सामने आ रही है।
रोहतक जिले के रिटौली गांव के रहने वाले हिमांशु और अंकित कभी पक्के दोस्त हुआ करते थे। दोनों ने साथ में पढ़ाई की थी, लेकिन साल 2019 में एक कार को लेकर उपजे विवाद ने इन दोनों को हमेशा के लिए एक-दूसरे का जानी दुश्मन बना दिया। इस रंजिश के चलते दोनों ने अपने अलग-अलग आपराधिक गिरोह तैयार किए और एक-दूसरे के करीबियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिसके परिणामस्वरुप मार्च 2022 में महज पांच दिन के भीतर तीन सनसनीखेज हत्याएं हुईं। हाल ही में अंकित के चाचा अनिल की हत्या के बाद इस पुरानी और खौफनाक रंजिश के पन्ने एक बार फिर खुल गए हैं।
बस की सुरक्षा के लिए खरीदी गई कार बनी विवाद की जड़
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में रिटौली गांव निवासी हंसराज उर्फ हंसे ने एक निजी बस खरीदी थी। मार्ग पर बस चलाने के दौरान कुछ लोगों से उसका विवाद हो गया था, जिसके बाद उसने सुरक्षा के लिए हिमांशु भाऊ से संपर्क किया। हिमांशु ने बस के साथ सुरक्षा के वास्ते एक कार की आवश्यकता बताई। इसके बाद हंसराज ने बैंक से कर्ज लेकर कार खरीदी।
इस पूरी प्रक्रिया में दिलचस्प और घातक मोड़ यह आया कि कार खरीदने के लिए कागजों में अंकित के परिवार के दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, जबकि वास्तविक गाड़ी हिमांशु के साथियों के इस्तेमाल में रहने लगी। कुछ समय बीतने के बाद हंसराज ने बैंक की किश्तें जमा करनी बंद कर दीं। जब बैंक के कर्मचारी कर्ज की वसूली के लिए अंकित के घर पहुंचे, तब उसके परिजनों को इस बात की जानकारी हुई। इसके बाद अंकित के परिवार ने हिमांशु पक्ष से गाड़ी वापस मांगी। गाड़ी न मिलने के कारण दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और देखते ही देखते यह विवाद गहरी दुश्मनी में बदल गया।
स्टेडियम में फायरिंग और बाल सुधार गृह से फरार होने की कहानी
कार के इस विवाद के बाद हिमांशु और अंकित के भाई सन्नी के बीच तीखी कहासुनी हुई थी। ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को देख लेने की खुली धमकी दी और गांव के स्टेडियम में मिलने की चुनौती दी। तय समय पर हिमांशु पिस्तौल लेकर स्टेडियम पहुंचा और सन्नी पर गोली चला दी। इस गंभीर वारदात के बाद पुलिस ने हिमांशु को गिरफ्तार कर लिया था।
घटना के समय हिमांशु नाबालिग था, इसलिए उसे पुलिस ने हिसार स्थित बाल सुधार गृह भेज दिया था। हालांकि, वह वहां से फरार होने में कामयाब रहा। हिमांशु के जेल जाने के बाद अंकित ने उन लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिन्हें हिमांशु का संरक्षण प्राप्त था। जेल से भागने के बाद हिमांशु ने अपने गिरोह को और अधिक मजबूत किया। इसके बाद दोनों ही गुटों पर रंगदारी वसूलने, लूटपाट करने और अवैध शराब के कारोबार जैसी वारदातों में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, हिमांशु पर एल्विश यादव के घर और शोरूम पर हुई फायरिंग से जुड़े होने के तार भी खंगाले जा रहे हैं।
महज पांच दिन में तीन हत्याओं से दहल उठा था रिटौली गांव
दोनों गिरोहों के बीच की बढ़ती खूनी रंजिश 2 मार्च 2022 को अपने चरम पर पहुंच गई, जब हिमांशु के चाचा अशोक उर्फ शोकी के बेटे रोहित उर्फ बजरंग की हत्या कर दी गई। इस दोहरे हत्याकांड के बाद जब गांव के ही राजेंद्र उर्फ माडू ने आरोपियों को पकड़ने का प्रयास किया, तो उन्हें भी गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया।
इस दोहरे हत्याकांड के ठीक पांच दिन बाद, यानी 7 मार्च को हिमांशु गिरोह ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गांव के बस अड्डे पर खड़ी बस में घुसकर हंसराज उर्फ हंसे की गोली मारकर हत्या कर दी। इस तरह महज पांच दिनों के भीतर हुई तीन हत्याओं से पूरे रिटौली गांव में सिहरन पैदा हो गई थी। हाल ही में अंकित के चाचा अनिल की हत्या के मामले में भी हिमांशु गिरोह का हाथ होने का अंदेशा जताया जा रहा है, हालांकि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही इसकी आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
विदेश भागा गैंगस्टर और अब भारत डिपोर्टेशन की प्रक्रिया
वर्ष 2019 में 17 वर्ष की उम्र में गोलीबारी के मामले में पकड़े जाने और हिसार के बाल सुधार गृह से फरार होने के बाद हिमांशु पुलिस की पकड़ से हमेशा के लिए बाहर हो गया था। इसके बाद उसके खिलाफ रोहतक, झज्जर और दिल्ली समेत कई अन्य जिलों में हत्या, लूट, रंगदारी और धोखाधड़ी के अनगिनत मामले दर्ज होते चले गए। वर्ष 2022 में वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे देश छोड़कर भाग निकला।
देश से फरार होने के बाद वह पहले पुर्तगाल पहुंचा और फिर वहां से अमेरिका चला गया। उसकी बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वर्ष 2023 में इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया था। कानून का शिकंजा कसते हुए हरियाणा पुलिस ने उस पर डेढ़ लाख रुपये और दिल्ली पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। अब अमेरिका में उसकी गिरफ्तारी के बाद उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वहीं, उसका विरोधी गैंगस्टर अंकित उर्फ बाबा पहले से ही वर्ष 2023 से जेल में बंद है।