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वाराणसी में कफ सिरप तस्करी का भंडाफोड़: 62 साल के बुजुर्ग का फर्जीवाड़ा बेनकाब

वाराणसी में कफ सिरप तस्करी का भंडाफोड़: 62 साल के बुजुर्ग का फर्जीवाड़ा बेनकाब

वाराणसी में नशे के सौदागरों पर पुलिस का शिकंजा, कफ सिरप तस्करी में एक और बड़ा नाम गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी में पुलिस कमिश्नरेट की ओर से अवैध ड्रग्स और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में थाना रोहनिया पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के मामले में संलिप्त एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने ड्रग्स के इस काले कारोबार को चलाने के लिए मुख्य तस्कर को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। इस गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि इस अवैध सिंडिकेट के तार कितने गहरे और दूर तक फैले हुए थे।

पुलिस आयुक्तालय के वरुणा जोन के कुशल निर्देशन में रोहनिया थाने की पुलिस टीम लगातार अपराधियों की कुंडली खंगाल रही थी। मु0अ0सं0 343/2025 (धारा 8/21/25/29 एनडीपीएस एक्ट और बढ़ोत्तरी धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) बीएनएस) के तहत चल रही गहन विवेचना के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। इसी साक्ष्य आधारित कार्रवाई के आधार पर पुलिस ने एक नामजद अभियुक्त को धर दबोचा।कौन है गिरफ्तार आरोपी और क्या है उसकी भूमिका?

पकड़े गए आरोपी की पहचान विकास सिंह (पुत्र स्व0 ताराचंद) के रूप में हुई है, जिसकी उम्र करीब 62 वर्ष बताई जा रही है। वह वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कायस्थ टोला, प्रहलाद घाट (पता: ए-9/61ए) का रहने वाला है। इतनी अधिक उम्र में इस तरह के गंभीर आपराधिक षड्यंत्र में लिप्त पाए जाने से हर कोई हैरान है।

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि विकास सिंह ने 'शैली ट्रेडर्स' (रांची) के मुख्य अभियुक्त शुभम जायसवाल को अपनी खुद की फर्म 'श्यामभवी फार्मा' में काम करने का दो साल का एक फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificate) जारी किया था। विकास सिंह यह अच्छी तरह जानता था कि शुभम जायसवाल कभी भी उसकी फर्म पर कार्यरत नहीं रहा है और न ही उसने वहां कोई नौकरी की है। इसके बावजूद उसने यह कूटरचित (Fake) दस्तावेज तैयार करके मुख्य तस्कर को सौंप दिया था।

फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे शुरू हुआ तस्करी का बड़ा खेल

अपराध की दुनिया में दस्तावेजों की बाजीगरी किस हद तक खतरनाक हो सकती है, इसकी बानगी इस मामले में साफ देखी जा सकती है। इसी फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके शुभम जायसवाल ने रांची स्थित 'शैली ट्रेडर्स' में एक 'कम्पीटेंट पर्सन' (सक्षम व्यक्ति) का दर्जा हासिल कर लिया। दवा व्यापार के नियमों के तहत इस पद का होना आवश्यक होता है, और इसी झूठी पात्रता के बल पर उसने प्रतिबंधित फेन्साडिल कफ सिरप (Fensedyl Cough Syrup) की भारी-भरकम खेप मंगानी शुरू कर दी।

मुख्य अभियुक्त शुभम जायसवाल ने अन्य सह-अभियोगियों के साथ मिलकर इस कफ सिरप की देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से तस्करी की और इसके जरिए अकूत काला धन अर्जित किया। कोडीन युक्त इन कफ सिरप का इस्तेमाल अक्सर नशे के विकल्प के रूप में अवैध रूप से किया जाता है, जो युवाओं की सेहत के लिए बेहद घातक है।

गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई

रोहनिया पुलिस टीम ने पुख्ता सबूत मिलने के बाद 04 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:40 बजे आरोपी विकास सिंह को उसके गृह क्षेत्र यानी कायस्थ टोला, प्रहलाद घाट, थाना आदमपुर से ही गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे थाने लाकर आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी की गई और अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है। विवेचना के दौरान जिन लोगों के नाम सामने आएंगे, उनके खिलाफ भी कानून का शिकंजा कसने में कोई ढील नहीं बरती जाएगी। वाराणसी पुलिस का यह अभियान स्पष्ट संदेश देता है कि नशे के इस अवैध कारोबार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसकी उम्र या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो।

कानून के कड़े प्रावधान और समाज के लिए संदेश

  • एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act): नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार से जुड़े मामलों में एनडीपीएस अधिनियम की धाराएं बेहद गंभीर होती हैं, जिसमें आसानी से जमानत मिलना मुश्किल होता है।
  • बीएनएस की नई धाराएं: धोखाधड़ी, दस्तावेजों से छेड़छाड़ और आपराधिक षड्यंत्र के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की नई धाराओं का उपयोग यह सुनिश्चित करता है कि अपराधियों को उनके कृत्यों की सख्त सजा मिले।
  • सतर्कता: यह मामला फार्मास्युटिकल सेक्टर से जुड़े व्यापारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे अपने लेटर पैड और दस्तावेजों का दुरुपयोग न होने दें, अन्यथा वे भी कानून के कटघरे में खड़े किए जा सकते हैं।

आने वाले दिनों में पुलिस इस मामले में और भी कई बड़े खुलासे कर सकती है क्योंकि कफ सिरप की तस्करी के इस अंतर-राज्यीय नेटवर्क की जड़ें काफी गहरी हैं, जिनकी तह तक जाने के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही हैं।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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