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अमृतसर में अमरूद के बाग से ड्रोन वाली हेरोइन और खतरनाक हथियार बरामद

अमृतसर में अमरूद के बाग से ड्रोन वाली हेरोइन और खतरनाक हथियार बरामद

अमृतसर के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे हैरान करने वाले नशा तस्करी के नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसके तौर-तरीके सुनकर हर कोई अछंभे में है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के इशारे पर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास अटारी सेक्टर के एक घने अमरूद के बाग को ड्रग्स और हथियारों के डंपिंग ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड इतना शातिर था कि उसने शक की सुई से बचने के लिए बेहद अनोखा तरीका निकाला था, लेकिन आखिरकार कानून के लंबे हाथों ने इस खतरनाक गिरोह को दबोच ही लिया।

अमरूद के बाग की आड़ में चल रहा था खौफनाक कारोबार

सीमाई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को धेंगा दिखाते हुए तस्कर नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं। ताजा मामला अमृतसर के घरिंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बराड़ी गांव का है। यहाँ स्थित एक बड़े और घने अमरूद के बाग में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए हेरोइन और अत्याधुनिक हथियारों की खेप गिराई जा रही थी। इस खेल को अंजाम देने के लिए मुख्य आरोपी संदीप सिंह ने बड़ी चालाकी से इस साल इसी अमरूद के बाग के मेंटेनेंस और लेबर का ठेका ले लिया था। बाग का ठेकेदार होने के कारण वहाँ किसी भी बाहरी व्यक्ति का आना-जाना असामान्य नहीं लगता था, जिसका पूरा फायदा यह गिरोह उठा रहा था।

पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा करते हुए पुलिस लाइन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। इसमें बताया गया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक, हथियार और ड्रग्स बरामद हुए हैं। पुलिस ने जिन सामानों को जब्त किया है उनमें:

  • एक अत्याधुनिक एके-56 (AK-56) असॉल्ट राइफल
  • एक एके-47 (AK-47) राइफल
  • चार मैगजीन और 10 जिंदा कारतूस
  • 10 किलोग्राम उच्च क्वालिटी की हेरोइन

परिवार ही बन गया था जुर्म का सिंडिकेट

इस तस्करी के सिंडिकेट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें कोई बाहरी या पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि पूरा परिवार ही शामिल था। मास्टरमाइंड संदीप सिंह ने अपने ही घर के सदस्यों को इस गैरकानूनी धंधे में झोंक रखा था। पुलिस ने इस कार्रवाई में मुख्य आरोपी संदीप सिंह के अलावा उसकी पत्नी कमलजीत कौर और उसके भाई बिक्रमजीत सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया है।

जांच में यह बात सामने आई है कि संदीप सिंह की आपराधिक पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। साल 2022 में उसे आर्म्स एक्ट (असलहा अधिनियम) के तहत गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। जेल की सलाखों के पीछे ही उसके तार पाकिस्तानी तस्करों और सरहद पार बैठे आईएसआई के आकाओं से जुड़े थे। जेल से छूटने के बाद भी उसकी गतिविधियों में सुधार नहीं आया और वह लगातार राष्ट्रविरोधी ताकतों के संपर्क में बना रहा। साल 2025 में उसके खिलाफ चोरी का मामला भी दर्ज किया गया था, और हाल ही में अगस्त तथा सितंबर के महीनों में घरिंडा और लोपोके थानों में 5-5 किलो हेरोइन बरामदगी के मामले दर्ज हो चुके हैं।

ड्रोन से होती थी डिलीवरी, एक्टिवा से होती थी सप्लाई

तस्करी का यह तरीका तकनीकी रूप से काफी उन्नत था। रात के अंधेरे में पाकिस्तानी तस्कर सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियारों और हेरोइन के पैकेट अमरूद के उस घने बाग में गिराते थे। जीपीएस और आधुनिक तकनीकों से लैस इन ड्रोन्स की सटीक लैंडिंग उसी बाग में होती थी जिसका ठेका संदीप ने ले रखा था।

खेप जमीन पर गिरते ही संदीप और उसकी पत्नी कमलजीत कौर बेहद शातिर तरीके से उस कन्साइनमेंट को उठा लेते थे। किसी को शक न हो इसलिए यह दंपत्ति कभी कार तो कभी साधारण सी एक्टिवा पर सवार होकर हेरोइन और हथियारों की खेप को ठिकाने लगाने का काम करते थे। एक गृहिणी की तरह दिखने वाली कमलजीत कौर अपनी एक्टिवा पर ड्रग्स और हथियार रखकर आसानी से पुलिस की नजरों से बचकर निकल जाती थी। किसी को यह अंदाजा तक नहीं था कि जिस अमरूद के बाग में किसान खून-पसीना बहा रहे हैं, वहाँ से देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा किया जा रहा है।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता

खुफिया इनपुट और सतर्कता के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाकर इस पति-पत्नी और भाई के इस नापाक गठबंधन को धर दबोचा। पुलिस अब इन सभी आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच करवा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके संपर्क सूची में और कौन-कौन से स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय चेहरे शामिल हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की वारदातों का सामने आना यह बताता है कि किस प्रकार दुश्मन देश भारत को अशांत करने के लिए नए-नए और छिपे हुए रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, हमारे सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी के कारण इस बड़े मॉड्यूल का समय रहते भंडाफोड़ हो गया, जिससे एक बड़ी साजिश नाकाम हो गई है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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