पुणे की सड़कों पर इस समय महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के अभ्यर्थियों का जो जनसैलाब उमड़ा है, उसने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की चूलें हिलाकर रख दी हैं। पिछले कई दिनों से पुणे के प्रमुख इलाकों में अपनी मांगों को लेकर डटे हजारों परीक्षार्थियों का हौसला तब सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे सीधे आंदोलन स्थल पर पहुंचे। पारंपरिक राजनीतिक भाषणबाजी से दूर, राज ठाकरे ने सीधे छात्रों के बीच बैठकर उनकी पीड़ा को सुना और सरकार पर अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में तीखा हमला बोला।
भाषण देने नहीं, छात्रों के गुस्से में शामिल होने आया हूं
आंदोलनकारी युवाओं की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि वह यहां कोई चुनावी या पारंपरिक राजनीतिक भाषण देने के लिए नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि वह छात्रों के उस भीषण आक्रोश का हिस्सा बनने आए हैं, जो सालों से चल रही प्रशासनिक अनदेखी और लगातार मिल रहे धोखे की वजह से पैदा हुआ है। एक युवा जब सालों तक दिन-रात एक करके पढ़ाई करता है, और उसके बाद परीक्षा की तारीखों का टलना, पेपर लीक होना या फिर नतीजों का अदालती पचड़ों में फंस जाना आम बात बन जाए, तो उसका गुस्सा फूटना लाजिमी है।
मनसे प्रमुख ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रशासनिक तंत्र की इस लापरवाही ने महाराष्ट्र के युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। उन्होंने कहा कि छात्र लंबे समय से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सिस्टम के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

'मराठी युवाओं के लिए किसी के भी पैर पकड़ने को तैयार'
महाराष्ट्र के स्थानीय युवाओं के रोजगार और भविष्य को लेकर राज ठाकरे ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने पूरे जोश के साथ ऐलान किया कि यदि महाराष्ट्र के मराठी लड़के-लड़कियों को उनका हक और नौकरियां दिलाने के लिए उन्हें किसी के भी सामने झुकना पड़े या पैर पकड़ने पड़ें, तो वह इसके लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा, "मेरे राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। रोजगार पर पहला अधिकार यहीं के स्थानीय युवाओं का है और इसके लिए मैं किसी भी हद तक जाने को तैयार हूं।"
'आपके यहां पेपर लीक, हमारे यहां वोट!' - सरकार पर करारा तंज
मौजूदा राजनीतिक और चुनावी व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए राज ठाकरे ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा तंज कसा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि आज देश और प्रदेश में एक अजीब सी बेधुंदशाही का माहौल बना हुआ है।
"आपके यहां परीक्षा के पेपर लीक होते हैं, और हमारे यहां जनता के दिए हुए वोट लीक होते हैं!"
उन्होंने छात्रों का आह्वान करते हुए कहा कि उनका यह विरोध प्रदर्शन केवल एक या दो दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब तक पूरी प्रशासनिक व्यवस्था में आमूल-चूल सुधार नहीं हो जाता, तब तक यह असंतोष और आक्रोश इसी तरह धंसता रहना चाहिए ताकि सिस्टम नींद से जागे।
जाति-पाति की राजनीति से दूर रहने की दी सलाह
आंदोलन को भटकाने की साजिशों पर बात करते हुए राज ठाकरे ने प्रतियोगी छात्रों को बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी कीमत पर जाति-पाति की राजनीति का शिकार न बनें। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल जानबूझकर युवाओं को जातियों और उपजातियों में बांटने का काम करते हैं, ताकि जनता का ध्यान बेरोजगारी, शिक्षा और बुनियादी विकास जैसे असली मुद्दों से भटकाया जा सके।
लगभग 70 हजार पदों पर भर्ती की मांग को लेकर उन्होंने एक कड़वी सच्चाई भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियां लगातार निजीकरण (Privatization) की तरफ बढ़ रही हैं। ऐसी स्थिति में चाहे कोई भी सरकार सत्ता में आ जाए, निजीकरण के बढ़ते कदमों के कारण सरकारी नौकरियों का रास्ता आसान नहीं होगा। इसके बावजूद, राज्य के संसाधनों पर सबसे पहला हक यहीं के युवाओं का होना चाहिए।
रोहित पवार ने जताया आभार
इस आंदोलन में केवल मनसे प्रमुख ही नहीं, बल्कि विपक्ष के अन्य नेता भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। एनसीपी (शरद पवार गुट) के युवा विधायक रोहित पवार पिछले कई दिनों से लगातार इन छात्रों के साथ आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं। राज ठाकरे के समर्थन में उतरने के बाद रोहित पवार ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनका व्यक्तिगत रूप से आभार व्यक्त किया।
रोहित पवार ने कहा कि राज ठाकरे के इस तरह सीधे मैदान में आकर समर्थन देने से संघर्षरत युवाओं के मनोबल को अभूतपूर्व मजबूती मिली है। अब देखना यह होगा कि इस राजनीतिक एकजुटता और छात्रों के इस जनसैलाब के आगे सरकार की नींद कब टूटती है और इन बेरोजगार युवाओं को उनकी मेहनत का न्याय कब मिलता है।

