जोधपुर में स्थित राजस्थान हाईकोर्ट के भव्य और अत्याधुनिक नए भवन के निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार और घपले के मामले में अब शिकंजा कसता जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान घटिया सामग्री के इस्तेमाल के गंभीर आरोपों के बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (RSRDC) के तीन प्रमुख अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर देश की न्यायपालिका से जुड़े एक अहम बुनियादी ढांचे से जुड़ा हुआ है।
आरएसआरडीसी के इन बड़े चेहरों पर गिरा गाज
बुधवार को हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के तहत पुलिस ने जिन तीन बड़े अधिकारियों को दबोचा है, उनमें RSRDC के प्रोजेक्ट डायरेक्टर (PD) सुरेश शर्मा, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अजीत कुमार सांघी और विद्युत प्रोजेक्ट डायरेक्टर शिवहरे माहौर शामिल हैं। पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) कमल शेखावत ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि हाईकोर्ट भवन के निर्माण कार्य में निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री के उपयोग को लेकर पूर्व में ही प्रकरण दर्ज किया गया था।
इन गिरफ्तारियों के साथ ही मामले की जांच में एक नया मोड़ आ गया है। जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि आखिर करोड़ों रुपये के इस मेगा प्रोजेक्ट में नियमों को ताक पर रखकर घटिया सामग्री का इस्तेमाल कैसे और किसके इशारे पर किया गया।
अब तक कितने आरोपी चढ़ चुके हैं हत्थे?
जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे गिरफ्तारियों का सिलसिला भी तेज होता जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की जांच के दौरान अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल ही में पांच आरोपियों का पुलिस रिमांड पूरा होने पर उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) में जेल भेज दिया गया है। वहीं, अन्य तीन आरोपी अभी भी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सिर्फ निर्माण सामग्री ही नहीं, बल्कि दस्तावेजों और तकनीकी रिपोर्ट (Technical Reports) की भी बारीकी से जांच की जा रही है। इसके अलावा, निर्माण कार्य में बरती गई भारी लापरवाही के कारण सरकारी राजकोष (Public Exchequer) को हुए संभावित नुकसान का भी सटीक आकलन किया जा रहा है ताकि वित्तीय अनियमितताओं के हर एक पहलू को उजागर किया जा सके।
220 करोड़ की लागत और फिर भी गुणवत्ता पर सवाल
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब झालामंड स्थित राजस्थान हाईकोर्ट के इस नए और विशाल भवन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस शानदार इमारत का निर्माण कार्य RSRDC की देखरेख में वर्ष 2008 में शुरू किया गया था। लगभग 11 लंबी और सुस्त निर्माण अवधियों को पार करते हुए दिसंबर 2019 में यह प्रोजेक्ट आखिरकार पूरा हुआ था।
इस मेगा प्रोजेक्ट पर सरकारी खजाने से लगभग 220 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद भवन की गुणवत्ता और उसके रखरखाव पर लगातार सवाल उठते रहे। स्थिति यह है कि इस इमारत के रखरखाव के लिए हर साल लगभग 2 करोड़ 20 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया जाता है, फिर भी निर्माण कार्यों में इस तरह की खामियां मिलना व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
कैसे खुला भ्रष्टाचार का यह पूरा राज?
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब करीब दो साल पहले कोर्ट ऑफिसर सेल के एक कर्मचारी शरद जोशी ने इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। अपनी शिकायत में उन्होंने भवन निर्माण की बेहद घटिया गुणवत्ता और इसके रखरखाव में बरती जा रही अनियमितताओं के गंभीर बिंदु उठाए थे। शिकायत के सामने आने के बाद पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों ने मामले की फाइल खोली और तह तक जाने का फैसला किया।
शिकायत दर्ज होने के बाद से ही जांच का दायरा लगातार विस्तृत किया जा रहा है। पुलिस केवल बड़े अधिकारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण कार्य से जुड़े ज़मीनी स्तर के श्रमिकों (Workers) और इलेक्ट्रीशियन से भी लगातार जानकारियां जुटाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि अब तक इस मामले में 50 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है।
आगे क्या हो सकता है?
- तकनीकी ऑडिट: इमारत के स्ट्रक्चरल ऑडिट के जरिए यह जांचा जा रहा है कि क्या यह भवन भविष्य में सुरक्षित है या नहीं।
- वित्तीय जांच: दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया में किस तरह की धांधली हुई थी।
- और गिरफ्तारियां संभव: पुलिस सूत्रों के संकेत के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम इस जांच के घेरे में आ सकते हैं।
न्यायपालिका के मंदिर जैसी इस इमारत के निर्माण में हुआ यह कथित भ्रष्टाचार अब राज्य का एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है। आम जनता से लेकर कानूनी जानकारों तक की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में संलिप्त सभी चेहरों को कड़ी सजा मिल पाएगी या नहीं।