वाराणसी के सर्किट हाउस में हाल ही में एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल ने समाजवादी पार्टी पर तीखा जुबानी हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सनातन परंपराओं और पवित्र गेरुआ वस्त्र का अपमान करने का प्रयास करने वालों को जनता आने वाले समय में कड़ा जवाब देगी। मंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है और दोनों दलों के बीच तनातनी बढ़ती दिख रही है।
गेरुआ वस्त्र और सनातन संस्कृति पर बड़ा बयान
मंत्री रविंद्र जायसवाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान जोर देकर कहा कि सनातन समाज में गेरुआ वस्त्र श्रद्धा, आस्था और अगाध सम्मान का प्रतीक माना जाता है। देश की संस्कृति में साधु-संतों और संन्यासियों के प्रति सदियों से सर्वोच्च सम्मान की भावना रही है। समाज में जब भी कोई संत या महात्मा दिखाई देते हैं, तो लोग स्वतः खड़े होकर उनका अभिवादन और प्रणाम करते हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक लाभ या वैचारिक द्वेष के कारण सनातन परंपराओं को निशाना बनाने के लिए गेरुआ वस्त्र का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कृत्यों को समाज कभी भी माफ नहीं करता है और चुनाव के दौरान जनता अपने मत के जरिए ऐसे तत्वों को करारा सबक सिखाती है। समाज की इस गहरी आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को जनता के आक्रोश का सामना करना ही पड़ेगा।
भारतीय जनता पार्टी का रुख और व्यक्तिगत जिम्मेदारी
इस पूरे विवाद के बीच, जब मंत्री से पूछा गया कि क्या इस मामले में किसी पार्टी विशेष का हाथ है, तो उन्होंने साफ किया कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से कभी भी ऐसा कोई कृत्य नहीं किया गया है। यदि समाज में किसी व्यक्ति विशेष ने इस तरह की हरकत की है, तो उसके लिए केवल वही व्यक्ति जिम्मेदार माना जाना चाहिए। किसी एक व्यक्ति के व्यक्तिगत आचरण या कृत्य को पूरी राजनीतिक पार्टी से जोड़ना न्यायसंगत नहीं है।
मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति के विचार स्वतंत्र हैं, लेकिन अपनी राजनीति चमकाने के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस तरह इस्तेमाल करना किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता।
विपक्ष की भूमिका और समाजवादी पार्टी पर पुराने आरोप
सिर्फ धार्मिक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी रविंद्र जायसवाल ने समाजवादी पार्टी के पूर्ववर्ती कार्यकाल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना बेहद आवश्यक है, लेकिन विपक्ष की मजबूती हमेशा उसके वैचारिक सिद्धांतों और जनहित के मुद्दों पर आधारित होनी चाहिए। केवल विरोध के लिए विरोध करना और सरकार के हर अच्छे काम की आलोचना करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में नहीं है।
सपा के पुराने शासनकाल को याद करते हुए उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। मंत्री ने कहा कि उस दौर में मोहल्लों के गुंडों, मवालियों और असामाजिक तत्वों को खुला राजनीतिक संरक्षण मिलने की शिकायतें आम थीं। इस तरह की तुष्टीकरण और अपराधियों को बढ़ावा देने वाली राजनीति का खामियाजा लंबे समय तक आम जनता को भुगतना पड़ा था। जनता आज भी उन दिनों को भूली नहीं है और ऐसी कार्यशैली का जवाब चुनाव में देती आई है।
कानून-व्यवस्था और विकास के मोर्चे पर सरकार का दावा
राज्य मंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और चहुंमुखी विकास के एजेंडे पर लगातार काम कर रही है। राज्य में अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है, जिससे आम जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने विपक्ष से भी अपील की कि वे नकारात्मक राजनीति छोड़कर सकारात्मक भूमिका निभाएं ताकि प्रदेश और देश का हित हो सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह बयानबाजी और अधिक तूल पकड़ सकती है, क्योंकि धार्मिक प्रतीकों और संस्कृति से जुड़े मुद्दे जनता के बीच बहुत तेजी से असर डालते हैं।