वाराणसी और जौनपुर की सीमा पर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-233 पर इन दिनों तनाव का माहौल बना हुआ है। वजह है ढेरही, बलरामगंज स्थित टोल प्लाजा, जहां से गुजरने वाले वाहन चालकों और स्थानीय किसानों का सब्र अब जवाब देता नजर आ रहा है। पूर्वांचल किसान संगठन के बैनर तले किसानों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने जिलाधिकारी को एक तीखा ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि तय सीमा के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आगामी 30 सितंबर 2026 को इस टोल प्लाजा पर विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
अधूरा हाईवे और जेब पर भारी पड़ रहा टोल
इस पूरे विवाद की जड़ वह अधूरा हाईवे है, जिसके निर्माण कार्य का दावा तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति कुछ और ही बयां करती है। किसानों का मुख्य आरोप है कि ढेरही टोल प्लाजा से महज दो किलोमीटर आगे राष्ट्रीय राजमार्ग-233 का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है। सड़क अधूरी पड़ी है, निर्माण कार्य कछुए की गति से चल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि टोल वसूलने वाली एजेंसी ने अपनी वसूली पूरी रफ्तार से शुरू कर रखी है।
नियमों के मुताबिक, जब तक हाईवे का निर्माण पूरी तरह से पूरा नहीं हो जाता और वह आवागमन के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक टोल टैक्स वसूलना पूरी तरह से अनुचित है। लेकिन इस नियम को ताक पर रखकर वाहन चालकों से धड़ल्ले से पैसे वसूले जा रहे हैं, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा डाका पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों की बढ़ी मुश्किलें
टोल प्लाजा के इस मनमाने रवैये से केवल कमर्शियल वाहन ही नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीण और रोजमर्रा का सफर करने वाले आम लोग भी बुरी तरह पिस रहे हैं। स्थिति यह है कि स्थानीय लोगों को अपने ही इलाके में रोजमर्रा के कामों जैसे थाना, बिजली विभाग, विकासखंड, तहसील, स्कूल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाने के लिए भी टोल टैक्स का भारी-भरकम बोझ उठाना पड़ रहा है।
अधूरे मार्ग और गड्ढों से भरी सड़कों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क बनाई ही नहीं गई है, तो उनसे टोल के नाम पर वसूली क्यों की जा रही है? यह स्थानीय नागरिकों के साथ खुला अन्याय है।
प्रशासन के साथ पहले भी हो चुकी हैं कई दौर की वार्ताएं
यह कोई पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे को उठाया गया हो। पूर्वांचल किसान संगठन इस समस्या को लेकर पिछले काफी समय से प्रशासनिक दरवाजों पर दस्तक दे रहा है। संगठन के रिकॉर्ड के अनुसार इस मामले को लेकर:
- 21 फरवरी 2024 को शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया था।
- 15 सितंबर 2024 को भी प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचा गया था।
- 23 मार्च 2025 को एक बार फिर पुरजोर विरोध दर्ज कराया गया था।
इन तमाम प्रदर्शनों के दौरान वाराणसी और जौनपुर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के नुमाइंदे भी मौजूद रहे थे। कई दौर की बैठकों और स्थलीय निरीक्षण के बाद भी ज़मीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं, जिससे किसानों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।
किसान नेता अजीत सिंह डोभी की दो टूक
किसान नेता अजीत सिंह डोभी ने प्रशासन को साफ शब्दों में चेताया है कि अब आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्होंने मांग की है कि जौनपुर जिले की सीमा में आने वाले करीब 16 किलोमीटर के अधूरे मार्ग का निर्माण कार्य तत्काल पूरा कराया जाए। जब तक सड़क पूरी नहीं बनती, तब तक इस मार्ग पर डंपर, ट्रक और अन्य भारी वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से 'नो एंट्री' लागू की जाए।
इसके अलावा, संगठन ने टोल प्लाजा पर वसूली के दौरान कर्मचारियों द्वारा वाहन चालकों के साथ कथित रूप से किए जाने वाले दुर्व्यवहार और विवाद की घटनाओं की भी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
बड़ी मांगें जो प्रशासन के सामने रखी गई हैं:
- अधूरे मार्ग का निर्माण: जौनपुर क्षेत्र में बचे हुए 16 किलोमीटर के हाइवे को तुरंत दुरुस्त किया जाए।
- भारी वाहनों पर रोक: सड़क निर्माण पूरा होने तक भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगे।
- पीड़ित परिवारों को मुआवजा: अधूरे मार्ग के कारण हुई सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए।
- उच्चस्तरीय जांच: टोल प्लाजा की स्थापना और अब तक की गई वसूली प्रक्रिया की पारदर्शी जांच हो।
- दोषियों पर कार्रवाई: नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों और टोल संचालन एजेंसी पर सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
- मुआवजे का भुगतान: राजमार्ग के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों के लंबित पड़े मुआवजे का तत्काल वितरण सुनिश्चित हो।
30 सितंबर को बड़े आंदोलन की तैयारी
पूर्वांचल किसान संगठन ने जिला प्रशासन को एक स्पष्ट समय-सीमा देते हुए 15 सितंबर 2026 तक इस मामले में ठोस और प्रभावी कार्रवाई करने को कहा है। संगठन ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि इस तय तारीख तक उनकी सभी जायज मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो देश के अन्नदाता एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
तय कार्यक्रम के अनुसार, यदि प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया, तो आगामी 30 सितंबर 2026 को ढेरही टोल प्लाजा पर एक बड़ा और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस चेतावनी के बाद से स्थानीय प्रशासन में भी हलचल तेज हो गई है और निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या समय रहते कोई बीच का रास्ता निकाला जाता है या फिर आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ेगा।