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रील के चक्कर में आफत: फोन की फ्रीक्वेंसी से घर पर गिरी बिजली, दो लड़कियां गंभीर

रील के चक्कर में आफत: फोन की फ्रीक्वेंसी से घर पर गिरी बिजली, दो लड़कियां गंभीर

सोशल मीडिया की चमक-धमक और उस पर वायरल होने की दीवानगी आज की युवा पीढ़ी पर इस कदर हावी हो चुकी है कि लोग अपनी जान की परवाह करना भी भूल जाते हैं। लाइक, शेयर और व्यूज बटोरने की यह होड़ कई बार कितनी खतरनाक साबित हो सकती है, इसकी एक बानगी उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले से सामने आई है। यहाँ आसमान से गिरती हुई कुदरत की आफत यानी आकाशीय बिजली को कैमरे में कैद कर रील बनाने के चक्कर में दो युवतियों को अपनी जान पर बन आई।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह दिल दहला देने वाली घटना कानपुर देहात के शिवली क्षेत्र की है। मोबाइल फोन की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्रीक्वेंसी और रेडिएशन ने ऐसा कहर बरपाया कि सीधे उनके घर पर ही आकाशीय बिजली आ गिरी। इस भयानक हादसे में दोनों लड़कियां गंभीर रूप से झुलस गई हैं, जिन्हें आनन-फानन में जिला अस्पताल से कानपुर के बड़े हैलेट हॉस्पिटल (GSVM Medical College) के लिए रेफर किया गया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इलाके में कुछ दिनों से मौसम का मिजाज काफी बदला हुआ था। काले बादलों की गर्जना और तेज चमक के साथ बारिश का माहौल बना हुआ था। इसी दौरान, दोनों युवतियां अपने घर की छत या बालकनी के पास खड़ी होकर आसमान में कड़कती और गिरती हुई आकाशीय बिजली (Lightning) का वीडियो अपने स्मार्टफोन से बना रही थीं। उनका मकसद इस रोमांचक और डरावने पल को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड कर रातों-रात पॉपुलर होना था।

लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिस तकनीक (मोबाइल फोन) के जरिए वे कुदरत के इस खौफनाक रूप को कैद कर रही हैं, वही तकनीक उनकी जान की दुश्मन बन जाएगी। जैसे ही उन्होंने वीडियो रिकॉर्डिंग और फ्लैश या नेटवर्क सिग्नल्स का इस्तेमाल किया, वातावरण में मौजूद चार्ज्ड आयन्स और मोबाइल की हाई-फ्रीक्वेंसी वेव्स ने कंडक्टर का काम किया और बिजली सीधे उनके घर पर आ टूटी।

मोबाइल फ्रीक्वेंसी और आकाशीय बिजली का वैज्ञानिक कनेक्शन

विज्ञान की दुनिया में यह बात लंबे समय से बहस का मुद्दा रही है कि क्या मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से आकाशीय बिजली आकर्षित होती है? इस घटना ने एक बार फिर इस बहस को जिंदा कर दिया है। आइए समझते हैं इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण:

  • विद्युत चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves): स्मार्टफोन हर वक्त इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगे छोड़ते और ग्रहण करते रहते हैं। जब मौसम खराब हो और आसमान में भारी मात्रा में स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी (Static Electricity) जमा हो, तो ये तरंगे एक तरह का पाथवे (मार्ग) बना सकती हैं।
  • कंडक्शन की प्रक्रिया: मोबाइल फोन के सर्किट्स और उसमें मौजूद धातुएं (Metals) बिजली के सुचालक (Conductors) की तरह काम करती हैं। विशेषकर जब खुले आसमान के नीचे मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता है, तो आस-पास के वातावरण में आयनीकरण तेज हो जाता है।
  • रील या वीडियो बनाना: जब आप कैमरा ऑन करके वीडियो शूट करते हैं और नेटवर्क लगातार एक्टिव रहता है, तो फोन का सिग्नल टॉवर के साथ कम्युनिकेट करने के लिए ज्यादा ऊर्जा खींचता है। यह स्थिति आकाशीय बिजली को अपनी ओर खींचने में उत्प्रेरक (Catalyst) का काम कर सकती है।

अस्पताल में चल रहा है इलाज, स्थिति गंभीर

हादसे के तुरंत बाद घर और आस-पास के इलाकों में चीख-पुकार मच गई। परिवार के सदस्यों ने जब तेज धमाके की आवाज सुनी और मौके पर पहुंचे, तो दोनों युवतियों को जमीन पर बेसुध और बुरी तरह झुलसा हुआ पाया। तुरंत स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें शिवली के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए कानपुर के प्रतिष्ठित हैलेट हॉस्पिटल (Lala Lajpat Rai Hospital) के बर्न यूनिट में रेफर कर दिया गया।

चिकित्सकों के अनुसार, दोनों लड़कियों का शरीर अंदरूनी और बाहरी रूप से काफी प्रभावित हुआ है। उनका इलाज युद्धस्तर पर किया जा रहा है और डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

प्रशासन और विशेषज्ञों की चेतावनी

इस दुखद और आंखें खोल देने वाली घटना के बाद जिला प्रशासन और मौसम विशेषज्ञों ने आम जनता, खासकर युवाओं के लिए एक कड़ी चेतावनी जारी की है:

"खराब मौसम, गरज-चमक और आंधी-तूफान के दौरान कभी भी खुले आसमान के नीचे या छत पर न जाएं। सोशल मीडिया के लिए वीडियो या रील बनाने की जिद आपकी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। बारिश और बिजली कड़कने के समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए।"
- स्थानीय आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ

सोशल मीडिया की अंधी दौड़ बनाम सुरक्षित जीवन

आज के दौर में हर कोई वायरल होना चाहता है। 'रिल्स' बनाने का बुखार लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। लोग खतरनाक झरनों के किनारे, चलती ट्रेनों की छतों पर, और अब गरजते बादलों के नीचे अपनी जान जोखिम में डालकर वीडियो शूट कर रहे हैं। क्या कुछ सेकंड की फुटेज और कुछ हजार व्यूज किसी की जिंदगी से ज्यादा कीमती हो सकते हैं? कानपुर देहात की यह घटना हर उस युवा के लिए एक बड़ा सबक है जो लाइक्स के चक्कर में अपनी सुरक्षा को ताक पर रख देता है।

कुदरत के आगे इंसान हमेशा से लाचार रहा है। जब आसमान में बिजली कड़कती है, तो वह अपने रास्ते में आने वाली हर उस चीज को तबाह कर सकती है जो उसे आकर्षित करे। ऐसे में तकनीक का गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल मौत को खुला बुलावा देने जैसा है। जरूरत इस बात की है कि इस तरह के हादसों से सीख ली जाए और बच्चों तथा युवाओं को जागरूक किया जाए कि सोशल मीडिया जरूरी है, लेकिन सांसें उससे कहीं ज्यादा अनमोल हैं।

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रोली सिंह

रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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