मिठाइयों की मिठास और रोजमर्रा की चाय की चुस्की जल्द ही जेब पर कम भारी पड़ने वाली है। पिछले कुछ हफ्तों से चीनी के आसमान छूते दामों से परेशान आम जनता के लिए राहत की खबर सामने आई है। बाजार में चल रहे तेजी के खेल पर अब लगाम लग चुकी है और चीनी के एक्स-मिल भाव में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, इस राहत का पूरा असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने में अभी थोड़ा वक्त और लग सकता है।
जुलाई-अगस्त की तेज उछाल और सरकारी सख्ती
बीते डेढ़ महीने पहले चीनी के बाजार में एक ऐसा भूचाल आया था जिसने आम आदमी से लेकर कारोबारियों तक की नींद उड़ा दी थी। जुलाई और अगस्त के महीनों में जो चीनी का एक्स-मिल भाव सामान्य तौर पर 44 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रहा था, वह अचानक रॉकेट की रफ्तार से बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंचा था। इस बेतहाशा तेजी ने त्योहारों से ठीक पहले लोगों की चिंता बढ़ा दी थी।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाए। बाजार में जमाखोरी रोकने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत सख्ती बरती गई। इसके साथ ही बाजार में अतिरिक्त स्टॉक को निकाला गया और नई खरीद की रफ्तार कमजोर पड़ी। इन तमाम मिली-जुली वजहों का असर यह हुआ कि जो चीनी कुछ दिन पहले तक 70 रुपये एक्स-मिल बिक रही थी, वह लुढ़ककर वापस 44 से 45 रुपये प्रति किलो के पुराने स्तर पर आ गई है।
खुदरा बाजार में अब भी क्यों बने हुए हैं ऊंचे दाम?
एक्स-मिल भाव में भारी गिरावट के बावजूद अगर आप आज बाजार में चीनी खरीदने जाएंगे, तो आपको वह अभी भी 60 से 63 रुपये प्रति किलो के आसपास ही मिलेगी। यह सवाल आम लोगों के मन में जरूर उठ रहा होगा कि जब मिल में चीनी सस्ती हो गई है, तो खुदरा दुकानों पर कीमतें क्यों नहीं घट रही हैं?
इसकी मुख्य वजह सप्लाई चेन की पारंपरिक व्यवस्था है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मिलों के भाव घटने का असर सबसे पहले थोक बाजारों पर दिखाई देता है। इसके बाद चीनी थोक कारोबारियों से होते हुए वितरकों (distributors) और फिर अंत में खुदरा दुकानदारों (retailers) तक पहुंचती है। इस पूरी प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है।
पुराने महंगे स्टॉक का पेंच
खुदरा बाजार में कीमतें तुरंत न घटने के पीछे एक और बड़ा कारण है। जब चीनी के दाम अपने चरम पर थे, तब कई कारोबारियों और दुकानदारों ने महंगे दामों पर भारी मात्रा में स्टॉक खरीद लिया था। कोई भी कारोबारी अपने उस पुराने महंगे स्टॉक को लागत से कम कीमत पर बेचने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। वे तब तक पुराना भाव ही बनाए रखते हैं, जब तक कि उनका पिछला स्टॉक पूरी तरह बिक नहीं जाता।
चीनी उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि एक्स-मिल भाव में आई इस बड़ी गिरावट का जमीनी और वास्तविक असर खुदरा बाजारों में पूरी तरह दिखने में अभी कम से कम 7 से 10 दिनों का समय और लग सकता है। जैसे ही पुराना महंगा स्टॉक खत्म होगा और नया सस्ता स्टॉक दुकानों की शेल्फ तक पहुंचेगा, उपभोक्ताओं को भी इसका पूरा लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
आम आदमी के लिए कब होगी पूरी राहत?
- एक्स-मिल भाव: 70 रुपये से घटकर वापस 44-45 रुपये प्रति किलो पर आया।
- वर्तमान खुदरा मूल्य: अभी बाजार में 60 से 63 रुपये प्रति किलो बिक रही है चीनी।
- राहत मिलने की अवधि: अगले 7 से 10 दिनों में खुदरा कीमतें गिरने की पूरी उम्मीद है।
- मुख्य वजह: सरकारी हस्तक्षेप, अतिरिक्त स्टॉक की उपलब्धता और पुरानी मांग का कम होना।
फिलहाल, बाजार के जानकारों की मानें तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आने वाले कुछ ही दिनों में खुदरा कीमतें भी नीचे आएंगी और उपभोक्ताओं को राहत की सांस मिलेगी। सरकार की पैनी नजर लगातार कमोडिटी बाजार पर बनी हुई है ताकि किसी भी तरह की कालाबाजारी या कृत्रिम कमी को रोका जा सके।