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एशियाई खेलों में रचा गया इतिहास, 'द वॉल ऑफ इंडिया' सविता बनीं सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली खिलाड़ी

एशियाई खेलों में रचा गया इतिहास, 'द वॉल ऑफ इंडिया' सविता बनीं सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली खिलाड़ी

जापान की जमीन पर भारतीय महिला हॉकी ने सोमवार को स्वर्णिम अक्षरों में एक नया अध्याय लिख दिया है। भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर और डिफेंस की असली ताकत मानी जाने वाली सविता ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करा लिया है। जापान में आयोजित हो रहे 2026 एशियाई खेलों के दौरान इंडोनेशिया के खिलाफ खेले गए पूल बी मुकाबले में उतरते ही सविता ने एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया, जिसे आने वाले कई वर्षों तक याद रखा जाएगा।

वंदना कटारिया का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा

सविता ने पूर्व भारतीय स्टार स्ट्राइकर वंदना कटारिया के 320 सीनियर अंतरराष्ट्रीय मैचों के लंबे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही वह भारतीय महिला हॉकी इतिहास में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। उज्बेकिस्तान के खिलाफ 20 सितंबर 2026 को खेले गए एशियाई खेलों के पहले मुकाबले में सविता ने वंदना के 320 मैचों के इस रिकॉर्ड की बराबरी की थी और अगले ही दिन इंडोनेशिया के खिलाफ मैदान पर उतरकर उन्होंने इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के तुरंत बाद देश भर से बधाइयों का तांता लग गया। सविता के इस अद्वितीय योगदान का सम्मान करते हुए हॉकी इंडिया ने उन्हें 10 लाख रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है।

'द वॉल ऑफ इंडिया' का दो दशकों का सफर

छत्तीस साल की उम्र में भी मैदान पर अपनी फुर्ती और गजब के फोकस से विरोधियों के छक्के छुड़ा देने वाली सविता को दुनिया प्यार से 'द वॉल ऑफ इंडिया' कहती है। पेनल्टी शूटआउट के दौरान उनका शांत चित्त और दबाव की स्थिति में बेहतरीन प्रदर्शन टीम के लिए हमेशा से संकटमोचक साबित हुआ है। साल 2009 में अपना सीनियर अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने वाली सविता ने पिछले डेढ़ दशक में भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

अपने शानदार करियर के दौरान उन्होंने तीन ओलंपिक खेलों, दो एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों के साथ-साथ कई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी और एफआईएच प्रो लीग सत्रों में भारत का झंडा बुलंद किया है। फरवरी 2025 में नीदरलैंड्स के खिलाफ एफआईएच हॉकी प्रो लीग मुकाबले में उन्होंने अपने 300 अंतरराष्ट्रीय मैच पूरे किए थे, जिसके बाद वह वंदना कटारिया के बाद 300 मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी बनी थीं। पुरुष वर्ग में दिग्गज गोलकीपर पीआर श्रीजेश के बाद वह देश की ऐसी दूसरी गोलकीपर हैं जिन्होंने इस जादुई आंकड़े को छुआ है।

पुरस्कारों और उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त

सविता का नाम केवल सबसे ज्यादा मैच खेलने के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि उनके नाम कई प्रतिष्ठित व्यक्तिगत पुरस्कार और ऐतिहासिक जीत भी दर्ज हैं:

  • एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर: साल 2020, 2021 और 2023 में तीन बार इस प्रतिष्ठित खिताब से नवाजी गईं।
  • टोक्यो ओलंपिक 2020: भारतीय टीम की उपकप्तान के रूप में टीम को ऐतिहासिक चौथे स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
  • राष्ट्रमंडल खेल 2022: बर्मिंघम में कप्तान के तौर पर भारत को कांस्य पदक जिताने में पेनल्टी शूटआउट के दौरान निर्णायक प्रदर्शन किया।
  • एफआईएच नेशंस कप 2022: भारत को पहली बार नेशंस कप का विजेता बनाया।
  • राष्ट्रीय सम्मान: खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2018 में अर्जुन पुरस्कार और 2025 में देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।

वंदना कटारिया का योगदान और विदाई

जिस खिलाड़ी का रिकॉर्ड सविता ने तोड़ा है, यानी वंदना कटारिया, उनका सफर भी भारतीय हॉकी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। वंदना और सविता दोनों ने एक ही साल यानी 2009 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखा था। वंदना ने अपने 16 साल लंबे करियर में 320 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते हुए 158 गोल दागे। अप्रैल 2025 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने वाली वंदना के नाम टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक हैट्रिक और पद्मश्री सम्मान भी दर्ज है।

सविता की जुबानी: संघर्ष से शिखर तक का सफर

इस बड़ी उपलब्धि को हासिल करने के बाद सविता ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, "मैं अपने परिवार, अपने कोच और उन सभी साथियों को धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने उस दिन से मेरा साथ दिया जब मैं एक युवा खिलाड़ी के रूप में पहला पेनल्टी कॉर्नर बचाना सीख रही थी। सच कहूं तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस मुकाम तक पहुंच पाऊंगी। जब मैंने शुरुआत की थी, तब मेरा लक्ष्य केवल टीम में जगह बनाना और परिवार को गौरवान्वित करना था।"

उन्होंने आगे कहा, "यह रिकॉर्ड सिर्फ मेरा नहीं है, बल्कि उन सभी खिलाड़ियों का है जिन्होंने मेरे साथ पसीना बहाया है और वंदना का भी, जिन्होंने एक ऐसा मानक स्थापित किया जिसने हम सभी को प्रेरित किया। मेरी सबसे बड़ी उम्मीद है कि आने वाली युवा पीढ़ी इसे देखे और विश्वास करे कि उनके लिए भी यह संभव है। जब तक शरीर अनुमति देगा, मैं देश के लिए अपना योगदान देती रहूंगी।"

दिग्गज अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष डॉ. दिलीप तिर्की ने सविता के इस मुकाम की प्रशंसा करते हुए कहा, "सविता का यह रिकॉर्ड उनके दो दशकों के अनुशासन, समर्पण और शांत नेतृत्व का जीवंत प्रमाण है। वह हमेशा से इस टीम की रीढ़ रही हैं और आज की यह उपलब्धि उनकी मेहनत का असली परिणाम है।"

हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने कहा, "हॉकी इंडिया की ओर से हम सविता को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हैं। उनका पूरा सफर हर उस युवा खिलाड़ी के लिए एक खुली किताब है, जो भारत की जर्सी पहनने का सपना देखता है।"

आगे की राह: लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 पर नजर

फिलहाल, सविता और भारतीय महिला हॉकी टीम का पूरा ध्यान एशियाई खेलों के मौजूदा अभियान पर है। आइची-नागोया 2026 एशियाई खेल सिर्फ पदकों की रेस नहीं हैं, बल्कि ये आगामी लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक खेलों के लिए सीधे क्वालीफाई करने का सबसे सुनहरा मार्ग भी प्रदान करते हैं। 'द वॉल' के रूप में मशहूर हो चुकीं सविता के अनुभव और चट्टानी इरादों के भरोसे देश को एक बार फिर पोडियम पर तिरंगा फहराने की पूरी उम्मीद है।

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गुंजा पांडेय

गुंजा पांडेय

Chief Sub Editor

गुंजा पांडेय तेज़ी से बदलती खबरों की दुनिया में अपनी पकड़ के लिए जानी जाती हैं। वे खेल और विज्ञान जैसे विषयों को न सिर्फ अपडेटेड रखती हैं, बल्कि उन...

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