भारतीय महिला क्रिकेट टीम के भीतर इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है, और इस बात की गवाही मैदान के बाहर की वे खबरें दे रही हैं जो पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। अक्टूबर 2026 के इस दौर में खेल गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने देश भर के क्रिकेट प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है। टीम की दो सबसे बड़ी और सीनियर खिलाड़ियों—हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना—के बीच सब कुछ सामान्य नहीं होने के संकेत मिले हैं। इस अंदरूनी कलह और तनाव के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए टीम की कमान में आमूल-चूल परिवर्तन किए हैं, जिसके दूरगामी परिणाम भारतीय महिला क्रिकेट पर पड़ सकते हैं।
कप्तानी से हटाए जाने का सफर और हरमनप्रीत कौर का फैसला
मंगलवार का दिन भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास के सबसे अहम दिनों में से एक रहा। सीनियर बल्लेबाज और लंबे समय तक टीम की धुरी रहीं हरमनप्रीत कौर ने अपने ऊपर बढ़ते दबाव और बोर्ड की समीक्षा बैठकों के बाद आखिरकार सभी फॉर्मेट्स की कप्तानी छोड़ने का ऐतिहासिक फैसला किया। साल 2016 में पहली बार भारतीय टीम की कप्तानी संभालने वाली 37 वर्षीय हरमनप्रीत ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और नेतृत्व क्षमता से टीम को कई मौकों पर जीत दिलाई। हाल ही में उन्होंने एशियाई खेलों में भारतीय टीम का नेतृत्व किया था और गोल्ड मेडल जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।
हालांकि, पिछले कुछ समय से उनका व्यक्तिगत फॉर्म और विशेष तौर पर T20 प्रारूप में टीम का संघर्ष चयनकर्ताओं और प्रशंसकों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया था। एक एजेंसी को मिली जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले BCCI के शीर्ष अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक हुई थी, जिसमें टीम के भविष्य और प्रदर्शन को लेकर लंबी चर्चा की गई। इसी बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि टीम को एक नई दिशा और युवा ऊर्जा की आवश्यकता है, जिसके चलते हरमनप्रीत पर कप्तानी छोड़ने का दबाव अप्रत्यक्ष रूप से बन चुका था।
स्मृति मंधाना को मिली कमान, लेकिन ड्रेसिंग रूम में पसरा सन्नाटा
हरमनप्रीत कौर के इस बड़े फैसले के तुरंत बाद, BCCI ने बिना कोई वक्त गंवाए 30 वर्षीय स्टाइलिश ओपनर स्मृति मंधाना को सभी फॉर्मेट्स (टेस्ट, वनडे और T20) के लिए भारतीय महिला टीम की नई कप्तान नियुक्त कर दिया। साल 2013 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाली मंधाना ने अपनी लाजवाब बल्लेबाजी से अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं और वह पिछले काफी समय से खुद को इस बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार भी मान रही थीं।
लेकिन इस नियुक्ति के साथ ही एक ऐसी अंदरूनी खबर बाहर आई जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। विश्वस्त सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि कप्तानी के इस पूरे घटनाक्रम और अधिकारों की खींचतान के चलते स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर के बीच आपसी तालमेल पूरी तरह बिगड़ चुका है। हालात यहां तक पहुंच गए थे कि दोनों सीनियर खिलाड़ी पिछले कुछ हफ्तों से एक-दूसरे से बात करने से भी कतरा रही थीं। ड्रेसिंग रूम में सन्नाटा और तनाव का यह माहौल टीम के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी असहज करने वाला था। मैदान पर भले ही दोनों पेशेवर रवैया दिखाने की कोशिश करती रही हों, लेकिन अंदरखाने की दूरियां अब किसी से छिपी नहीं हैं।
क्या कप्तानी की रेस ने बिगाड़े पुराने रिश्ते?
क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर के बीच कभी गहरे और अच्छे संबंध हुआ करते थे। दोनों ने भारत को कई मुश्किल मैचों से निकाला है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता और नेतृत्व परिवर्तन की मांग जोर पकड़ने लगी, वैसे-वैसे दोनों के बीच मतभेद की खाई भी चौड़ी होती गई। चयनकर्ताओं ने शुरुआत में तत्काल बदलाव करने से गुरेज किया था, क्योंकि वे टीम के संतुलन को बिगाड़ना नहीं चाहते थे। लेकिन जब टीम लगातार आईसीसी टूर्नामेंट्स के अहम मौकों पर लड़खड़ाने लगी, तो बदलाव अपरिहार्य हो गया था।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व भारतीय कप्तान मिताली राज ने भी हाल ही में एक बड़ा बयान दिया था। जब इस साल भारतीय टीम T20 वर्ल्ड कप के शुरुआती दौर से ही बाहर हो गई थी, तब मिताली ने खुलकर कहा था कि चयनकर्ताओं ने फैसला लेने में काफी देर कर दी। उनके मुताबिक, 'वनडे कप्तानी दो या तीन साल पहले ही स्मृति मंधाना को सौंप दी जानी चाहिए थी, जबकि T20 की कप्तानी किसी युवा खिलाड़ी जैसे शेफाली वर्मा के हाथों में देनी चाहिए थी।' मिताली के इस बयान ने इस बहस को और हवा दे दी थी कि भारतीय महिला क्रिकेट को आधुनिक दौर के हिसाब से बहुत पहले ही लीडरशिप शिफ्ट कर देनी चाहिए थी।
भविष्य की चुनौतियां और खिलाड़ियों की जिम्मेदारी
अब जबकि स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है, भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये दोनों सीनियर खिलाड़ी अपने व्यक्तिगत मतभेदों को पूरी तरह भुलाकर देश के हित में एक साथ काम कर पाएंगी? खेल जगत का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि हरमनप्रीत कौर अब कप्तानी के भारी-भरकम बोझ और मानसिक दबाव से पूरी तरह मुक्त हो चुकी हैं। ऐसे में, एक शुद्ध बल्लेबाज के रूप में उनका प्रदर्शन और भी ज्यादा निखर कर सामने आ सकता है, जिसकी टीम को इस समय सबसे ज्यादा जरूरत है।
दूसरी ओर, स्मृति मंधाना के कंधों पर अब पूरी टीम को एकजुट करने और तीनों प्रारूपों में भारत को दुनिया की नंबर-एक टीम बनाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी आ गई है। मंधाना की कलात्मक बल्लेबाजी और शांत स्वभाव से यह उम्मीद की जा रही है कि वह टीम में एक नई संस्कृति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेंगी।
आने वाले महीनों में भारतीय टीम को कई अहम द्विपक्षीय सीरीज और मल्टी-नेशन टूर्नामेंट्स खेलने हैं। ऐसे में, ड्रेसिंग रूम की यह खटास अगर जल्द दूर नहीं की गई, तो इसका सीधा असर टीम के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। फैंस और क्रिकेट प्रशासक यही दुआ कर रहे हैं कि दोनों खिलाड़ी अपने अहंकार और मतभेदों को पीछे छोड़कर सिर्फ और सिर्फ तिरंगे की शान और महिला क्रिकेट की तरक्की के लिए आगे आएं। आखिरकार, देश का खेल हमेशा व्यक्तिगत समीकरणों से बहुत ऊपर होता है, और यही कसौटी अब स्मृति और हरमनप्रीत दोनों के सामने सबसे बड़ी परीक्षा बनकर खड़ी है।