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अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताने वाला कप्तान अचानक कहां गायब हो गया? जानिए अब क्या कर रहा है भारत का यह धुरंधर

अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताने वाला कप्तान अचानक कहां गायब हो गया? जानिए अब क्या कर रहा है भारत का यह धुरंधर

क्रिकेट के गलियारों में अक्सर कुछ ऐसे नाम आते हैं, जिन पर भविष्य का सुपरस्टार होने का ठप्पा लग जाता है। फैंस से लेकर एक्सपर्ट्स तक, हर कोई उनकी तुलना महान खिलाड़ियों से करने लगता है। साल 2012 का अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल भला किसे याद नहीं होगा? ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उस खिताबी मुकाबले में एक युवा भारतीय कप्तान ने शतकीय पारी खेलकर देश को विश्व विजेता बनाया था। उस खिलाड़ी का नाम था- उन्मुक्त चंद।

उन्मुक्त चंद की तुलना सीधे तौर पर विराट कोहली से की जाने लगी थी, क्योंकि कोहली ने भी 2008 में अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताया था और इसके बाद उनका करियर आसमान छूने लगा। लेकिन उन्मुक्त चंद की किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आज वही खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट के नक्शे से लगभग गायब हो चुका है। आइए जानते हैं उस ऐतिहासिक जीत के बाद आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्मुक्त को देश छोड़कर दूसरे देश का रुख करना पड़ा।

साल 2012: जब उन्मुक्त के बल्ले ने लिखी थी इबारत

टाउनस्विल्ले के मैदान पर 26 अगस्त 2012 का दिन भारतीय क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल मैच में मेजबान टीम ने भारत को 226 रनों का लक्ष्य दिया था। दबाव बड़ा था, लेकिन कप्तान उन्मुक्त चंद ने कप्तानी पारी खेलते हुए नाबाद 111 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली। बाबा अपराजित के साथ उनकी साझेदारी ने भारत को दूसरी बार अंडर-19 वर्ल्ड कप का चैंपियन बना दिया।

उस समय उन्मुक्त को भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा माना जा रहा था। घरेलू क्रिकेट में दिल्ली की कमान संभालने वाले उन्मुक्त से उम्मीदें बहुत ज्यादा थीं। आईपीएल में उन्हें दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) की टीम में शामिल किया गया। ब्रेट ली जैसे खतरनाक गेंदबाज की पहली ही गेंद पर उनका चौका लगाना आज भी फैंस के जेरो में ताजा है।

कहा गए रास्ते, क्यों बंद हुए दरवाजे?

हर चमकती हुई शुरुआत का अंत सुखद हो, यह जरूरी नहीं है। उन्मुक्त चंद के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। अंडर-19 के बाद जब उनका सामना सीनियर घरेलू क्रिकेट से हुआ, तो उनका प्रदर्शन लगातार गिरता चला गया। तकनीकी कमियां उजागर होने लगीं और रन बनाने की उनकी रफ्तार धीमी पड़ गई।

दिल्ली की टीम से उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड की टीम का रुख किया, वहां भी हालात नहीं बदले। घरेलू सर्किट में लगातार मिलती असफलताओं के कारण चयनकर्ताओं के रडार से वह पूरी तरह ओझल हो गए। भारतीय टीम में जगह बनाने का उनका सपना धीरे-धीरे टूटने लगा था।

अटलांटिक पार नई शुरुआत और अमेरिका का रुख

भारतीय क्रिकेट में अपने भविष्य को अंधकार में देख उन्मुक्त चंद ने साल 2021 में एक बेहद कड़ा और साहसिक फैसला लिया। उन्होंने भारतीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया। यह फैसला उनके चाहने वालों के लिए एक बड़ा झटका था, लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर उनके लिए आगे बढ़ने का यही एकमात्र रास्ता बचा था।

भारत को अलविदा कहने के बाद उन्मुक्त ने अमेरिका का रुख किया। वर्तमान में वह अमेरिका में रहकर वहां की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) और माइनर लीग क्रिकेट में खेलते हैं। इतना ही नहीं, वह अमेरिका के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने की पात्रता भी हासिल कर चुके हैं और वहां की पिचों पर अपने बल्ले का जौहर दिखा रहे हैं।

एक अधूरा सपना लेकिन नई उम्मीद

उन्मुक्त चंद की कहानी भारतीय क्रिकेट सिस्टम की उस सच्चाई को भी बयां करती है जहां टैलेंट होने के बावजूद कॉम्पिटिशन इतना ज्यादा है कि हर किसी को दूसरा मौका नहीं मिल पाता। हालांकि, उन्मुक्त ने हार नहीं मानी। भले ही वह आज भारत की जर्सी में नहीं दिखते, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ है।

आज भी जब 2012 के उस अंडर-19 वर्ल्ड कप की चर्चा होती है, तो उन्मुक्त चंद का नाम गर्व से लिया जाता है। उनका यह सफर हमें सिखाता है कि जीवन में अगर एक दरवाजा बंद होता है, तो मेहनत और दृढ़ संकल्प से दूसरे रास्ते अपने आप खुल जाते हैं।


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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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