Breaking
► नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को खुशहाल बनाएंगे: अमित शाह ► हरदोई में डेयरी पर छापा: 38 हजार लीटर संदिग्ध दूध और रसायन बरामद, संचालक पर केस ► वाराणसी में जोरदार विस्फोट से गिरा मकान, मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका ► अमीनाबाद दवा मंडी पर एफएसडीए का बड़ा एक्शन: 14 फर्मों के लाइसेंस रद्द, 29 निलंबित ► धर्म परिवर्तन के बाद स्वतः नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ: सुप्रीम कोर्ट ► कन्नौज में छह महीने से फर्जी दरोगा बनकर रह रहा आरोपी गिरफ्तार ► अंकिता भंडारी हत्याकांड: रायपुर में कांग्रेस और महिला कांग्रेस का प्रदर्शन ► हाथरस में अवैध पटाखों के गोदाम पर पुलिस का छापा, 12 लाख का सामान जब्त और दो गिरफ्तार ► ओपी राजभर का दावा, 2027 में 2017 से भी बदतर होगी सपा की स्थिति ► आजमगढ़: सड़क जाम और पुलिस से धक्का-मुक्की मामले में 8 वांछित गिरफ्तार ► नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को खुशहाल बनाएंगे: अमित शाह ► हरदोई में डेयरी पर छापा: 38 हजार लीटर संदिग्ध दूध और रसायन बरामद, संचालक पर केस ► वाराणसी में जोरदार विस्फोट से गिरा मकान, मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका ► अमीनाबाद दवा मंडी पर एफएसडीए का बड़ा एक्शन: 14 फर्मों के लाइसेंस रद्द, 29 निलंबित ► धर्म परिवर्तन के बाद स्वतः नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ: सुप्रीम कोर्ट ► कन्नौज में छह महीने से फर्जी दरोगा बनकर रह रहा आरोपी गिरफ्तार ► अंकिता भंडारी हत्याकांड: रायपुर में कांग्रेस और महिला कांग्रेस का प्रदर्शन ► हाथरस में अवैध पटाखों के गोदाम पर पुलिस का छापा, 12 लाख का सामान जब्त और दो गिरफ्तार ► ओपी राजभर का दावा, 2027 में 2017 से भी बदतर होगी सपा की स्थिति ► आजमगढ़: सड़क जाम और पुलिस से धक्का-मुक्की मामले में 8 वांछित गिरफ्तार

एशिया कप जीत के बाद ट्रॉफी विवाद: हरमनप्रीत की टीम ने नकवी से क्यों नहीं ली ट्रॉफी, कांग्रेस नेता का तीखा तंज

एशिया कप जीत के बाद ट्रॉफी विवाद: हरमनप्रीत की टीम ने नकवी से क्यों नहीं ली ट्रॉफी, कांग्रेस नेता का तीखा तंज

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर मैदान पर अपने शानदार खेल से इतिहास रच दिया है। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम ने श्रीलंका को 72 रनों के बड़े अंतर से मात देकर रिकॉर्ड आठवीं बार एशिया कप के खिताब पर अपना कब्जा जमा लिया है। देश भर में इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया जा रहा है, लेकिन इस जीत के ठीक बाद एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने खेल जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। पिछले साल की तरह इस बार भी एशिया कप की ट्रॉफी को लेकर एक बड़ा गतिरोध देखने को मिला, जब भारतीय महिला खिलाड़ियों ने एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष के हाथों से ट्रॉफी लेने से साफ इनकार कर दिया।

पुरस्कार वितरण समारोह से दूर रहीं भारतीय खिलाड़ी

रविवार को खेले गए खिताबी मुकाबले में श्रीलंका को हराने के बाद जब पुरस्कार वितरण समारोह का समय आया, तो भारतीय महिला टीम का कोई भी खिलाड़ी मंच पर मौजूद नहीं था। एसीसी के अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी इस समारोह में मौजूद थे। पिछले साल पुरुष एशिया कप के दौरान भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था, जब भारतीय पुरुष टीम ने भी नकवी से ट्रॉफी और पदक लेने से मना कर दिया था। इस बार भी वही परंपरा दोहराई गई, जिससे खेल प्रशासकों के बीच असहज स्थिति पैदा हो गई।

सूत्रों के अनुसार, बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया द्वारा जब सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षक का पदक नंदनी शर्मा को दिया गया, उसके बाद भी भारतीय महिला टीम की खिलाड़ी मैदान पर नहीं लौटीं। दूसरी ओर, उपविजेता रही श्रीलंकाई टीम ने नियमानुसार मोहसिन नकवी से उपविजेता का चेक स्वीकार किया। श्रीलंका क्रिकेट के अंतरिम प्रमुख एरान विक्रमरत्ने ने श्रीलंकाई खिलाड़ियों और उनके सहयोगी स्टाफ को पदक प्रदान किए। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए मोहसिन नकवी ने श्रीलंका की कप्तान चामरी अटापट्टू को पुरस्कार देने के तुरंत बाद स्टेडियम छोड़ दिया। हालांकि, पिछले साल की तरह इस बार वह ट्रॉफी अपने साथ नहीं लेकर गए, बल्कि उसे एसीसी के कार्यालय में ही छोड़ दिया गया, जिसे बाद में वहीं रख दिया गया।

कांग्रेस नेता उदित राज का तीखा बयान

इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब इस पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने इस वाकये पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे एक 'भयंकर नौटंकी' करार दिया है। उन्होंने अपने एक बयान में कहा, "अरे जब पाकिस्तान की टीम आ ही गई है और खेल रहे हैं, उसके बाद यह नौटंकी कि उनके हाथ से ट्रॉफी न लें। यह बहुत ही भयंकर नौटंकी है। गुड़ खा लिया और गुलगुले से परहेज कर रहे हैं।"

उदित राज के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां खेल प्रेमियों का एक वर्ग खिलाड़ियों के इस कदम को कूटनीतिक और राष्ट्रवादी रुख मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनेता इस पर अलग-अलग राजनीतिक चश्मे से अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

ट्रॉफी विवाद का इतिहास और पृष्ठभूमि

यह कोई पहला मौका नहीं है जब भारतीय क्रिकेट टीम ने एसीसी प्रमुख के साथ मंच साझा करने से परहेज किया हो। खेल और कूटनीति के बीच का यह तनाव पिछले कुछ समय से लगातार गहराता जा रहा है। पिछले साल भी जब सूर्यकुमार यादव की अगुआई वाली भारतीय पुरुष टीम ने एशिया कप जीता था, तब भी उन्होंने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। उस वक्त भारतीय टीम ने बिना ट्रॉफी के ही मंच पर जश्न मनाया था और काफी देर तक असमंजस की स्थिति बनी रही थी।

इस बार भी महिला टीम द्वारा वही रुख अपनाए जाने से यह साफ हो गया है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और खिलाड़ियों की नीति इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट है। हालांकि, इस वजह से टूर्नामेंट के अधिकारिक प्रोटोकॉल और आयोजकों के सामने कई बार असहज स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

एसीसी कार्यालय में रखी गई ट्रॉफी

खिलाड़ियों के पुरस्कार समारोह में शामिल न होने के कारण विजेता कप्तान हरमनप्रीत कौर को मैदान पर वह प्रतिष्ठित ट्रॉफी नहीं सौंपी जा सकी, जिसके लिए उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में इतनी कड़ी मेहनत की थी। नियमों के अनुसार विजेता टीम को मिलने वाली वह एशिया कप ट्रॉफी अंततः एसीसी के कार्यालय में ही सुरक्षित रखवा दी गई। भारतीय टीम ने भले ही बिना ट्रॉफी के मैदान पर अपना जश्न मनाया हो, लेकिन उनकी इस ऐतिहासिक जीत की चमक इस विवाद के आगे फीकी नहीं पड़ी है।

देशभर के क्रिकेट प्रशंसक महिला टीम के इस प्रदर्शन पर गर्व महसूस कर रहे हैं, लेकिन खेल और राजनीति के इस नए चौराहे पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि इस गतिरोध पर क्रिकेट बोर्ड और एसीसी की तरफ से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है, क्योंकि इस तरह के वाकये अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर हमेशा एक बड़ी बहस का विषय बन जाते हैं।

About the Author

गुंजा पांडेय

गुंजा पांडेय

Chief Sub Editor

गुंजा पांडेय तेज़ी से बदलती खबरों की दुनिया में अपनी पकड़ के लिए जानी जाती हैं। वे खेल और विज्ञान जैसे विषयों को न सिर्फ अपडेटेड रखती हैं, बल्कि उन...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →