तेलंगाना की राजनीति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान एक बड़ा और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। राजधानी हैदराबाद के चिक्कड़पल्ली पुलिस थाने में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक बूथ लेवल एजेंट (BLA) के खिलाफ पहली बार औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक ही समुदाय के 30 लोगों के नाम मतदाता सूची से अवैध तरीके से हटाने के लिए कथित तौर पर फर्जी फॉर्म-7 दाखिल किए गए थे।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ खुलासा?
यह कानूनी कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया समाप्त होने वाली थी। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मुशीराबाद के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) टी. प्रवीण कुमार रेड्डी ने इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
प्राथमिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि बीजेपी के बीएलए एस. बालचंद्र द्वारा जमा किए गए फॉर्म-7 पूरी तरह से पहले से मुद्रित (Pre-printed) थे। इन फॉर्म्स पर संबंधित मतदाताओं के नाम पहले से ही छपे हुए थे। विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि ये फॉर्म किसी स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि सीधे पार्टी कार्यालय से 'सेंट्रली जनरेट' किए गए थे, जिससे एक बड़े सुनियोजित षड्यंत्र की ओर इशारा होता है।
मुशीराबाद के अलावा अन्य इलाकों में भी मिले ऐसे मामले
अधिकारियों के अनुसार, केवल मुशीराबाद ही नहीं, बल्कि हैदराबाद के बहादुरपुरा और गोशामहल जैसे अन्य विधानसभा क्षेत्रों से भी इसी तरह की पूर्व-मुद्रित (Pre-printed) मतदाता जानकारी वाले फॉर्म मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है।
बीएलए की अजीब हरकत और बीएलओ का इनकार
एफआईआर में दर्ज विवरण के अनुसार, आरोपी बीजेपी बीएलए एस. बालचंद्र 28 सितंबर 2026 को पोलिंग स्टेशन संख्या 210 पर पहुंचे थे। वह अपने साथ 30 ऐसे 'प्री-प्रिंटेड' फॉर्म-7 लेकर आए थे, जिन्हें उन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए तैयार किया गया था जिनका उस एजेंट से कोई सीधा संबंध नहीं था। इनमें से एक नाम कांग्रेस पार्टी के बीएलए का भी शामिल है।
जब बीएलए ने इन फॉर्म्स को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और बीएलओ सुपरवाइजर को सौंपने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने तुरंत आपत्ति जताई और इसे लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके बावजूद जब बीएलए ने दबाव बनाने की कोशिश की और अधिकारी अपनी बात पर अडिग रहे, तो वह उन फॉर्म्स को बीएलओ के परिसर में ही छोड़कर मौके से फरार हो गया।
मैदानी सत्यापन (Field Verification) में क्या निकला?
शिकायत मिलने के बाद चुनाव अधिकारियों ने 1 अक्टूबर 2026 को एक व्यक्तिगत मैदानी सत्यापन (Personal Field Verification) कराया। इस जांच में यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो गई कि बीएलए द्वारा चिन्हित किए गए सभी 30 लोग हैदराबाद के मुशीराबाद के ही वैध और स्थाई निवासी हैं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर में यह दर्ज किया गया कि चूंकि सभी मतदाता अपनी जगह पर सही पाए गए हैं, इसलिए ये फॉर्म-7 कानूनी रूप से पूरी तरह अमान्य हैं और इन्हें तत्काल प्रभाव से खारिज किया जाना अनिवार्य है।
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने आरोपी बीजेपी बीएलए एस. बालचंद्र के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 217 और 318(2) के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं मुख्य रूप से सरकारी अधिकारी को गलत या झूठी जानकारी देने और धोखाधड़ी (Cheating) करने से संबंधित हैं। इसके अलावा, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 (Representation of the People Act) की धारा 31 के तहत भी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक पारा काफी चढ़ गया है। तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) सी. सुदर्शन रेड्डी ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) को एक सख्त मेमो जारी किया है। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि फर्जी फॉर्म-7 दाखिल करने वालों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, क्योंकि ऐसे कई मामले पहले ही प्रशासन के संज्ञान में आ चुके हैं।
दूसरी ओर, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दावा किया कि गोशामहल निर्वाचन क्षेत्र में भी मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए इसी तरह के झूठे और फर्जी फॉर्म-7 जमा किए गए थे। ओवैसी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि इस तरह की नफरत फैलाने वाले और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
इन तमाम गंभीर आरोपों का जवाब देते हुए तेलंगाना बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने पार्टी पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने उल्टा कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ जनता को गुमराह करने का काम कर रही है और राजनीतिक लाभ के लिए माहौल खराब कर रही है।
तेलंगाना में मतदाता सूची का पुनरीक्षण: एक नजर
आपको बता दें कि जब 15 जून को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब तेलंगाना में कुल 3.39 करोड़ मतदाता दर्ज थे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के वक्त करीब 73.39 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए और लगभग 92 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए। इस पूरी कवायद के बाद अंतिम मतदाता सूची (Final Electoral Roll) का प्रकाशन आगामी 9 नवंबर 2026 को किया जाना है, जिससे पहले इस तरह की गड़बड़ियों का सामने आना चुनावीगर्मी को और अधिक बढ़ा रहा है।