उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी और बेहद अहम खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा संचालित की जा रही बहुप्रतीक्षित यूपी दरोगा भर्ती-2025 की चयन प्रक्रिया पर फिलहाल कानूनी बादलों ने डेरा डाल दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांटे जाने पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अब सभी की निगाहें आगामी नौ अक्टूबर पर टिकी हैं, जिस दिन इस पूरे विवाद पर अंतिम सुनवाई होनी है।
चार शिफ्टों की परीक्षा और उत्तर कुंजी पर उठे सवाल
यह पूरा विवाद परीक्षा के दौरान सामने आई उत्तर कुंजी (Answer Key) और उसमें किए गए बदलावों से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, इस भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन निर्धारित तिथियों पर चार अलग-अलग शिफ्टों में किया गया था। परीक्षा संपन्न होने के बाद जब प्रारंभिक आंसर-की जारी की गई, तो तमाम अभ्यर्थियों ने उस पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
नियमों के तहत बोर्ड द्वारा आपत्तियों का निस्तारण किया गया, लेकिन विवाद तब गहरा गया जब फाइनल आंसर-की में कई प्रश्नों के उत्तर बदले हुए पाए गए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिन प्रश्नों के उत्तर बदले गए, वे या तो गलत थे या फिर उनके संबंध में पारदर्शिता नहीं बरती गई। इसी मनमानी और गड़बड़ी के आरोपों को आधार बनाते हुए कुछ असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलीलें और कोर्ट का रुख
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने जोरदार तरीके से यह मुद्दा उठाया कि परीक्षा बोर्ड द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में कई विसंगतियां थीं। दलील दी गई कि:
- परीक्षा के दौरान पूछे गए कई तकनीकी और सामान्य ज्ञान के सवालों के उत्तरों में बिना ठोस आधार के फेरबदल किया गया।
- आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है।
- अंतिम उत्तर कुंजी में किए गए बदलावों से कई योग्य अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर हो गए हैं, जबकि कम अंक वाले या गलत उत्तरों के सहारे अन्य उम्मीदवारों को लाभ मिला है।
न्यायालय ने इन सभी पहलुओं और तर्कों को गंभीरता से लेते हुए फिलहाल भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने यानी चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है।
9 अक्टूबर को तय होगी भर्ती की अगली दिशा
हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद भर्ती बोर्ड और चयनित अभ्यर्थियों दोनों की सांसे अटक गई हैं। मामले की अगली और महत्वपूर्ण अंतिम सुनवाई अब नौ अक्टूबर को तय की गई है। इस दिन अदालत आंसर-की के विवाद, बोर्ड द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और पूरी परीक्षा प्रक्रिया के दस्तावेजों की गहन समीक्षा करेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नौ अक्टूबर को अदालत का जो भी निर्णय आएगा, वह इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की तस्वीर साफ कर देगा। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं की दलीलों से संतुष्ट होती है, तो उत्तर कुंजी में एक बार फिर बदलाव या मूल्यांकन के नए निर्देश दिए जा सकते हैं। वहीं, यदि बोर्ड के तर्क मजबूत साबित होते हैं, तो रोक हटा ली जाएगी और नियुक्ति पत्र वितरण का रास्ता साफ हो जाएगा.
चयनित अभ्यर्थियों की बढ़ी मुश्किलें और बेचैनी
इस फैसले ने उन युवाओं के माथे पर शिकन ला दी है, जिन्होंने कड़ी मेहनत के बाद इस परीक्षा में सफलता हासिल की थी और अपने हाथों में नियुक्ति पत्र आने का इंतजार कर रहे थे। एक तरफ जहां वे युवा हैं जो इस रोक से निराश हैं, वहीं दूसरी तरफ वे अभ्यर्थी भी हैं जो न्याय की उम्मीद में अदालत की शरण में गए थे।
फिलहाल, अक्टूबर महीने की यह तारीख उत्तर प्रदेश की पुलिस भर्ती व्यवस्था और हजारों परिवारों के भविष्य के लिहाज से बहुत अहम होने वाली है। हर कोई यही जानना चाहता है कि क्या नौ अक्टूबर को कानूनी अड़चनें दूर हो जाएंगी या फिर यह मामला और अधिक लंबा खिंचेगा। सटीक और ताजा अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें, क्योंकि हम इस मामले की हर बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।