हरियाणा के हिसार जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। जिले के नारनौंद उपमंडल के अंतर्गत आने वाले राजथल गांव में संदिग्ध लंपी वायरस (Lumpy Skin Disease) के संक्रमण ने विकराल रूप धारण करना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को एक और बीमार गाय ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद इस रहस्यमयी और घातक बीमारी से जान गंवाने वाले गोवंश की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इस लगातार होती मौतों के कारण ग्रामीण इलाकों और खासकर पशुपालकों के बीच गहरी चिंता और दहशत का माहौल पैदा हो गया है।
राजथल गांव में थम नहीं रहा मौतों का सिलसिला
स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, राजथल गांव में पिछले कुछ दिनों से मवेशियों के बीमार पड़ने का सिलसिला चल रहा था। शुक्रवार को जिस गाय ने दम توड़ा, वह पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से अस्वस्थ थी। हालांकि, पशुपालकों के अनुसार इस गाय को पहले ही लंपी से बचाव का टीका भी लगवाया जा चुका था, जिसके बाद भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
इस ताजा मौत से पहले गांव के ही शक्ति सिंह, शीलू मान, बिल्लू और हरपाल सैनी के पशुओं के अलावा एक बेसहारा गाय की भी जान जा चुकी है। इस तरह कुल पांच मवेशियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। कई अन्य गायें भी इस बीमारी की चपेट में बताई जा रही हैं, जिससे किसानों और पशुपालकों की नींद उड़ी हुई है।
पशुपालन विभाग हुआ सतर्क, हिसार भेजी गई रिपोर्ट
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पशुपालन विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए निगरानी और टीकाकरण अभियान को बेहद तेज कर दिया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पशु रोग निदान प्रयोगशाला, हिसार से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम ने तुरंत राजथल गांव का दौरा किया।
विशेषज्ञों की टीम ने मौके पर पहुंचकर संदिग्ध लक्षणों वाले गोवंश की गहन स्वास्थ्य जांच की। इसके साथ ही, बीमारी के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए पशुओं के ब्लड और स्किन सैंपल लेकर जांच हेतु हिसार प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि जब तक प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर बाहर नहीं आ जाती, तब तक बीमारी के वास्तविक स्वरूप या प्रकार के बारे में कुछ भी पुख्ता तौर पर कहना जल्दबाजी होगी।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा, लगाया गया मेडिकल कैंप
स्थिति की नजाकत को भांपते हुए पशु चिकित्सक डॉ. अमित शर्मा और डॉ. विनय ने तुरंत गांव में ही एक विशेष पशु चिकित्सा एवं जांच शिविर का आयोजन किया। इस कैंप के माध्यम से डॉक्टरों ने गांव के घर-घर जाकर बीमार पशुओं की जांच की और उन्हें आवश्यक दवाइयां वितरित कीं।
चिकित्सकों ने पशुपालकों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने मवेशियों की सेहत को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। शिविर के दौरान पशुओं की उचित देखभाल, साफ-सफाई और बीमारी से बचाव के तमाम व्यावहारिक उपाय विस्तार से समझाए गए।
क्या हैं लंपी वायरस के मुख्य लक्षण?
पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस समय पूरा महकमा हाई अलर्ट मोड पर काम कर रहा है। संदिग्ध मामलों की पहचान से लेकर उनका आइसोलेशन और त्वरित उपचार प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। डॉक्टरों ने पशुपालकों को आगाह किया है कि वे नीचे दिए गए लक्षणों पर कड़ी नजर रखें:
- त्वचा पर गांठें या चकत्ते: शरीर पर जगह-जगह कठोर और उभरी हुई गांठें बन जाना।
- तेज बुखार: मवेशी का सुस्त हो जाना और शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाना।
- सुस्ती और कमजोरी: पशु का उठने-बैठने में असमर्थ होना और हमेशा थका हुआ दिखना।
- भूख में भारी कमी: चारा खाना बिल्कुल बंद कर देना या बहुत कम खाना।
- अतिरिक्त स्राव: आंखों या नाक से पानी या कीचड़ जैसा पदार्थ निकलना।
यदि इनमें से कोई भी लक्षण किसी भी गोवंश में दिखाई देता है, तो बिना एक पल गंवाए तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
पशुपालकों के लिए जरूरी सावधानियां
मौजूदा हालात को देखते हुए प्रशासन और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने किसानों और पशुपालकों के लिए कुछ अहम निर्देश जारी किए हैं:
- अलग रखें (Isolation): यदि किसी भी पशु में संदिग्ध लक्षण दिखते हैं, तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं के झुंड से पूरी तरह अलग (आइसोलेट) कर दें।
- अलग चारा-पानी: बीमार पशु के खाने के बर्तन, नाद और पीने के पानी के स्रोत को बिल्कुल अलग रखें ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम हो सके।
- मक्खी-मच्छर नियंत्रण: चूंकि यह बीमारी मुख्य रूप से कीटों (मक्खी, मच्छर, पिससू) के काटने से फैलती है, इसलिए बाड़े में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
- घबराएं नहीं, तुरंत सूचना दें: किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और लक्षण दिखते ही सरकारी पशु चिकित्सा विभाग को इसकी सूचना दें।
फिलहाल, हिसार के राजथल गांव में पशुपालन विभाग की विशेष टीमें तैनात हैं और लगातार हर एक गोवंश के स्वास्थ्य पर पैनी नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन के समय रहते सख्त कदम उठाने से इस खतरनाक बीमारी के प्रसार को रोका जा सकेगा और बाकी मवेशियों की जान बचाई जा सकेगी।