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यूपी को मिलने जा रहा 700 किमी लंबा सुपर हाईवे, इन 19 जिलों की बदलेगी किस्मत

यूपी को मिलने जा रहा 700 किमी लंबा सुपर हाईवे, इन 19 जिलों की बदलेगी किस्मत

क्या आपने कभी सोचा है कि उत्तर प्रदेश के एक कोने से दूसरे कोने तक का सफर अब बिना किसी ट्रैफिक जाम और फर्राटेदार रफ्तार के तय किया जा सके? जी हां, उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने वाली एक बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम अब युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। हम बात कर रहे हैं बहुप्रतीक्षित गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड हाईवे की, जिसने अब ज़मीन पर उतरने की तरफ एक और बड़ा कदम बढ़ा दिया है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस मेगा प्रोजेक्ट के एक हिस्से की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर (DPR) को अंतिम रूप देकर दिल्ली स्थित मुख्य मुख्यालय को मंजूरी के लिए भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सब कुछ ठीक रहा तो इस साल के आखिरी यानी नवंबर-दिसंबर तक इसके टेंडर भी आमंत्रित किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं कि यह हाईवे किस तरह उत्तर प्रदेश के भूगोल और अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदलकर रख देगा।

700 किलोमीटर लंबा सफर और उत्तर प्रदेश के 19 जिले

यह कोई आम सड़क नहीं होगी, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की रीढ़ को मजबूत करने वाला एक सुपर कॉरिडोर होगा। करीब 700 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड हाईवे की परिकल्पना पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच की दूरी को पाटने के लिए की गई है। मजे की बात यह है कि यह केवल यूपी तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के एक जिले को भी अपने साथ जोड़ेगा।

यह हाईवे प्रदेश के कुल 19 जिलों से होकर गुजरेगा। इन जिलों के नाम सुनते ही आपको अंदाजा लग जाएगा कि यह कितना बड़ा प्रोजेक्ट है:

  • पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड: शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और उत्तराखंड का हरिद्वार।
  • मध्य और तराई क्षेत्र: शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर।
  • पूर्वांचल क्षेत्र: सिद्धार्थनगर, संत कबीरनगर, गोरखपुर और कुशीनगर।

दो चरणों में बंटा है पूरा प्रोजेक्ट

इस मेगा हाईवे के निर्माण कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है:

पहला चरण: यह चरण शामली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर तक जाएगा, जहां यह शाहजहांपुर-खुटार हाईवे (NH-731) पर पुवायां के पास समाप्त होगा।

दूसरा चरण: यह चरण आगे बढ़ते हुए गोरखपुर तक पहुंचेगा और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के पास स्थित रामपुर गांव में जाकर समाप्त होगा।

व्यापार, कृषि और समय की होगी भारी बचत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस ग्रीनफील्ड हाईवे के बन जाने से केवल यात्रियों का समय ही नहीं बचेगा, बल्कि राज्य की इकोनॉमी को भी पंख लग जाएंगे। वर्तमान में गोरखपुर से शामली या दिल्ली जाने वाले लोगों को लंबा और绕दार रास्ता तय करना पड़ता है। लेकिन इस नए हाईवे के बनने से सीधे तौर पर कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

किसानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा। तराई और पूर्वांचल के जिलों में पैदा होने वाले कृषि उत्पाद, फल और सब्जियां अब कम समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की मंडियों तक पहुंच सकेंगी। इसके अलावा, औद्योगिक विकास को भी इससे जबरदस्त गति मिलने की उम्मीद है, क्योंकि नए रास्ते बनने से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट (परिवहन लागत) में भारी कमी आएगी।

क्या है ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट का मतलब और लागत?

यह पूरी सड़क एक 'ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट' होगी। इसका मतलब यह है कि इसे किसी पुरानी सड़क के चौड़ीकरण के रूप में नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि इसके लिए पूरी तरह से नई जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा और एकदम नए रास्ते का निर्माण होगा।

इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 35,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च किए जाने का अनुमान है। एनएचएआई और केंद्र सरकार की इस हाई-प्रोपाइल योजना पर राज्य के प्रशासनिक गलियारों में भी पैनी नजर बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समय सीमा के भीतर धरातल पर आकार लेती है, तो यह आने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: गोरखपुर-शामली हाईवे की कुल लंबाई कितनी है?

Ans: यह प्रोजेक्ट लगभग 700 किलोमीटर लंबा है, जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल 20 जिलों (यूपी के 19 और उत्तराखंड का 1 जिला) से होकर गुजरेगा।

Q2: इस परियोजना के टेंडर कब तक जारी हो सकते हैं?

Ans: एनएचएआई के सूत्रों के अनुसार, डीपीआर मुख्यालय भेजी जा चुकी है और इस साल नवंबर-दिसंबर तक टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की पूरी संभावना है।

Q3: इस हाईवे के बनने से किन राज्यों को फायदा होगा?

Ans: मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और पश्चिमी हिस्से के बीच की दूरी कम होगी, साथ ही उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।

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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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