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अखिलेश-मायावती समेत 52 दिग्गज नेताओं को बुलेट प्रूफ जैकेट, यूपी चुनाव से पहले बड़ा सुरक्षा फेरबदल

अखिलेश-मायावती समेत 52 दिग्गज नेताओं को बुलेट प्रूफ जैकेट, यूपी चुनाव से पहले बड़ा सुरक्षा फेरबदल

राजनीति के अखाड़े में जब चुनावी सरगर्मी परवान चढ़ती है, तो सुरक्षा एजेंसियों की धड़कनें भी बढ़ जाना लाजिमी है। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य सरकार और सुरक्षा तंत्र ने एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है। खुफिया इनपुट्स और थ्रेट परसेप्शन (खतरे के आकलन) की एक गुप्त रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश के 52 दिग्गजों को बुलेट प्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई गई हैं। इस हाई-सिक्योरिटी घेरे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई बड़े नाम शामिल हैं।

अखिलेश यादव और मायावती से लेकर अपर्णा यादव तक को सुरक्षा

लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय की ठोस सलाह और राज्य सुरक्षा मुख्यालय की उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद जिन प्रमुख चेहरों को यह अतिरिक्त सुरक्षा कवच दिया गया है, उनमें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती का नाम सबसे ऊपर है। इसके अलावा, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', निषाद पार्टी के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री संजय निषाद और रामपुर से विधायक आकाश सक्सेना समेत कुल 52 वीवीआईपी नेताओं को यह सुरक्षा मुहैया कराई गई है।

दिलचस्प बात यह है कि इस लिस्ट में केवल विपक्षी दल ही नहीं, बल्कि सरकार के भीतर बैठे ताकतवर चेहरे भी शामिल हैं। सूची के अनुसार, सत्तारूढ़ दल के 11 कैबिनेट मंत्रियों को भी बुलेट प्रूफ जैकेट दी गई है, ताकि चुनावी भागदौड़ के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

क्यों पड़ी अचानक इस अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत?

चुनाव का मौसम यानी रैलियों का सैलाब, रोड शो की गड़गड़ाहट और लाखों की भीड़। ऐसे मौकों पर नेताओं की जनभागीदारी अपने चरम पर होती है। हालांकि, यही वह दौर होता है जब सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ी रहती है। खुफिया तंत्र को मिले इनपुट्स के अनुसार, चुनावी रैलियों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और उससे जुड़े संभावित जोखिमों का गहराई से आकलन किया गया था।

सुरक्षा जानकारों का मानना है कि वाई (Y) और जेड प्लस (Z+) जैसी श्रेणियों के तहत पहले से ही कमांडो और पुलिस बल तैनात रहते हैं, लेकिन मौजूदा माहौल और धमकियों के बदलते स्वरूप को देखते हुए 'बुलेट प्रूफ जैकेट' को अनिवार्य अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में जोड़ा गया है। यह राज्य के इतिहास में पहला मौका है जब इतने बड़े पैमाने पर अलग-अलग सुरक्षा श्रेणियों वाले नेताओं को यह विशेष सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं।

सुरक्षा श्रेणियों से परे जाकर उठाया गया कदम

आमतौर पर बुलेट प्रूफ जैकेट जैसी सुरक्षा व्यवस्था देश के चुनिंदा सर्वोच्च नेताओं तक ही सीमित मानी जाती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के इस ताजा फैसले ने इस दायरे को काफी व्यापक कर दिया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि केवल शीर्ष नेताओं को ही नहीं, बल्कि उन सभी महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक चेहरों को सुरक्षा कवच मिले, जिन्हें खतरे की आशंका ज्यादा है।

  • खुफिया रिपोर्ट: राज्य सुरक्षा मुख्यालय द्वारा लगातार थ्रेट एनालिसिस की जा रही है।
  • अतिरिक्त सुरक्षा: मौजूदा सुरक्षा गार्ड और एस्कॉर्ट के अलावा यह एक लेयर और जोड़ी गई है।
  • चुनावी दौरे: रैलियों और जनसभाओं के दौरान खतरे की संभावना को शून्य करना मुख्य उद्देश्य है।

नियमों और समीक्षाओं के आधार पर तय होती है सुरक्षा

गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि किसी भी नेता की सुरक्षा महज राजनीतिक रसूख के आधार पर तय नहीं होती। इसके पीछे एक लंबी प्रक्रिया होती है। राज्य स्तर की कमेटियां समय-समय पर राजनेताओं को मिलने वाली धमकियों, उनके सार्वजनिक दौरों और जनता के बीच उनकी सक्रियता की समीक्षा करती हैं।

इसी समीक्षा के निष्कर्षों के आधार पर खतरे का पैमाना तय होता है। यदि आने वाले दिनों में चुनावी सरगर्मी और बढ़ती है या किसी नेता के लिए खतरे का स्तर ऊपर जाता है, तो इस सुरक्षा में और भी बदलाव या इजाफा किया जा सकता है। फिलहाल, इन 52 नेताओं के लिए यह जैकेट्स उनके सुरक्षा बेड़े का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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