अयोध्या में प्रांतीय कृत दीपोत्सव के भव्य आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। रामनगरी के 56 घाटों पर गुरुवार से रेखांकन (मार्किंग) का कार्य आरंभ हो गया है, जिसे 30 से अधिक सदस्यों की एक विशेष टीम चार दिनों के भीतर पूरा करेगी। इस बार दीपोत्सव को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए व्यापक स्तर पर माइक्रो-प्लानिंग की गई है, जिसमें प्रशासन और शिक्षण संस्थानों की संयुक्त भागीदारी देखने को मिल रही है।
56 घाटों पर चार-चार वर्ग फीट के ब्लॉक
दीयों को व्यवस्थित और आकर्षक रूप से सजाने के लिए सभी 56 घाटों पर चार-चार वर्ग फीट के ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष और मार्किंग कमेटी के संयोजक डॉ. विनोद कुमार चौधरी के अनुसार, प्रत्येक ब्लॉक में तय संख्या के अनुसार दीपों का खाका खींचा जा रहा है। वर्तमान में घाटों की साफ-सफाई के बाद इस कार्य में मजदूरों को लगाया गया है, और 27 अक्टूबर से इन 56 घाटों पर 30 लाख दीपक बिछाने का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा।
शुक्रवार को होगा भूमि पूजन, राज्यपाल का दौरा संभावित
दीपोत्सव-2026 को सकुशल संपन्न कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सुबह 7:30 बजे सरयू तट पर स्थित घाट संख्या 10 पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन का विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया है। कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह इस भूमि पूजन की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और समन्वयक उपस्थित रहेंगे। इसके अतिरिक्त, दीपोत्सव से पूर्व सात नवंबर से पहले कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का दौरा भी प्रस्तावित है।
35 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे कमान
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कुल 35 हजार स्वयंसेवकों को तैनात किया जाएगा। इनमें अवध विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ 30 डिग्री कॉलेजों और 40 इंटर कॉलेजों के विद्यार्थी शामिल हैं। साकेत महाविद्यालय, राजकरण वैदिक पाठशाला इंटर कॉलेज, साहबदीन सीताराम इंटर कॉलेज, मनोहर लाल इंटर कॉलेज, आर्य कन्या इंटर कॉलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, शिव सावित्री महाविद्यालय, कैनोसा इंटर कॉलेज, ग्रामर इंटरनेशनल स्कूल, एमआर जयपुरिया स्कूल, बीएस गर्ल्स डिग्री कॉलेज और भगवान आशा बख्श सिंह महाविद्यालय सहित कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। ये सभी विद्यार्थी घाटों पर दीप बिछाने से लेकर उन्हें प्रज्ज्वलित करने तक की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे और इसके लिए इन्हें विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
क्यूआर कोड से होगी स्वयंसेवकों की पहचान
लाखों दीपों को प्रज्ज्वलित कर नया विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी के बीच स्वयंसेवकों का ऑनलाइन पंजीकरण अंतिम चरण में है। दीपोत्सव के नोडल अधिकारी प्रो. संत शरण मिश्र ने बताया कि पंजीकरण पूरा होने के तुरंत बाद स्वयंसेवकों को उनकी घाटवार जिम्मेदारियां और विशेष पहचान पत्र सौंपे जाएंगे। सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इन पहचान पत्रों में क्यूआर कोड की व्यवस्था की गई है। इस क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र पर स्वयंसेवक का नाम, फोटो, मोबाइल नंबर, तैनाती स्थल और क्रमांक स्पष्ट रूप से अंकित होगा। साथ ही इस पर जिला प्रशासन के प्राधिकृत अधिकारी, दीपोत्सव नोडल अधिकारी और संबंधित संस्था के अधिकृत प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी दर्ज होंगे, जिससे किसी भी तरह की डुप्लीकेसी को रोका जा सके और सत्यापन आसानी से हो सके।