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अयोध्या राम मंदिर में शुरू हुआ भव्य पंचायतन यज्ञ, गूंजे वैदिक मंत्र

अयोध्या राम मंदिर में शुरू हुआ भव्य पंचायतन यज्ञ, गूंजे वैदिक मंत्र

अयोध्या की पावन धरती पर सनातन संस्कृति और धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में एक नया और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर परिसर में स्थित यज्ञशाला में रविवार को विधि-विधान के साथ नित्य पंचायतन यज्ञ काारंभ कर दिया गया है। इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर राम भक्तों और श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर निर्माण के साथ-साथ यहाँ होने वाले इन आध्यात्मिक आयोजनों से पूरा क्षेत्र राममय हो गया है।

क्या है पंचायतन यज्ञ और इसका महत्व?

सनातन परंपरा में पंचायतन पूजा या यज्ञ का विशेष स्थान होता है। इसमें एक साथ पांच प्रमुख देवताओं की आराधना की जाती है। श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर की यज्ञशाला में शुरू हुए इस अनुष्ठान के पहले दिन विशेष रूप से जगत के पालनहार भगवान विष्णु के साथ-साथ सनातन धर्म के पांचों प्रमुख देवताओं- प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश, सूर्य देव, भगवान शिव और आदिशक्ति मां दुर्गा (शक्ति) की विधि-विधान से पूजा की गई।

यज्ञ के दौरान इन सभी देवी-देवताओं के निमित्त वेदमंत्रों के उच्चारण के साथ पवित्र आहुतियां डाली गईं। जानकारों के अनुसार, पंचायतन पद्धति से होने वाले यज्ञ से संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संतुलन बनता है और सकारात्मकता का संचार होता है। इस यज्ञ का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर और उसके आसपास के वातावरण को पूरी तरह से पवित्र, ऊर्जावान और दैवीय प्रभावों से परिपूर्ण बनाए रखना है।

पहले दिन ट्रस्ट के अभियंता रहे यजमान

यह अनवरत (लगातार) चलने वाला धार्मिक यज्ञ है, जो आने वाले दिनों में भी इसी तरह जारी रहेगा। अनुष्ठान के पहले दिन यानी रविवार को यजमान की भूमिका श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निर्माण अभियंता जगदीश आफले ने अपनी धर्मपत्नी के साथ निभाई। दोनों ने पूरे आचार-विचार और अनुशासित तरीके से बैठकर यज्ञ की प्रथम आहुतियां प्रदान कीं और भगवान का आशीर्वाद लिया।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इस यज्ञ की रूपरेखा बेहद सुनियोजित तरीके से तैयार की गई है। इसके तहत आने वाले अलग-अलग दिनों में भिन्न-भिन्न यजमानों को इस अनुष्ठान में बैठने का अवसर मिलेगा। समाज के विभिन्न वर्गों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों को इस पवित्र प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की योजना है।

सुबह के सत्र में हुआ यज्ञ का संचालन

यज्ञ के सुचारू संचालन के लिए समय निर्धारित किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायतन यज्ञ प्रतिदिन सुबह आठ बजे से शुरू होकर दोपहर बारह बजे तक यानी कुल चार घंटे तक संचालित होता है। इस दौरान वैदिक विद्वानों और आचार्यों के मंत्रोच्चार से पूरी यज्ञशाला गूंज उठती है। यज्ञशाला के आसपास का पूरा माहौल पूरी तरह से आध्यात्मिक हो चुका है, जहाँ श्रद्धालुओं को वेदों की ऋचाओं को सुनने का सौभाग्य मिल रहा है।

मंदिर निर्माण के साथ जारी हैं धार्मिक अनुष्ठान

एक तरफ जहाँ अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर है, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक और अनुष्ठानिक गतिविधियां भी समानांतर रूप से पूरी भव्यता के साथ चल रही हैं। मंदिर के गर्भगृह और परिसरों की दिव्यता को बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे विशेष यज्ञ और हवन आयोजित किए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों और देश के कोने-कोने से अयोध्या पहुंच रहे राम भक्तों का मानना है कि इन यज्ञों के होने से इस पवित्र भूमि की ऊर्जा कई गुना बढ़ गई है। पंचायतन यज्ञ के इस लंबे अनुष्ठान के दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को न केवल भगवान श्री रामलला के दर्शन का लाभ मिल रहा है, बल्कि वे यज्ञशाला में चल रहे इन वैदिक मंत्रोच्चारों के भी साक्षी बन रहे हैं।

आने वाले दिनों में इस यज्ञ में शामिल होने वाले अन्य यजमानों और इससे जुड़े और भी धार्मिक आयोजनों पर देश भर के सनातन प्रेमियों की निगाहें टिकी हुई हैं। यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि अयोध्या में केवल पत्थरों का भव्य ढांचा ही नहीं खड़ा हो रहा, बल्कि सदियों पुरानी सनातन संस्कृति और परंपराओं को भी उसी दिव्यता के साथ पुनर्जीवित किया जा रहा है।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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