देवा मेले से ठीक पहले प्रशासनिक व्यवस्थाओं और गौशालाओं के दावों पर उठे गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में गौवंश संरक्षण के नाम पर सरकारी खजाने से हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन मैदानी हकीकत इससे कोसों दूर नजर आती है। देवा क्षेत्र की प्रमुख सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गोवंश सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं। विशेषकर देवा-विशुनपुर मार्ग पर रात ढलते ही सैकड़ों की संख्या में गोवंशों का जमावड़ा लग जाता है। सड़क पर झुंड बनाकर खड़े रहने और बैठने वाले इन पशुओं के कारण रात के समय गुजरने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दुर्घटनाओं का बढ़ रहा खतरा
सड़क के बीचों-बीच डेरा डाले रहने वाले इन गोवंशों के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और भी विकट हो सकती है, क्योंकि आगामी 27 अक्टूबर से प्रसिद्ध देवा मेला शुरू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक मेले में देश-विदेश और आसपास के जिलों से प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और भारी वाहनों का आगमन होता है, जिससे क्षेत्र में यातायात का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है। ऐसे में सड़कों पर बैठे ये गोवंश किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं, जिससे विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों की जान को सबसे बड़ा जोखिम है।
जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल
सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं की इस स्थिति ने नगर पंचायत देवा और स्थानीय विकास खंड के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नगर पंचायत क्षेत्र में पशुओं के उचित प्रबंधन और ग्रामीण इलाकों में उनके संरक्षण के लिए धरातल पर क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। जब गौशालाओं के संचालन और चारे के नाम पर भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है, तो फिर भूखे-प्यासे गोवंश सड़कों पर भटकने के लिए क्यों मजबूर हैं? क्या संबंधित विभागों द्वारा गौशालाओं की वास्तविक क्षमता, वहां पल रहे पशुओं की संख्या और उनके रखरखाव की समय-समय पर नियमित जांच की जाती है?
प्रशासन का पक्ष और आगामी कार्रवाई
स्थानीय लोग अब इस समस्या के किसी स्थायी और पुख्ता समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। देवा मेला विधिवत शुरू होने से पहले सभी निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित रूप से गोवंश आश्रय स्थलों या गौशालाओं में पहुंचाने तथा किसी भी संभावित बड़े हादसे की आशंका को पूरी तरह दूर करने के लिए प्रशासन को त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की सख्त जरूरत है। इस पूरे मामले पर बाराबंकी के जिलाधिकारी (डीएम) ईशान प्रताप सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि आगामी देवा मेले के आयोजन से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए जा चुके हैं। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को यातायात या अन्य किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।