प्रसिद्ध देवा मेला शुरू होने में अब एक सप्ताह से भी कम का समय बचा है, लेकिन मेला परिसर में तैयारियों के दावों के बीच गंभीर अव्यवस्थाएं और लापरवाही सामने आ रही हैं। साफ-सफाई और रंगरोगन का काम अंतिम चरण में होने के बावजूद कई जगहों पर बुनियादी और सुरक्षा से जुड़े काम अधूरे पड़े हैं।
बाराबंकी जिले में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मेले में हर साल देश-विदेश से लाखों जायरीन और श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार मेला परिसर के भीतर कई स्थानों पर सुरक्षा और सुविधाओं के मोर्चे पर इंतजाम कमजोर नजर आ रहे हैं। कंबल वाली गली में बिजली का एक मुख्य खंभा काफी हद तक झुका हुआ है, और हैरानी की बात यह है कि इस खतरनाक स्थिति के बावजूद उसी खंभे से बिजली की आपूर्ति लगातार जारी रखी जा रही है। मेले के दौरान यहां से भारी संख्या में दुकानदारों, पर्यटकों और जायरीनों की आवाजाही होती है, ऐसे में यह ढीला या झुका हुआ खंभा किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकता है। इसके बाद भी संबंधित बिजली विभाग या मेला प्रबंधन ने इस गंभीर तकनीकी खामी को दुरुस्त करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
खिलाड़ियों के टेंट और अन्य बुनियादी खामियां
मेला परिसर के भीतर खेल गतिविधियों और मेहमान खिलाड़ियों के ठहरने के पुख्ता इंतजामों का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। हॉकी मैदान के बिल्कुल पास खिलाड़ियों के ठहरने के लिए टेंट तो लगा दिए गए हैं, लेकिन उस टेंट के ठीक नीचे बड़ी-बड़ी और घनी घास उगी हुई है। इस अवांछित घास और झाड़ियों की सफाई न कराए जाने के कारण वहां जहरीले कीड़े-मकोड़ों, सांपों और अन्य खतरनाक जीव-जंतुओं के छिपे होने का अंदेशा बना हुआ है। इससे वहां रहने वाले खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
इसके अलावा, मेले की अन्य प्रमुख गलियों और सेक्टरों में भी बदइंतजामी साफ देखी जा सकती है। बक्सा वाली गली में लोहे और टिन के शेड टूटे-फूट पड़े हैं, जिससे बारिश या तेज धूप की स्थिति में दुकानदारों और खरीदारों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, मेला परिसर के सेक्टर छह में नाला पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे गंदे पानी के निकास में बाधा आने के साथ-साथ राहगीरों के गिरने का खतरा भी बना हुआ है। बाहरी हिस्से में की जा रही रंगाई-पुताई और सजावट के चमक-दमक के बीच अंदरूनी और बुनियादी सुविधाओं की यह अनदेखी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रशासन का पक्ष और आगे की कार्रवाई
मेला शुरू होने में अब केवल कुछ ही दिन शेष बचे हैं और ऐसे में इन तमाम खामियों के समय रहते दूर न होने से स्थानीय लोगों और दुकानदारों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि, इस पूरे मामले के तूल पकड़ने और प्रशासनिक लापरवाही उजागर होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है।
बाराबंकी के जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि संबंधित विभागों के सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं। मेला आधिकारिक रूप से शुरू होने से पहले परिसर की सभी व्यवस्थाओं को पूरी तरह सुधार लिया जाएगा और इसमें किसी भी स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तय समय-सीमा के भीतर अधिकारी इन कमियों को दूर कर पाते हैं या नहीं।