लखनऊ में पुलिस स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिसकर्मियों के भत्ते बढ़ाने की घोषणा की, साथ ही कानून-व्यवस्था और पिछली सरकारों की नीतियों पर तीखा हमला बोला।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर लखनऊ में आयोजित स्मृति परेड में पुलिस बल के कल्याण के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने घोषणा की कि फील्ड ड्यूटी में तैनात उपनिरीक्षकों और निरीक्षकों का मोटरसाइकिल भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह किया जा रहा है। इसके साथ ही, पीपीएस संवर्ग के अधिकारियों का वर्दी भत्ता 6,400 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है। फील्ड ड्यूटी में तैनात आरक्षियों और मुख्य आरक्षियों के सिम भत्ते को भी 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति माह करने का निर्णय लिया गया है।
शहीदों को श्रद्धांजलि और आंकड़े
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस शहीद शहीद स्मारक स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर अमर शहीदों को नमन किया। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान देश भर में 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है, जिनमें उत्तर प्रदेश के छह जवान शामिल हैं। इन जवानों में उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, आरक्षी अशोक कुमार, आरक्षी प्रदीप कुमार, फायर सर्विस चालक वीरपाल सिंह और फायरमैन मोहित कुमार शामिल हैं। वर्ष 2017 के बाद से अब तक अपराध नियंत्रण के अभियानों में उत्तर प्रदेश के 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं और 1,953 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके अलावा, पुलिस सैलरी पैकेज के तहत शहीदों के आश्रितों को अब तक 425 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
पुलिस स्मृति दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ
मुख्यमंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 21 अक्टूबर, 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद सरकार की स्थापना की थी। वहीं, 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 10 वीर जवानों ने चीनी आक्रमण का डटकर मुकाबला करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पुलिस स्मारक राष्ट्र की भावी पीढ़ियों को इन जवानों के साहस और बलिदान की प्रेरणा देता है।
पिछली सरकारों और कानून-व्यवस्था पर प्रहार
पूर्ववर्ती सपा सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 815 दंगे हुए थे। उस दौर में अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और पुलिस पर अनुचित दबाव बनाया जाता था। मथुरा के जवाहर बाग जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि तब अपराधियों के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की जाती थी। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद पुलिस को राजनीतिक बेड़ियों से मुक्त किया गया, जिसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश अब उपद्रव से 'उत्सव प्रदेश' बन चुका है। अपराधियों के अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों पर गरीबों के लिए आवास बनाए जा रहे हैं। हाल ही में प्रयागराज में ऐसे 602 फ्लैटों के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया है। माफिया तत्वों की 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं।
बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमताओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सात बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है। पुलिस प्रशिक्षण क्षमता को पिछले नौ वर्षों में 6 हजार से बढ़ाकर 60 हजार किया गया है। पारदर्शी प्रक्रिया के तहत 2.26 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है, जबकि 35 हजार पदों पर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। पुलिस बल में महिला कार्मिकों की संख्या 10 हजार से बढ़कर 45 हजार तक पहुंच गई है। इसके अलावा, वीरांगना ऊदा देवी पासी, झलकारी बाई कोरी और अवंती बाई लोधी के नाम पर तीन नई महिला पीएसी बटालियनों का गठन किया गया है। साइबर अपराधों से निपटने के लिए हर जनपद में साइबर थाना और हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, पीएसी के पुलिस महानिदेशक आलोक सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और शहीद परिवारों के परिजन उपस्थित रहे।