मछुआरा समाज के आरक्षण के मुद्दे पर सहयोगी दल ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी, दिल्ली के महासम्मेलन में दी दो टूक चेतावनी
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में खींचतान के संकेत सामने आए हैं। बीजेपी की सहयोगी पार्टी निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने अपनी ही गठबंधन सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मछुआरा समाज के आरक्षण के दावों पर जल्द से जल्द आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया, तो उनकी पार्टी भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक विकल्प की ओर रुख करने पर विचार कर सकती है।
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में शक्ति प्रदर्शन
राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित एक विशाल महासम्मेलन के दौरान संजय निषाद ने यह आक्रामक तेवर दिखाए। इस सम्मेलन में देश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में मछुआरा समुदाय और निषाद समाज के लोग शामिल हुए थे। मंच से अपने संबोधन के दौरान संजय निषाद ने केंद्र और राज्य की सरकारों का ध्यान इस लंबे समय से लंबित मांग की ओर आकर्षित किया।
आरक्षण पर लंबे समय से चल रहा है असमंजस
निषाद पार्टी लगातार यह मांग करती रही है कि संविधान के दायरे में आने वाली मछुआरा जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। पार्टी का तर्क है कि कागजी प्रक्रिया और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण इस समाज को अभी तक इसका पूरा अधिकार नहीं मिल पाया है। पार्टी अध्यक्ष का कहना है कि समाज के युवाओं और परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अब इस विषय पर टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गठबंधन की राजनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य में चुनाव से पहले इस तरह का सार्वजनिक अल्टीमेटम सत्तारूढ़ दल के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। निषाद समाज का उत्तर प्रदेश के कई पूर्वी जिलों की विधानसभा सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। ऐसे में गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीतियों के बीच यह मांग एक नया मोड़ ले सकती है, जिस पर आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच उच्च स्तर पर बातचीत होने की संभावना है।