ब्रिटिश नागरिकों को इंटरनेट गति बढ़ाने और साइबर अपराध से बचाने का झांसा देकर ठगी करने वाले गोरखपुर के बेतियाहाता स्थित फर्जी कॉल सेंटर मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी मामले में मुख्य आरोपी अनिक दत्ता की 3.72 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर लिया गया है। यह नेटवर्क भारत और ब्रिटेन के बीच सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बेतियाहाता इलाके में संचालित इस फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा साल 2023 में हुआ था। भारत और ब्रिटेन के स्थानीय समय में साढ़े चार घंटे का अंतर होने के कारण, वहां सुबह 8:30 बजे के बाद यहां दोपहर करीब एक बजे यह कार्यालय पूरी तरह सक्रिय होता था। ब्रिटेन में सुबह का वक्त होते ही यहां ठगी का खेल शुरू कर दिया जाता था। कार्यालय में करीब 25 कर्मचारी काम करते थे, जिनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाती थी और ड्यूटी के दौरान उनके मोबाइल फोन रिसेप्शन पर ही जमा करा लिए जाते थे। रात नौ बजे काम समाप्त होने पर ही उन्हें उनके फोन वापस मिलते थे। इन कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर लगभग 10,000 मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने का सख्त लक्ष्य दिया जाता था।
तीन चरणों में होता था ठगी का पूरा षड्यंत्र
साइबर सेल की गहन जांच में सामने आया कि इस गिरोह द्वारा पीड़ितों को फंसाने के लिए एक सुनियोजित तीन-चरणीय प्रक्रिया अपनाई जाती थी। सबसे पहले, कॉल सेंटर से ब्रिटेन की इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी 'ओपनरीच' का प्रतिनिधि बनकर फोन किया जाता था। ग्राहकों को उनके इंटरनेट कनेक्शन की गति कम होने की बात कहकर उसकी जांच का भरोसा दिया जाता था। यदि कोई उपभोक्ता इस झांसे में आ जाता था, तो उसकी बात कॉल सेंटर के सुपरवाइजर से कराई जाती थी, जो विदेशी नाम का उपयोग कर बातचीत करता था और समस्या दूर करने का दिलासा देता था।
इसके कुछ समय बाद उसी व्यक्ति को दोबारा फोन किया जाता था, जिसमें कॉल करने वाला खुद को वीपीएन (VPN) कंपनी का कर्मचारी बताता था। इंटरनेट कनेक्शन की सुरक्षा की जांच करने के बहाने उपभोक्ता का भरोसा पूरी तरह जीत लिया जाता था। इसके बाद, तीसरे और अंतिम चरण में फोन कर खुद को ब्रिटेन की राष्ट्रीय अपराध एजेंसी (National Crime Agency) या एंटी फ्रॉड स्क्वाड का अधिकारी बताया जाता था। पीड़ित को डराया जाता था कि उसके इंटरनेट कनेक्शन पर बड़ा साइबर हमला हुआ है और उसके बैंक खातों से जुड़ी वित्तीय धोखाधड़ी की गंभीर जांच चल रही है। कथित अपराधी को पकड़ने का झांसा देकर पीड़ित पर दबाव बनाया जाता था कि वह अपनी सुरक्षित रकम तत्काल दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दे।
लंदन और कोलकाता तक फैला था अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
इस पूरी ठगी के संचालन के लिए एक विस्तृत नेटवर्क काम कर रहा था। पुलिस की जांच के अनुसार, लंदन में रहने वाले गिरोह के दो सहयोगी जुनैद और अश्वनी ब्रिटेन की इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों के उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर और उनके बैंक खातों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां जुटाते थे। इसके बाद, कोलकाता में बैठा एक अन्य सहयोगी इस डेटा को गोरखपुर के बेतियाहाता स्थित कॉल सेंटर तक पहुंचाता था। जैसे ही विदेशी नागरिक ठगी के जाल में फंसकर अपनी रकम ट्रांसफर करते थे, उस धन को तुरंत अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर सेवाओं के माध्यम से निकाला जाता था या अन्य गुप्त खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था।
पुलिस की छापेमारी और अब ईडी की कार्रवाई
इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब कॉल सेंटर में ही काम करने वाले एक युवक ने पुलिस को इस गुप्त रैकेट की जानकारी दी। इस सुराग के आधार पर साइबर थाना पुलिस और क्राइमBranch की टीमों ने लगातार करीब तीन महीने तक इस कॉल सेंटर की गतिविधियों की निगरानी की और साक्ष्य जुटाए। आरोपों की पूरी पुष्टि होने के बाद, 17 अगस्त 2023 को पुलिस ने बेतियाहाता स्थित इस ठिकाने पर छापा मारकर इस बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया और मौके से आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
स्थानीय पुलिस और साइबर सेल की इस कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से शिकंजा कसा है। ईडी ने जांच के दायरे को आगे बढ़ाते हुए मुख्य आरोपी अनिक दत्ता की 3.72 करोड़ रुपये की अचल और चल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क करने की आधिकारिक कार्रवाई की है। मामले में वित्तीय लेन-देन और अन्य संलिप्त लोगों की तलाश के लिए आगे की जांच अभी जारी है।