टेंडर से लेकर भुगतान तक के सभी वित्तीय और तकनीकी दस्तावेजों की हो रही है गहन छानबीन
देशभर में महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस सिलसिले में मिशन के कार्यों से जुड़ी 13 फर्मों और संस्थाओं को जांच के दायरे में लिया गया है। जांच एजेंसी ने इन सभी संबंधित कंपनियों से उनके कॉन्ट्रैक्ट, टेंडर प्रक्रिया और हुए भुगतानों का पूरा हिसाब-किताब तलब किया है।
ईडी की इस कार्रवाई के तहत मुख्य रूप से टेंडर आवंटन की प्रक्रिया, कुल कॉन्ट्रैक्ट राशि, टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड के दस्तावेज, तथा पानी की टंकियों के निर्माण से लेकर सरकारी फंड के वास्तविक उपयोग तक के रिकॉर्ड की मांग की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इन दस्तावेजों के जरिए यह जांचा जा रहा है कि मिशन के तहत निर्धारित मानकों और नियमों का पालन हुआ है या नहीं।
जांच के दायरे में शामिल प्रमुख फर्में और संस्थाएं
प्रवर्तन निदेशालय की इस प्रारंभिक जांच और दस्तावेजों की मांग के दायरे में कुल 13 व्यावसायिक और सामाजिक संस्थाएं आई हैं, जो देश के अलग-अलग शहरों से संचालित होती हैं। इन फर्मों की सूची इस प्रकार है:
- मेसर्स इन्फोटेक सॉल्यूशंस, नोएडा
- मेसर्स विल्सन ग्रीन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद
- मेसर्स एक्शन फॉर रूरल डेवलपमेंट, ग्रेटर नोएडा
- मेसर्स ऐपिनवेंटिव टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा
- मेसर्स न्यू जेनेसिस, दिल्ली
- मेसर्स प्योर लाइफ सोसाइटी, अमरावती
- मेसर्स संज्ञान, लखनऊ
- मेसर्स अंबर प्रेस प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ
- मेसर्स सार्वजनिक शिक्षा संस्थान, लखनऊ
- मेसर्स वेलफेयर एंड इलस्ट्रेशन ऑफ नीडी रूरल सोसाइटी, लखनऊ
- मेसर्स स्वजन फाउंडेशन, लखनऊ
- मेसर्स फाल्कन, मुंबई
- मेसर्स जानकी प्रसाद मेमोरियल रिसर्च एंड एजुकेशनल ट्रस्ट, महाराजगंज
इन सभी फर्मों को नोटिस और पत्राचार के माध्यम से उनके कार्यक्षेत्र से जुड़े वित्तीय लेनदेन और समझौतों के सबूत उपलब्ध कराने को कहा गया है।